SIR या फॉर्म 6 पर कोई नया आर्डर नहीं आया, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर क्या कहा?

SIR या फॉर्म 6 पर कोई नया आर्डर नहीं आया, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर क्या कहा?


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SIR या फॉर्म 6 पर कोई नया आर्डर नहीं, चुनाव आयोग ने SC का हवाला देकर क्या कहा?

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चुनाव आयोग के अनुसार, वोटर लिस्ट रिवीजन और फॉर्म-6 कोई नया बदलाव नहीं है. बिहार, असम और अन्य राज्यों के रिवीजन आदेशों को चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दोनों आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी. आयोग ने साफ किया कि फॉर्म-6 के साथ डिक्लेरेशन लेने का नियम कानूनी तौर पर सही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा है.

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CEC ज्ञानेश कुमार (File Photo : PTI)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर उठ रहे सवालों पर हम सफाई दी है. आयोग के सूत्रों ने साफ किया है कि बिहार और असम समेत कई राज्यों में जारी रिवीजन आर्डर्स पर कोई विवाद नहीं है. इन सभी फैसलों को चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दोनों चुनाव आयुक्तों ने पूरी सहमति से मंजूरी दी थी. आयोग ने साफ किया कि नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म लेना वैध है. यह व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 21(3) के तहत लागू की गई है. आयोग का कहना है कि यह नियम पूरी तरह सही है और देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानूनी प्रावधान को बरकरार रखा है.

सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा चुनाव आयोग का विवाद?

चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीईसी ने दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कई अहम फैसले लिए. वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की इस याचिका में इन फैसलों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि आयोग में सामूहिक निर्णय की कानूनी अनिवार्यता तोड़ी गई है. सीईसी के खिलाफ आधिकारिक कर्तव्य के उल्लंघन के तहत आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की गई है.

फॉर्म 6 और सॉफ्टवेयर बदलावों पर क्या उठे थे सवाल?

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं. मुख्य विवाद नए वोटर्स के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव और सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर शुरू हुआ. आरोप है कि नियमों में जरूरी संशोधन किए बिना ही पूर्वजों के विवरण की शर्त सॉफ्टवेयर में जोड़ दी गई. दोनों आयुक्तों का मानना था कि तय प्रक्रिया के बिना ऐसा बदलाव नहीं हो सकता. इसके अलावा डिजिटल सिस्टम के केंद्रीकरण और गोवा में 97 वोटर्स के नाम दोबारा न जुड़ पाने का मुद्दा भी उठाया गया.

सीईसी के इस्तीफे पर क्यों अड़ा विपक्ष?



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