इस्लामाबाद: दुनिया की नजरों में पाकिस्तान आतंकवाद का अड्डा है, लेकिन क्या कभी सोचा है कि कंगाल पाकिस्तान में इतनी बड़ी-बड़ी ‘आतंकी फैक्ट्रियां’ चलती कैसे हैं? इसकी पूरी स्क्रिप्ट सात समंदर पार बैठा अमेरिका और तेल के कुओं पर बैठा सऊदी अरब लिख रहे हैं. असलियत ये है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी की छावनी में चलने वाले ये ट्रेनिंग कैंप सिर्फ पाकिस्तानी सेना या ISI के छोटे दिमाग की उपज नहीं थे, बल्कि इनके पीछे वॉशिंगटन और रियाद का अरबों डॉलर का सीक्रेट नेटवर्क काम कर रहा था. जिसका 5 अरब डॉलर का खेल अब बाहर आ चुका है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े अलमबरदारों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं.
पाकिस्तान के दिग्गज नेता का आतंकवाद पर बड़ा कबूलनामा
पाकिस्तान के पूर्व सूचना मंत्री और पाक-चीन इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने न्यूज18 से एक्सक्लूसिव बातची में जो खुलासे किए हैं, उसने इस्लामाद हिलाकर रख दिया है. मुशाहिद हुसैन ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि 1980 के दशक में पाकिस्तान ने अल-कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन और उसके उत्तराधिकारी अयमन अल-जवाहिरी जैसे खूंखार आतंकियों को न सिर्फ अपने देश में पनाह दी, बल्कि उन्हें आतंकवाद का बाकायदा कोर्स करवाया.
ये कोई मामूली बात नहीं है; ये पाकिस्तान की तरफ से हुआ अब तक का सबसे बड़ा और आधिकारिक कबूलनामा है, जिसने इस्लामाबाद के उस पुराने झूठ को हमेशा के लिए दफना दिया है जिसमें वो खुद को केवल ‘आतंकवाद का पीड़ित’ बताते आए थे.
CIA और सऊदी अरब का 5 अरब डॉलर का खतरनाक खेल
अब बात करते हैं उस 5 अरब डॉलर के खेल की, जो सऊदी अरब और CIA मिलकर चला रहे थे. मुशाहिद हुसैन ने खुलासा किया कि 1980 के दशक में जब सोवियत संघ (रूस) ने अफगानिस्तान में कदम रखा, तो अमेरिका बौखला गया. रूस को हराने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और सऊदी अरब ने मिलकर एक सीक्रेट प्लान बनाया. इस प्लान का नाम दिया गया ‘अफगान जिहाद’. लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए उन्हें एक मोहरे की जरूरत थी, और वो मोहरा बना पाकिस्तान.
अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर पाकिस्तान को लगभग 5 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम थमाई. इस पैसे का काम सिर्फ युद्ध लड़ना नहीं था, बल्कि इससे पाकिस्तान में बाकायदा ‘आतंकी फैक्ट्रियां’ खोली गईं. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को इस बजट का ठेकेदार बनाया गया, जिसने मदरसों और गुप्त ट्रेनिंग कैंपों के जरिए हजारों नौजवानों के दिमाग में जहर भरा और उन्हें अत्याधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग दी. यानी जो आतंकवाद पूरी दुनिया में कायरता से अटैक करता है, उसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट CIA और सऊदी डॉलर की मदद से तैयार की गई थी.
1 लाख अफगान और 20 हजार अरब लड़ाके: ओसामा-जवाहिरी की ट्रेनिंग
मुशाहिद हुसैन के इस सनसनीखेज खुलासे में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. उन्होंने बताया कि इस 5 अरब डॉलर के फंड से पाकिस्तान की सरजमीं पर लगभग 1,00,000 अफगानी लड़ाकों और 20,000 अरबों को खतरनाक आतंकी ट्रेनिंग दी गई थी.
सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आता है जब सीनेटर ये खुलासा करते हैं कि इन्हीं 20 हजार अरब लड़ाकों की भीड़ में ओसामा बिन लादेन और अयमन अल-जवाहिरी भी शामिल थे! ISI ने अमेरिकी सीआईए की बाकायदा गुजारिश पर अल-कायदा के इन आकाओं को हथियार चलाने, IED बनाने और गुरिल्ला वॉरफेयर की बारीकियां सिखाई थीं. जिस ओसामा बिन लादेन ने आगे चलकर अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 9/11 हमला करके हजारों बेगुनाहों की जान ली, उस लादेन को आतंकी बनाने की पहली ईंट अमेरिका की ही शह पर पाकिस्तान में रखी गई थी.
जिहाद के ड्रामे के पीछे एटम बम बनाने का गुप्त प्लान
इस पूरे खुलासे में एक और बहुत बड़ा राज छुपा हुआ है, पाकिस्तान ने इस जिहादी ड्रामे की आड़ में अपना सबसे बड़ा उल्लू सीधा किया. जब 1980 के दशक में अमेरिका, सऊदी अरब और पूरा पश्चिमी मीडिया केवल सोवियत संघ को अफगानिस्तान में पटखनी देने में व्यस्त थे, तब पाकिस्तान के हुक्मरान पीछे से अपना एक अलग ही खतरनाक खेल कर रहे थे.
सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने माना कि अफगान युद्ध की वजह से जब अमेरिका का ध्यान भटका हुआ था, तब पाकिस्तान ने चुपके से अपने परमाणु हथियार विकसित कर लिए! अमेरिका को उस समय सोवियत संघ को हराने के लिए पाकिस्तान की इतनी सख्त जरूरत थी कि उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की तरफ से जानबूझकर अपनी आंखें मूंद लीं. यानी पाकिस्तान एक तरफ तो अमेरिका से जिहाद के नाम पर अरबों डॉलर की फंडिंग ऐंठ रहा था और दूसरी तरफ उसी दौरान उसने अपनी परमाणु ताकत भी बढ़ा ली.
अमेरिका का ‘सुसाइडल अलायंस’ और भस्मासुर बना पाकिस्तान
ये अमेरिका और पाकिस्तान के उस ‘सुसाइडल अलायंस’ का जीता-जागता सबूत है जिसने पूरी दुनिया की शांति को हमेशा के लिए खतरे में डाल दिया. अमेरिका ने फायदे के लिए एक ऐसा भस्मासुर पैदा किया, जिसने आगे चलकर उसी को डंस लिया.
जब सोवियत संघ अफगानिस्तान से हारकर वापस लौट गया, तो अमेरिका ने भी वहां से अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया. लेकिन पाकिस्तान के पास अब 1 लाख से भी ज्यादा ट्रेंड, सिरफिरे और हथियारों से लैस आतंकियों की एक पूरी फौज तैयार खड़ी थी. जब अफगानिस्तान में काम खत्म हो गया, तो पाकिस्तान की ISI ने इन आतंकियों की बंदूकों का रुख भारत और कश्मीर की तरफ मोड़ दिया. और कुछ ही सालों बाद, इन्हीं ट्रेनिंग कैंपों से निकले अल-कायदा के आतंकियों ने अमेरिका के दिल पर 9/11 जैसा घाव दे दिया.
ग्लोबल पॉलिटिक्स और भारत पर इस खुलासे का क्या असर होगा?
- पाकिस्तानी कूटनीति का पर्दाफाश: पाकिस्तान हमेशा खुद को आतंकवाद का शिकार बताकर दुनिया से सहानभूति मांगता रहता है. लेकिन उसके अपने ही सीनियर नेता का ये बयान साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पीड़ित नहीं, बल्कि उसका जनक और सप्लायर है.
- अमेरिका और पश्चिमी देशों का दोहरा चेहरा: इस खुलासे से साफ हो जाता है कि अमेरिका की ‘वॉर ऑन टेरर’ की बुनियाद में ही खोट था. जिस आतंकवाद का पौधा उसने खुद सींचा, बाद में उसी को मिटाने के नाम पर उसने दुनिया भर में युद्ध लड़े.
- अंतरराष्ट्रीय दबाव और एफएटीएफ (FATF): यद्यपि ये घटनाक्रम 80 के दशक का है, लेकिन एक मौजूदा सीनेटर का आधिकारिक कबूलनामा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख को पूरी तरह तबाह कर देगा. जब भी पाकिस्तान IMF या विश्व बैंक से बेलआउट पैकेज मांगने जाएगा, उसकी ये काली सच्चाई उसके सामने खड़ी होगी.
- भारत के स्टैंड की जीत: भारत दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये कहता आया है कि पाकिस्तान स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म की सबसे बड़ी नर्सरी है. मुशाहिद हुसैन के इस बयान ने भारत के दावों पर 100% मुहर लगा दी है.