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Gold Loan: भारतीय अब जमकर गोल्ड लोन ले रहे हैं. पिछले दो वर्षों के दौरान गोल्ड लेने वालों की संख्या में 4.4 गुना काउछाल आया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, सोने की ज्वेलरी के बदले दिए जाने वाले लोन जुलाई 2024 के ₹1.24 लाख करोड़ से सीधे छलांग लगाकर जुलाई 2026 में ₹5.52 लाख करोड़ के पार पहुंच गए. जुलाई 2025 में यह आंकड़ा ₹2.06 लाख करोड़ था. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि देश के किस हिस्से के लोग सबसे ज्यादा गोल्ड लोन ले रहे हैं.
जब भी सोने के बदले कर्ज यानी गोल्ड लोन की बात उठती है, तो दक्षिण भारत का दबदबा साफ आता है. देशभर में इस सेगमेंट का दायरा तेजी से बढ़ने के बावजूद, सोने के बदले कर्ज लेने का असली गढ़ आज भी दक्षिणी राज्य ही बने हुए हैं. सीआरआईएफ हाई रिस्क की ‘How India Lends’ रिपोर्ट बताती है कि जून 2026 तक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल की कुल हिस्सेदारी समूचे देश के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 70% से भी अधिक दर्ज की गई है.
देश में तमिलनाडु के लोग सबसे ज्यादा गोल्ड लोन लेते हैं. अकेले तमिलनाडु राज्य की हिस्सेदारी पूरे देश के कुल गोल्ड लोन में 30% है. इसके ठीक बाद आंध्र प्रदेश 15.9% की मजबूत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कर्नाटक 10.2% हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है. इससे साफ जाहिर होता है कि दक्षिण भारत में गोल्ड लोन लेने की संस्कृति कितनी गहरी और व्यापक है. (Representative Image:AI)
हालांकि दक्षिण भारत भले ही कुल लोन के मामले में बादशाह बना हुआ है, लेकिन विकास की रफ्तार यानी ग्रोथ रेट में उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों का आंकड़ा चौंकाने वाला है. देश के 10 सबसे बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में सालाना आधार पर 122.8% की बड़ी वृद्धि दर्ज हुई है, जो पूरे देश में सबसे तेज है. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में 99.7% और राजस्थान में 91.2% की भारी बढ़ोतरी देखी गई. ( Photo : AI)
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पर्सनल लेंडिंग के पूरे ढांचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है. जुलाई 2024 में कुल पर्सनल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी महज 2.2% हुआ करती थी, जो जुलाई 2025 में बढ़कर 4.8% और जुलाई 2026 तक पहुंचते-पहुंचते 7.7% पर पहुंच गई. इसके ठीक उलट, एजुकेशन, कंज्यूमर ड्यूरेबल और क्रेडिट कार्ड लोन की संयुक्त हिस्सेदारी जुलाई 2024 के 7.7% से लगातार फिसलकर जुलाई 2026 में घटकर केवल 6.7% रह गई.
गोल्ड लोन में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक के नए और उदार नियमों की बहुत बड़ी भूमिका रही है. आरबीआई के नए कोलेटरल फ्रेमवर्क के तहत ₹2.5 लाख तक के छोटे गोल्ड लोन के लिए लेंडर्स गिरवी रखे गए सोने के कुल मूल्य का 85% तक कर्ज (LTV) दे सकते हैं. वहीं ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक के लोन के लिए यह सीमा 80% तय की गई है, जबकि ₹5 लाख से अधिक पर यह 75% बनी हुई है. इस आसान व्यवस्था ने आम और छोटे उधारकर्ताओं के लिए सोने पर लोन लेना बेहद आसान और आकर्षक बना दिया है.
सरकारी और निजी बैंकों ने भी लोगों के गोल्ड लोन लेने में बढती रुचि को भुनाते हुए गोल्ड लोन सेगमेंट पर अपना फोकस कई गुना बढ़ा दिया है. पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एमडी और सीईओ अशोक चंद्रा के अनुसार, बैंक पहले इस कारोबार में छोटा खिलाड़ी था, लेकिन अब वह आक्रामक तरीके से इस सेक्टर में कूद गया है.
(Photo : Canva)
सोने की कीमतों में जोरदार उछाल ने भी गोल्ड लोन में बढ़ोतरी में मदद की है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की रिकॉर्ड कीमतों, जैसे अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स के ₹1,52,511 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने से अब लोगों को गोल्ड पर ज्यादा लोन मिल रहा है.
गोल्ड लोन पूरी तरह सुरक्षित यानी सिक्योर्ड एसेट की श्रेणी में आता है. क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन में जहां डिफॉल्ट का भारी जोखिम रहता है, वहीं गोल्ड लोन में डिफॉल्ट होने पर लेंडर के पास सोना बेचकर पैसे वसूलने का सीधा अधिकार होता है. इसके अलावा गोल्ड लोन सेगमेंट में एसेट क्वालिटी भी बेहद मजबूत है, जहां जून में 31 से 90 दिनों का बकाया लोन कुल पोर्टफोलियो का मात्र 0.9% था, जबकि 180 दिनों से अधिक का ओवरड्यू महज 0.2% के बेहद सुरक्षित स्तर पर टिका हुआ है.