ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों ने बसों में सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है. यात्रियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर बसों से सफर के दौरान सबसे बड़ी समस्या ओवरलोडिंग, भीड़ और सुरक्षा उपकरणों की कमी की है. यात्रियों के मुताबिक कई बसों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं. इसके अलावा बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, प्राथमिक उपचार की सुविधा और इमरजेंसी सिस्टम भी कई बार पर्याप्त स्थिति में नहीं मिलते हैं. ऐसे में किसी दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं.
स्लीपर बसों में ओवरलोडिंग और सुरक्षा को लेकर चिंता
यात्री अरुण नागर ने कहा कि डबल डेकर बस में आग लगने जैसी घटनाओं के बाद भी स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आते. उनका कहना है कि स्लीपर बसों में जरूरत से ज्यादा सवारियां बैठा ली जाती हैं. उन्होंने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हर सप्ताह किसी न किसी तरह की समस्या सामने आती रहती है. कई बार बसों के शीशे खुले रहते हैं और चालक यात्रियों से ठीक तरीके से बात नहीं करते. उन्होंने बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया. अरुण के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेसवे बनने के बाद से यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और आए दिन हादसों की खबरें सामने आती रहती हैं.
रोडवेज बसों में भी भीड़ की शिकायत
यात्री कृष्ण ने बताया कि समस्या केवल स्लीपर या निजी बसों तक सीमित नहीं है. रोडवेज बसों में भी कई बार क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठा लिया जाता है. इससे यात्रियों को सही तरीके से सीट नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा कि भीड़ अधिक होने की वजह से सामान और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी परेशानी बनी रहती है. ऐसी स्थिति में चोरी की आशंका भी बढ़ जाती है.
बसों में फायर एक्सटिंग्विशर नहीं होने का दावा
वहीं राहुल ने बसों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल उठाया. उन्होंने बताया कि वह अक्सर दिल्ली से अलीगढ़ जाने के लिए बस से यात्रा करते हैं. यह बस नोएडा होते हुए यमुना एक्सप्रेसवे से होकर गुजरती है. राहुल के मुताबिक, कई बसों में फायर एक्सटिंग्विशर तक मौजूद नहीं होता. उनका कहना है कि अगर चलती बस में आग लगने जैसी स्थिति पैदा हो जाए तो यात्रियों के पास तत्काल बचाव का पर्याप्त साधन होना जरूरी है.
इमरजेंसी बटन और गेट को लेकर भी सवाल
यात्री प्रशांत ने बताया कि बसों में भीड़ इतनी अधिक होती है कि कई बार बैठने के लिए जगह तक नहीं मिलती. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसी स्थिति में कोई हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. प्रशांत के अनुसार, कुछ बसों में इमरजेंसी बटन भी ठीक से काम नहीं करते. वहीं, आपातकालीन गेट कई बार खुलने में परेशानी करते हैं या अटक जाते हैं. ऐसे में किसी दुर्घटना के दौरान यात्रियों को बस से बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती है.
परी चौक पर बस के लिए करना पड़ता है इंतजार
प्रशांत ने परी चौक से बस मिलने में होने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि परी चौक से बस पकड़ने के दौरान कई बार सीट नहीं मिलती. बसें रुक-रुककर और देरी से आती हैं, जिससे यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है.
यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच की मांग की
यात्रियों के इन बयानों से स्पष्ट है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर बसों से सफर करने वाले लोगों की प्रमुख चिंता केवल समय पर यात्रा पूरी करने की नहीं, बल्कि सुरक्षित यात्रा की भी है. ओवरलोडिंग, आपातकालीन व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, फर्स्ट एड बॉक्स और इमरजेंसी गेट जैसी सुविधाओं को लेकर यात्रियों की शिकायतें सामने आई हैं. यात्रियों का कहना है कि बसों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच और आपातकालीन व्यवस्थाओं की निगरानी जरूरी है, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.