न किशोर कुमार, न मो. रफी, न लता, न आशा, कौन थे वो महान सिंगर, जो एक्टर के बदलते ही बदल लेते थे आवाज

न किशोर कुमार, न मो. रफी, न लता, न आशा, कौन थे वो महान सिंगर, जो एक्टर के बदलते ही बदल लेते थे आवाज


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Singer: एक दौर था जब फिल्मों की कहानी के साथ उनके गाने भी दर्शकों के दिल में बस जाते थे.मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश से लेकर लता मंगेशकर तक, कई दिग्गजों ने अपनी आवाज से हिंदी सिनेमा के नायकों को नई पहचान दी. वक्त बदला तो कुमार सानू, उदित नारायण, अलका याग्निक और श्रेया घोषाल जैसे नामों ने संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाई. मगर एक सिंगर ऐसा भी रहा, जो सिर्फ सुरों का उस्ताद नहीं, बल्कि आवाज से अभिनय करने में भी माहिर था.

नई दिल्ली. बॉलीवुड की फिल्मों में गानों का दौर बदला, संगीत का अंदाज बदला और गायकों की पीढ़ियां भी बदलती गईं. लेकिन कुछ आवाजें ऐसी रहीं, जो समय के साथ और भी खास होती चली गईं. पुराने दौर में मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश और लता मंगेशकर जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज से सितारों को पहचान दी, तो बाद में कुमार सानू, उदित नारायण, अलका याग्निक और श्रेया घोषाल जैसे गायकों ने इस विरासत को आगे बढ़ाया. हर दौर के सिंगर की अपनी खासियत रही, लेकिन कुछ आवाजों की सबसे बड़ी खूबी थी कि वे पर्दे पर दिखने वाले कलाकार के हिसाब से अपना अंदाज बदल लेते थे.

इन्हीं महान सिंगर्स में एक रहे एसपी. बालासुब्रमण्यम. उन्होंने हजारों गाने गाए और कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा. खास बात यह थी कि जिस एक्टर के लिए गाते, उसकी शख्सियत के मुताबिक आवाज का अंदाज बदल लेते थे. यूं तो उन्होंने कई अभिनेताओं के लिए गाने गाए लेकिन वह ज्यादातर सलमान खान की आवाज बनकर लोकप्रिय हुए. फोटो साभार-@IMDb

एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में हजारों गाने गाए. उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि जिस अभिनेता के लिए गाते थे, उसकी स्क्रीन पर्सनैलिटी के हिसाब से अपनी आवाज में अलग रंग ले आते थे. 25 सितंबर 2020 को एसपीबी के निधन ने भारतीय संगीत की दुनिया को बड़ा झटका दिया था. फोटो साभार-@IMDb

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एसपी बालासुब्रमण्यम ने करीब पांच दशक लंबे करियर में 16 भाषाओं में गाना गाया. दक्षिण भारतीय सिनेमा के कई बड़े सितारों के लिए उनकी आवाज बार-बार सुनाई दी. हिंदी दर्शकों के बीच उन्हें खास पहचान सलमान खान की आवाज के तौर पर मिली. 1989 में सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ आई तो सलमान खान एक नए दौर के रोमांटिक हीरो के तौर पर सामने आए. फाइल फोटो

इस फिल्म के गानों में एसपीबी की आवाज ने सलमान की उस रोमांटिक स्क्रीन इमेज को एक अलग पहचान दी. ‘दिल दीवाना’ जैसे गाने उस दौर में बेहद लोकप्रिय हुए और सलमान की आवाज के साथ एसपीबी की आवाज का यह मेल दर्शकों को खूब पसंद आया. इसके बाद यह सिलसिला सिर्फ एक फिल्म तक नहीं रुका. ‘साजन’, ‘हम आपके हैं कौन’ और 90 के दशक की दूसरी फिल्मों में भी एसपीबी ने सलमान के लिए गाने गाए. ‘हम आपके हैं कौन’ के ‘पहला पहला प्यार है’ जैसे गानों ने सलमान की रोमांटिक हीरो वाली छवि को और मजबूत किया. एसपीबी की आवाज में एक तरफ मिठास थी, तो दूसरी तरफ एक ऐसा इमोशन भी था, जो पर्दे पर दिख रहे कलाकार की भावनाओं के साथ आसानी से जुड़ जाता था. फाइल फोटो

एसपीबी की पहचान सिर्फ हिंदी सिनेमा और सलमान खान तक सीमित नहीं थी. दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनका योगदान कहीं ज्यादा बड़ा था. कमल हासन के लिए उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी. कमल हासन ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और एसपीबी ने उनके किरदारों के हिसाब से अपनी गायकी का अंदाज बदला. ‘एक दूजे के लिए’ में कमल हासन के किरदार की आवाज का इस्तेमाल भी इसी तरह के एक अलग एक्सपेरिमेंट का हिस्सा था. फाइल फोटो.

रजनीकांत के साथ भी एसपीबी की आवाज का खास रिश्ता रहा. दक्षिण भारत में रजनीकांत की फिल्मों के गानों और उनके स्टारडम के साथ एसपीबी की आवाज लंबे समय तक सुनाई देती रही. उनके लिए गाते समय एसपीबी की आवाज में वह एनर्जी और जोश सुनाई देता था, जो रजनीकांत के बड़े पर्दे वाले अंदाज के साथ फिट बैठता था. फोटो साभार-रेडिट

एसपीबी की खासियत यह भी थी कि वह सिर्फ एक ही तरह के गाने तक सीमित नहीं रहे. रोमांटिक गाने हों, दर्द भरे गीत हों या फिर किसी सुपरस्टार के लिए जोश से भरा गाना, उनकी आवाज हर जगह अलग असर छोड़ती थी. अपने करियर में उन्होंने 40 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए और चार अलग-अलग भाषाओं में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीते. फाइल फोटो.

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