Pitru Paksha 2026: माता-पिता नहीं हैं तो पितृपक्ष में इन बातों का रखें ध्यान, पंडित ने बताए जरूरी नियम

Pitru Paksha 2026: माता-पिता नहीं हैं तो पितृपक्ष में इन बातों का रखें ध्यान, पंडित ने बताए जरूरी नियम


मिर्जापुर: पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों के तर्पण के लिए विशेष पूजन व अर्जुन किया जाता है. इस बार पितृपक्ष का आयोजन 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक होगा. पितृपक्ष के दौरान जिनके मां और पिताजी नहीं हैं, उनको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, वरना पुण्य की जगह पाप के भागीदार होंगे और पितृदोष भी लगेगा.

पितृपक्ष में इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

पितृपक्ष के दौरान माता-पिता का देहांत होने पर बाल न बनवाएं. नाखून न काटें. ब्रह्मचर्य का पालन करें. साबुन और तेल का भी इस्तेमाल न करें. पितृपक्ष के दौरान इन बातों का ख्याल रखेंगे तो पितृ दोष से परेशान नहीं होंगे.

विंध्यधाम के विद्वान आचार्य पं. अनुपम महाराज ने लोकल 18 से बताया कि पितृपक्ष में जिनके माता-पिता नहीं हैं, वह बाल न बनवाएं. नाखून न काटें. ब्रह्मचर्य का पालन करें. साबुन और तेल का प्रयोग करें. इसके साथ में उनकी पत्नियां, अगर सास नहीं हैं तो वो अष्टमी के पहले बाल न धोएं. मात्र नवमी को बाल धोएं.

सास की विदाई के लिए करें ये काम

खीर आदि लगाकर अपनी सास की विदाई करें. साथ में जिस तिथि पर उनके पिता का श्राद्ध हो, उस तिथि पर बाल बनवाएं. पिता न हों तो मूंछ जरूर बनवाएं. पिता हों तो मूंछ न बनवाएं. माता के निमित्त बाल अपना त्याग करें.

पूर्वजों के निमित्त जरूर करें श्राद्ध और पिंडदान

यदि आपके माता-पिता नहीं हैं, तो एकोद्दिष्ट श्राद्ध जरूर साल में एक बार करें. अपने पिता के निमित्त, दादा के निमित्त, परदादा के निमित्त, दादी, परदादी, वृद्ध परदादी, नाना, नानी, वृद्ध नाना, वृद्ध नानी, ऐसे समस्त जो आपके चाचा, बुआ आदि जो भी न हों, उनका पिंडदान दान करें.

ऑनलाइन करा सकते हैं पूजा

पं. अनुपम महाराज ने बताया कि यदि ये नहीं कर पा रहे हैं तो आपका पितृपक्ष पूजा कोई ब्राह्मण करा रहा है. ऑनलाइन आपको सुविधा मिल रही है. अगर कोई करा रहा है तो वहां भी जरूर कर लें. आप मानसिक, क्योंकि श्रद्धा जो है, वो श्राद्ध का सबसे उत्तम मार्ग है. श्राद्ध श्रद्धा से है.

गरीबों और जरूरतमंदों को जरूर कराएं भोजन

तो कहीं न कहीं अपने पितरों के निमित्त गरीब लोगों को भोजन जरूर कराएं. दलित को, संन्यासी को, साधु को, महात्मा को और ब्राह्मण को. सभी को भोजन कराएं. यथासंभव दान दें.



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