Kids Memory sharpen Tips: बच्चों की मेमोरी शार्प बनाने के लिए करें ये काम, दिमाग चलेगा AI की स्पीड में, आसान है तरीका

Kids Memory sharpen Tips: बच्चों की मेमोरी शार्प बनाने के लिए करें ये काम, दिमाग चलेगा AI की स्पीड में, आसान है तरीका


Brain Power Tips For Kids : क्या आपका बच्चा किताब खोलकर कुछ देर पढ़ता है और फिर पूछने पर कहता है, ‘मुझे याद नहीं’? या फिर स्कूल में पढ़ी चीज अगले दिन तक भूल जाता है? अगर हां, तो हर बार इसे बच्चे की लापरवाही या पढ़ाई में मन न लगने से जोड़ना सही नहीं है. बच्चों की याददाश्त और ध्यान भी अभ्यास से बेहतर होते हैं. इसके लिए जरूरी नहीं कि आप बच्चे को घंटों किताब लेकर बैठाएं. रोजमर्रा के छोटे-छोटे खेल और आदतें भी दिमाग को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन द डेवलपिंग चाइल्ड के अनुसार, बच्चों में ‘वर्किंग मेमोरी’ यानी किसी जानकारी को दिमाग में कुछ समय तक बनाए रखकर उसका इस्तेमाल करने की क्षमता, ध्यान और खुद को नियंत्रित करने जैसे कौशल धीरे-धीरे विकसित होते हैं. खेल, बातचीत और ऐसी गतिविधियां जिनमें बच्चे को सोचना और याद रखना पड़े, इन क्षमताओं का अभ्यास करा सकती हैं.

बच्चे के साथ मेमोरी गेम खेलें
मेमोरी बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है इसे खेल बना देना. टेबल पर 5-6 चीजें रखें और बच्चे को करीब 30 सेकंड तक उन्हें देखने दें. फिर चीजों को हटा दें और पूछें कि उसे क्या-क्या याद है. धीरे-धीरे चीजों की संख्या बढ़ा सकते हैं. इसी तरह बाजार से लौटते समय पूछें कि रास्ते में कौन-कौन सी दुकानें दिखीं या खाने की मेज पर रखी चीजों के नाम याद करने को कहें. इससे बच्चे को बिना पढ़ाई का दबाव दिए याद रखने का अभ्यास मिलेगा.

कहानी पढ़ें और बीच में सवाल पूछें
बच्चे को कहानी सुनाना या उसके साथ किताब पढ़ना केवल भाषा सुधारने का तरीका नहीं है. कहानी के पात्र, घटनाएं और क्रम याद रखने के लिए बच्चे को ध्यान लगाना पड़ता है. कहानी खत्म होने के बाद पूछें- कहानी में कौन आया था? पहले क्या हुआ था? फिर क्या हुआ? बच्चे को अपनी भाषा में कहानी दोबारा सुनाने दें. इससे वह जानकारी को समझकर याद करने की कोशिश करेगा.

रोज थोड़ा आउटडोर खेल जरूरी है
बच्चों का दिमाग केवल पढ़ाई से सक्रिय नहीं होता. खेल और शारीरिक गतिविधियां भी उनके विकास का अहम हिस्सा हैं. हार्वर्ड का सेंटर बच्चों के लिए खेल को कार्यकारी कौशल के अभ्यास का एक माध्यम बताता है. इसलिए रोज कुछ समय दौड़ने, साइकिल चलाने, गेंद खेलने, तैरने या उम्र के हिसाब से किसी अन्य शारीरिक गतिविधि के लिए निकालें. हर खाली समय मोबाइल या स्क्रीन के सामने बिताना जरूरी नहीं है.

बच्चे को सवाल पूछने दें
कई बार बच्चे एक ही चीज को लेकर बार-बार सवाल करते हैं. उन्हें चुप कराने के बजाय बातचीत को आगे बढ़ाएं. मसलन बच्चा पूछता है कि बारिश क्यों होती है, तो सिर्फ जवाब देने के बजाय उससे पूछें, ‘तुम्हें क्या लगता है?’ इस तरह बच्चा जवाब सोचने, अपनी बात समझाने और पुरानी जानकारी को नई जानकारी से जोड़ने की कोशिश करता है. ऐसी बातचीत सीखने की प्रक्रिया को ज्यादा सक्रिय बना सकती है.

पहेली और दिमागी खेल आजमाएं
पहेलियां, शब्दों वाले खेल, शतरंज, सुडोकू या उम्र के अनुसार गणित के छोटे खेल बच्चे को ध्यान लगाने और समस्या सुलझाने का अभ्यास दे सकते हैं. हार्वर्ड के अनुसार, कार्यकारी कौशल में जानकारी को दिमाग में बनाए रखना, ध्यान केंद्रित करना और जरूरत के अनुसार सोच बदलना शामिल है.ध्यान रखें कि खेल बच्चे की उम्र और क्षमता के अनुसार हो. बहुत मुश्किल पहेली देकर उसे निराश करने के बजाय धीरे-धीरे कठिनाई बढ़ाएं.

पढ़ी चीज को अपने शब्दों में बताने दें
बच्चे ने कोई अध्याय पढ़ लिया तो तुरंत अगला अध्याय शुरू कराने के बजाय उससे पूछें कि उसने क्या समझा. उसे 3-4 वाक्यों में अपनी भाषा में बताने दें. यह तरीका केवल रटने के बजाय जानकारी को समझने और उसे दोबारा याद करके बोलने का मौका देता है. परीक्षा की तैयारी में भी यह आदत काफी उपयोगी हो सकती है.

नींद से समझौता न करें
मेमोरी के लिए नींद को नजरअंदाज करना बड़ी गलती हो सकती है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के हेल्दीचिल्ड्रन के अनुसार, पर्याप्त नींद बच्चों को ध्यान लगाने में मदद करती है और दिमाग को दिनभर सीखी गई जानकारी को व्यवस्थित तथा संग्रहित करने में मदद करती है. इसलिए देर रात तक पढ़ाने के बजाय बच्चे की उम्र के हिसाब से पर्याप्त नींद और नियमित सोने-जागने का समय बनाए रखना ज्यादा जरूरी है.

याददाश्त बढ़ाने का मतलब सिर्फ ज्यादा रटना नहीं
बच्चे की मेमोरी को ‘एआई की स्पीड’ देने का कोई जादुई तरीका नहीं है. असल लक्ष्य यह होना चाहिए कि बच्चा ध्यान से सुने, समझे, जानकारी को याद रखे और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर सके. इसके लिए रोज 15-20 मिनट के छोटे खेल, कहानी, बातचीत और दिमागी गतिविधियां काफी अच्छी शुरुआत हो सकती हैं.

सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें. दिमागी विकास हर बच्चे में एक जैसा नहीं होता. पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय सीखने को रोजमर्रा की जिंदगी का मजेदार हिस्सा बनाएं. यही आदत धीरे-धीरे उसकी याददाश्त, ध्यान और सीखने की क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकती है.

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है. अगर बच्चे को लगातार पढ़ी हुई बातें याद रखने, ध्यान लगाने या सीखने में असामान्य कठिनाई हो रही है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.



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