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महाराष्ट्र में UCC का ड्राफ्ट तैयार कर रही उच्चस्तरीय कमेटी के भीतर छिड़ा आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सी. चव्हाण के अचानक इस्तीफे के ठीक दो दिन बाद राज्य सरकार ने पूर्व आईएएस शत्रुघ्न सिंह को कमेटी का ‘सदस्य व वरिष्ठ सलाहकार’ नियुक्त कर दिया. विवाद की असली वजह 19 सितंबर की बैठक बनी, जहां बिना किसी आधिकारिक पद के पहुंचे शत्रुघ्न सिंह ने पब्लिक फीडबैक के लिए बन रही वेबसाइट और ड्राफ्टिंग में बदलावों को लेकर सुझाव दिए थे.
महाराष्ट्र में यूसीसी पैनल से पूर्व जज जस्टिस आर. सी. चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया था. (फाइल फोटो)
महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को लेकर बनाई गई सात सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी के भीतर की खींचतान अब खुलकर सतह पर आ गई है. बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सी. चव्हाण के अचानक इस्तीफे के ठीक दो दिन बाद महाराष्ट्र सरकार ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को कमेटी का ‘सदस्य व वरिष्ठ सलाहकार’ नियुक्त कर दिया है. यह वही पूर्व नौकरशाह हैं, जिनकी 19 सितंबर की बैठक में अनाधिकारिक मौजूदगी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जस्टिस चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे में सीधे तौर पर सवाल उठाया था कि जब शत्रुघ्न सिंह इस सात सदस्यीय पैनल का हिस्सा ही नहीं थे, तो वे किस हैसियत से बैठक में शामिल हुए और दिशा-निर्देश देने लगे. जानकारी के अनुसार, कमेटी की चेयरपर्सन और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई ने सिंह को बतौर सलाहकार बैठक में आमंत्रित किया था. जस्टिस चव्हाण ने साफ किया कि बैठक के एजेंडे या ईमेल में इस बात की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी कि कोई बाहरी व्यक्ति भी इसमें शामिल होगा.
गैर-सदस्य की मौजूदगी पर उठा था बवंडर
महाराष्ट्र यूसीसी पैनल की आंतरिक बैठकों में नियमों की अनदेखी को लेकर मतभेद गहरा गया था. 19 सितंबर को कमेटी की दूसरी बैठक में शत्रुघ्न सिंह अचानक पहुंचे, जहां सदस्यों से उनका परिचय कराकर कहा गया कि वे अपने इनपुट देंगे. रिटायर्ड जज जस्टिस चव्हाण ने बिना किसी आधिकारिक पद के किसी तीसरे व्यक्ति के दखल को पूरी तरह नियम-विरुद्ध माना और पद छोड़ दिया.
इस्तीफे के 48 घंटे बाद सरकार का डैमेज कंट्रोल
विवाद बढ़ने के बाद राज्य प्रशासन ने आनन-फानन में कानूनी पेच सुलझाने की कोशिश की. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे के दो दिन बाद 21 सितंबर को महाराष्ट्र सरकार ने शत्रुघ्न सिंह को औपचारिक रूप से मेंबर-कम-सीनियर एडवाइजर बना दिया. नियुक्ति के बाद जब शत्रुघ्न सिंह और कमेटी की चेयरपर्सन जस्टिस देसाई से संपर्क किया गया, तो दोनों ने इस पूरे विवाद पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया.
यह मीटिंग जस्टिस चव्हाण के इस्तीफ़ा देने से कुछ घंटे पहले हुई थी. पता चला है कि मीटिंग में जिस मुद्दे पर चर्चा हुई, उनमें से एक वह सवालनामा (questionnaire) था जिसके ज़रिए कमेटी प्रस्तावित UCC पर लोगों की राय जानना चाहती है. पता चला है कि जस्टिस चव्हाण ने सुझाव दिया था कि सवालनामे में ज़्यादा ‘सब्जेक्टिव’ (व्यक्तिगत राय वाले) सवाल शामिल किए जाएं ताकि जवाब देने वालों से विस्तार से राय मिल सके. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने ऐसे सवालनामे के साथ आगे बढ़ने का फ़ैसला किया जिसमें ‘ऑब्जेक्टिव’ (तथ्यात्मक) और ‘सब्जेक्टिव’ दोनों तरह के सवालों का मिश्रण हो.
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह सवालनामा लोगों की राय के लिए जारी कर दिया जाएगा और इसमें लगभग तीन दर्जन सवाल होंगे. सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग के दौरान सिंह ने लोगों से राय-मशविरे के लिए तैयार की जा रही वेबसाइट में ज़रूरी बदलावों को लेकर चिंता जताई. इन बदलावों में महाराष्ट्र के लोगों को UCC के बारे में बताने वाले शुरुआती टेक्स्ट में बदलाव और वेबसाइट पर सवालनामे को इस तरह से शामिल करना शामिल था कि लोग आसानी से उस तक पहुंच सकें.