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पश्चिम चंपारण का सिकटा बाजार नेपाली खरीदारों से गुलजार रहता है. सीमा पास होने से यहां सोने-चांदी से लेकर सब्जियों तक की भारी मांग है. नेपाल में सीमा शुल्क के कारण चीजें महंगी हैं. इसलिए नेपाली नागरिक सिकटा से खरीदारी करते हैं. यह सिलसिला दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है.
पश्चिम चंपारणः जिले के सिकटा प्रखंड में एक ऐसा बाज़ार स्थित है, जहां भारतीय खरीदारों से अधिक नेपाली खरीदारों की संख्या रहती है.खरीदारी चाहे सोने चांदी के गहनों की करनी हो या फल और सब्ज़ियों की, सीमावर्ती क्षेत्र में बसे नेपाल के ज्यादातर लोग पश्चिम चम्पारण ज़िले में स्थित सिकटा बाज़ार का ही रुख करते हैं. कुछ ऐसा ही होता है नेपाल के बाज़ार में भी.
सीमावर्ती बाज़ारों की कहानी
दरअसल, सिकटा (पश्चिम चम्पारण, बिहार ) के लोग भी मसालों और ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी के लिए नेपाल की सीमा पर स्थित बिस्वा बाज़ार का ही रुख करते हैं. दोनों देशों के नागरिकों का एक दूसरे देश की बाज़ार में आवागमन कुछ ऐसे होता है, मानों जैसे वो दूसरे देश में नहीं, बल्कि घर की पड़ोस में संचालित बाज़ार में जा रहे हों.
सिकटा बाज़ार में नेपाली खरीदारों की अधिक संख्या
सिकटा बाज़ार के सर्राफा और कपड़ा व्यवसाई रौशन कुमार सर्राफ बताते हैं कि उनकी दुकान नेपाल की सीमा से महज़ 200 मीटर पहले है. उनकी हर दिन की दुकानदारी में जितने खरीदार स्थानीय होते हैं, उससे अधिक खरीदार नेपाली होते हैं. दरअसल, नेपाल के इस भाग में प्रोडक्शन की स्थिति बेहद निम्न है. जिसकी वजह से वहां के लोगों को रोजमर्रा सहित ज़्यादातर वस्तुओं की खरीदारी के लिए सिकटा बाज़ार पर ही आश्रित रहना पड़ता है.
इन कारणों से रहती है डिपेंडेंसी
कुछ ऐसा ही कहना है स्थानीय निवासी कामता प्रसाद का. कामता ज़िले की सीमा पर स्थित सिकटा बाज़ार में इलेक्ट्रिसिटी की दुकान चलाते हैं. उनके उपभोक्ताओं में 75 प्रतिशत संख्या नेपालियों की ही हैं. इसका कारण नेपाल में इलेक्ट्रिक उपकरणों के प्रोडक्शन में कमी और कीमतों का अधिक होना है. दरअसल, भारत से नेपाल जाने के क्रम में ज्यादातर वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी लग जाती है, जिसकी वजह से नेपाल में उनकी कीमत भारत की तुलना में अधिक हो जाती है. इससे बचने के लिए सीमा पर बसे नेपाली नागरिक भारतीय बाज़ारों का ही रुख कर लेते हैं.
दशकों से चलता आ रहा है यह सिलसिला
यही वो सबसे बड़ा कारण है कि बिहार के पश्चिम चम्पारण ज़िले में स्थित सिकटा बाज़ार में सबसे अधिक संख्या नेपाली खरीदारों की ही होती है. मजे की बात यह है कि ये सिलसिला दशकों से चलता आ रहा है, जिसमें दोनों देशों के नागरिक बिना किसी परेशानी और झंझट के एक दूसरे देश की इकॉनमी को बढ़ाने में अपनी हिस्सेदारी निभाते आ रहे हैं. फिलहाल, भारत के 100 रुपए की कीमत नेपाल में 160 रुपए है और नेपाली 100 रुपए की कीमत भारत में 60 से 61 रुपए है.