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UPI पेमेंट को लेकर आपके मन में भी सवाल होगा कि आखिर यूपीआई से 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर ही फीस (MDR) क्यों लगाई गई है. रेलवे टिकट पर 5 रुपये वाला आइडिया कहां से आया. अब नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के चीफ ने इसका जवाब दिया है.
upi payment पर सवालों के जवाब एनपीसीआई चीफ ने दिए.
यूपीआई पेमेंट पर जबसे 0.40 फीसदी चार्ज की बात आई है, लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं. एक-एक सवालों का नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) जवाब दे रहा है. ऐसा ही एक सवाल आपके भी मन में होगा कि 2000 रुपये पर ही MDR चार्ज लगे ये कैसे तय हुआ? 1000 या 3000-4000 पेमेंट भी हो सकता था. इसका जवाब एनपीसीआई चीफ दिलीप अस्बे ने दिया है. उन्होंने ये भी बताया कि 5 रुपये वाला आइडिया कहां से आया.
दिलीप अस्बे ने कहा कि जब हम कोई भी यूपीआई पेमेंट करते हैं, तो पूरी व्यवस्था को चलाने में खर्चा आता है. इसी खर्चे को निकालने और सबकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए ही यह नया नियम सोच-समझकर बनाया गया है. अगर हर पेमेंट पर एक तय फीस लगा दी जाती, तो 10-20 रुपये का छोटा सामान खरीदने वालों को बहुत नुकसान होता. इसीलिए यह तय किया गया कि बड़ी रकम के पेमेंट पर ही कुछ प्रतिशत के हिसाब से पैसा कटे. इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो बड़े दुकानदार मोटा मुनाफा कमाते हैं, इस फीस का ज्यादातर हिस्सा वहीं से आएगा और छोटे लोग बच जाएंगे.
5 रुपये वाला आइडिया कहां से आया
एनपीसीआई चीफ ने कहा, कुछ काम-धंधे ऐसे भी होते हैं जिनमें पेमेंट की रकम तो बहुत बड़ी होती है, लेकिन दुकानदार की कमाई बहुत ही कम होती है. ऐसे मामलों के लिए सिर्फ 5 रुपये की एक मामूली सी फीस रखी गई है. इसके साथ ही इस बात का भी पूरा ध्यान रखा गया है कि यूपीआई का यह चार्ज उन शुल्कों से कम ही रहे, जो बड़े दुकानदार अभी एटीएम या क्रेडिट कार्ड पर देते आ रहे हैं.
आम जनता को इस बात से घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि ग्राहकों की जेब पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है. जान-पहचान वालों को पैसा भेजने या 2000 रुपये तक का सामान खरीदने पर एक भी पैसा नहीं कटेगा. इसके अलावा, गांव-कस्बों के उन छोटे दुकानदारों पर भी कोई फीस नहीं लगेगी, जिनके खाते में महीने भर में कुल एक लाख रुपये तक आते हैं.
सीधे ग्राहकों से कोई फालतू पैसा नहीं मांग सकता
एनपीसीआई चीफ ने कहा, यह चार्ज मुख्य रूप से सिर्फ उन बड़े दुकानदारों से ही लिया जाएगा जो बड़े शहरों या मॉल में पहले से ही कार्ड से पेमेंट लेते आ रहे हैं. इन बड़े दुकानदारों के सामान की कीमत में ये खर्चे पहले से ही जुड़े होते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि कोई भी दुकानदार इस फीस के नाम पर सीधे ग्राहकों से कोई फालतू पैसा नहीं मांग सकता, इस पर पूरी तरह से रोक है.
इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से पटरी पर आने में थोड़ा समय जरूर लग सकता है. उम्मीद जताई जा रही है कि पहले साल में इस फीस के जरिए लगभग 13 से 15 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा हो जाएंगे. इसमें से पांच प्रतिशत हिस्सा एक खास फंड में डाला जाएगा, ताकि गांव-देहात के छोटे दुकानदारों को भी डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए बढ़ावा और इनाम दिया जा सके.