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Election Commission SIR Dispute: चुनाव आयोग में SIR को लेकर मतभेद की खबरों के बीच आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इसका खंडन किया है. सूत्रों का कहना है कि SIR समेत सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं. दूसरी तरफ सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 में बदलाव से लेकर वोटर डेटा और फैसले लेने की प्रक्रिया तक कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं. पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी अपीलों को लेकर भी सवाल उठने की बात कही गई है. ऐसे में आयोग के आधिकारिक पक्ष और सूत्रों के दावों के बीच अंतर चर्चा में है. इस मामले पर अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाए हैं.
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने मतभेद की खबरों का खंडन किया है. (फाइल फोटो)
चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक है या फैसलों को लेकर मतभेद चल रहे हैं? SIR को लेकर यह सवाल अब चर्चा में है. एक तरफ चुनाव आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इन खबरों का खंडन किया है कि SIR समेत आयोग के फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच मतभेद थे. आयोग के सूत्रों का कहना है कि SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. इनमें दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मंजूरी रही है. दूसरी तरफ सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी सामने आई है जिसमें आयोग के भीतर कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई है. इस मामले को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष हमलावर है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव अखिलेश यादव ने बड़ा दावा किया है.
इन आपत्तियों का दायरा सिर्फ SIR तक सीमित नहीं बताया गया है. सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं. इनमें नए मतदाताओं का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया, चुनावी डेटा की सुरक्षा, आईटी सिस्टम और आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं. दोनों आयुक्तों की आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त तक भी भेजे जाने की बात कही गई है. सूत्रों का यह भी दावा है कि दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखा था. हालांकि आयोग के आधिकारिक सूत्र SIR समेत फैसलों पर किसी तरह के मतभेद की बात को खारिज कर रहे हैं.
SIR पर आयोग का आधिकारिक पक्ष क्या है?
चुनाव आयोग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि SIR का फैसला तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिया गया था. आयोग के मुताबिक भारत निर्वाचन आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं. इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी शामिल रही है. यानी आयोग की ओर से यह साफ करने की कोशिश की गई है कि SIR के फैसले को लेकर शीर्ष स्तर पर किसी तरह का मतभेद नहीं था.
धारा 18 में फैसलों की प्रक्रिया का भी हवाला
चुनाव आयोग के सूत्रों ने आयोग के कामकाज को लेकर 2023 के कानून की धारा 18 का भी हवाला दिया है. इसके मुताबिक आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए. अगर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद हो तो फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाता है. सूत्रों ने कहा कि बैठकों के दौरान अलग-अलग राय सामने आना और अंतिम फैसला अलग-अलग चीजें हैं. आयोग का दावा है कि SIR समेत जिन फैसलों पर अंतिम निर्णय लिया गया वह तीनों सदस्यों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए. धारा 18(1) में यह भी कहा गया है कि आयोग सर्वसम्मत फैसले से अपने कामकाज की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों के बीच काम के बंटवारे को तय कर सकता है. नए इनपुट में गोवा में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के फैसलों की रिकॉर्डिंग से जुड़ी सॉफ्टवेयर समस्या और आयोग के आईटी सिस्टम से जुड़े काम के बंटवारे पर उठाई गई आपत्तियों का भी जिक्र है.
Form-6 को लेकर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए थे. इसमें SIR से जुड़े पुराने मतदाता रिकॉर्ड में आवेदक या उसके माता-पिता और दादा-दादी के नाम से जुड़ा सवाल जोड़े जाने की बात कही गई. सूत्रों का दावा है कि विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी. सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इसे अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए हटाने की मांग की थी. यह आरोप सूत्रों के हवाले से हैं और आयोग के आधिकारिक खंडन के साथ देखे जाने चाहिए.