सतना. हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक प्यारा सा घर हो. लोग अपनी गाढ़ी कमाई से पाई-पाई जोड़कर अपने इस आशियाने के लिए पैसे इकट्ठा करते हैं लेकिन जब बात असल में जमीन पर ईंट रखने और नींव खोदने की आती है, तो बजट का सही अंदाजा लगाना अच्छे-अच्छों के पसीने छुड़ा देता है. आज के समय में महंगाई इतनी तेजी से बढ़ रही है कि घर बनाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है. अगर आप भी इन दिनों अपना सपनों का घर बनवाने की सोच रहे हैं, तो काम शुरू करने से पहले रुकिए और पूरी प्लानिंग कर लीजिए. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर बनाने की शुरुआत से लेकर उसके पूरा होने तक क्या-क्या जरूरी है, कौन से महत्वपूर्ण दस्तावेज लगेंगे और आजकल प्रति स्क्वॉयर फुट के हिसाब से आपकी जेब पर कितना खर्च आने वाला है.
घर का निर्माण शुरू करने से पहले सिर्फ बैंक में पैसे होना ही काफी नहीं है बल्कि कानूनी रूप से भी आपका मजबूत होना बेहद जरूरी है. सबसे पहले अपनी जमीन की रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी और अपना कोई भी सरकारी पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी एक फाइल में तैयार रखें. इसके बाद सबसे अहम कदम है किसी अच्छे आर्किटेक्ट से अपने प्लॉट का नक्शा बनवाना. इसके बाद उस नक्शे को स्थानीय निकाय यानी नगर निगम, नगरपालिका या पंचायत से पास कराना होता है, जिसे भवन निर्माण की अनुमति कहते हैं. अगर आप बिना परमिशन लिए काम शुरू करते हैं, तो भविष्य में सरकारी कार्रवाई या जुर्माने आदि का सामना करना पड़ सकता है.
कितना आएगा खर्च?
मान लीजिए आपके पास 60×40 डायमेंशन का एक प्लॉट है जिसका कुल क्षेत्रफल 2400 वर्गफुट बनता है. अब आप इसपर एक शानदार डुप्लेक्स घर बनाना चाहते हैं. आपके घर का कुल खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि आप कितने हिस्से में निर्माण यानी बिल्डअप कर रहे हैं, कितनी मंजिलें बना रहे हैं और फिनिशिंग में किस क्वालिटी का सामान इस्तेमाल कर रहे हैं. अगर हम सामान्य निर्माण दर की बात करें, तो आजकल ठेकेदार को काम देने पर 2400 वर्गफुट के प्लॉट पर घर बनाने का खर्च लगभग 40 लाख से 60 लाख रुपये के बीच आ सकता है. अगर आप दोनों मंजिलों पर पूरा कंस्ट्रक्शन करवाते हैं, तो बिल्डअप एरिया बढ़ने के साथ-साथ आपका यह बजट और भी ऊपर जा सकता है.
सिविल इंजीनियर की राय- मैप अप्रूवल है पहली सीढ़ी
लोकल 18 की टीम को जानकारी देते हुए स्ट्रक्चरल डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम कर रहे सतना के सिविल इंजीनियर शुभम त्रिपाठी बताते हैं कि घर बनवाने की सबसे बेसिक और पहली सीढ़ी है लोकल बॉडी से मैप का अप्रूवल होना. विंध्य क्षेत्र में साइट पर कांट्रैक्टर द्वारा घर बनाने के लिए औसतन 2000 रुपये प्रति स्क्वॉयर फुट का चार्ज लिया जाता है. उदाहरण के लिए अगर आपके पास 2400 स्क्वॉयर फुट का प्लॉट है और उसमें से 2000 स्क्वॉयर फुट में आप पक्का निर्माण कर रहे हैं, तो 2000 रुपये प्रति स्क्वायर फुट के हिसाब से लगभग 40 लाख रुपये में आपका घर बनकर कंप्लीट हो जाता है.
बिल्डिंग मटेरियल के दाम छू रहे आसमान
पिछले कुछ सालों में महंगाई ने कंस्ट्रक्शन के बजट को बुरी तरह से बढ़ा दिया है. घर बनाने में लगने वाले हर एक मटेरियल का रेट काफी ज्यादा बढ़ चुका है. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर ईंट, बालू, गिट्टी और अन्य बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों पर पड़ा है. सतना जैसे शहर का ही उदाहरण ले लीजिए, जिसे पूरे देश में सीमेंट का गढ़ कहा जाता है, यहां कुछ समय पहले तक जो सीमेंट की बोरी 250 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, आज 300 रुपये में भी नहीं मिल पा रही है. वहीं अगर लोहे की बात करें, तो घर बनवाते-बनवाते ही इसके दाम 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक और महंगे हो जाते हैं. इसके अलावा पक्की लाल ईंटें, नदी की रेत, बिजली की वायरिंग, प्लंबिंग के पाइप और फिनिशिंग में लगने वाली टाइल्स, पुट्टी और पेंट की कीमतों में भी पिछले कुछ सालों में भारी उछाल आया है. यहां तक कि लेबर और मिस्त्री की दिहाड़ी भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है.
बजट में रखें गुंजाइश
घर बनाना कोई एक-दो दिन का काम नहीं है, इसमें महीनों का समय लग जाता है, इसलिए जब भी अपने घर का बजट तय करें, तो अनुमानित खर्च से हमेशा 10 से 15 प्रतिशत पैसा अतिरिक्त मानकर चलें. इससे फायदा यह होगा कि अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान बीच में किसी मटेरियल के दाम अचानक बढ़ भी जाते हैं, तो आपके घर का काम पैसों की कमी के कारण बीच में नहीं रुकेगा. सही प्लानिंग और सही जानकारी ही आपको बिना किसी टेंशन के अपने सपनों का घर बनाने में मदद करेगी.