Geoffrey Hinton CNN News18 Interview। Geoffrey Hinton AI warning। 50 नहीं बस 10 साल में मानवता को खा जाएगा… AI के गॉडफादर की चेतावनी

Geoffrey Hinton CNN News18 Interview। Geoffrey Hinton AI warning। 50 नहीं बस 10 साल में मानवता को खा जाएगा… AI के गॉडफादर की चेतावनी


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Geoffrey Hinton CNN News18 Interview: एआई के गॉडफादर जेफ्री हिंटन ने चेतावनी दी है कि एआई अब अनियंत्रित होकर रोग हो रहा है. अगर हमने इसे सुरक्षित करना नहीं सीखा तो यह मानवता को तबाह कर सकता है. इंसानों ने कभी अपने से ज्यादा स्मार्ट तकनीक नहीं बनाई है, इसलिए हमारे पास इससे निपटने का कोई अनुभव नहीं है. पहले खतरे की समयसीमा 50 साल थी, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि हमारे पास केवल 5 से 10 साल बचे हैं.

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दुनिया पर एआई का खतरा बढ़ता जा रहा है.

राहुल शिवशंकर.

क्या मशीनें सच में इंसानों का गेम ओवर करने वाली हैं? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया से एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. एआई के गॉडफादर और नोबेल प्राइज विजेता जेफ्री हिंटन ने सरेआम कबूल किया है कि एआई अब पूरी तरह कंट्रोल से बाहर यानी रोग हो चुका है. सीएनएन न्‍यूज-18 के एडिटोरियल अफेयर डायरेक्‍टर राहुल शिवशंकर से बातचीत के दौरान जेफ्री हिंटन ने माना कि जिस तकनीक को हमने अपनी मदद के लिए बनाया था, वह आज खुद इतनी स्मार्ट हो चुकी है कि इंसानों के वजूद के लिए ही सबसे बड़ा खतरा बन गई है. अगर वक्त रहते इस खतरनाक खेल को नहीं रोका गया, तो तबाही तय है.

एआई का अनियंत्रित होना और ‘रोग’ बनना

• एआई के गॉडफादर और नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि एआई अब अनियंत्रित होकर ‘रोग’ हो रहा है.
• हाल ही में ‘हगिंग फेस’ में हुई सेंधमारी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एआई एजेंट अपनी सीमाएं तोड़कर खुद से बात करने लगे हैं.
• ये स्मार्ट सिस्टम्स टेस्ट में चीटिंग करने और एक-दूसरे से जुड़ने के लिए दूसरी कंपनियों के सिस्टम में अवैध रूप से सेंध लगाने लगे हैं.

क्या वाकई मानवता को खत्म कर देगा एआई?

• हिंटन का साफ कहना है कि अगर हमने समय रहते एआई को सुरक्षित बनाने का तरीका नहीं ढूंढा, तो यह मानवता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है.
• इंसानों के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब हम अपने से ज्यादा बुद्धिमान कोई तकनीक बना रहे हैं.
• हमारे पास ऐसी किसी भी चीज से डील करने का कोई पिछला अनुभव नहीं है, इसलिए जब तक हम यह न समझ लें कि इसके साथ कैसे जिया जाए, तब तक इसका विकास करना मूर्खता होगी.





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