इस सरकारी योजना से बदली 50 एकड़ बंजर जमीन, अब लहलहा रहीं गन्ने-पपीते की फसलें
Last Updated:
देवघर के गोपीडीह गांव की बंजर जमीन अब हरी-भरी हो गई है. सिंचाई योजना और मनरेगा के तहत कुएं बने. इससे 50 एकड़ खेत तक पानी पहुंचा. अब बारिश पर निर्भरता खत्म हो गई है. किसान गन्ने, पपीते और हल्दी की खेती कर रहे हैं. इससे उनकी कमाई बढ़ी है.
देवघरः देवघर के गोपीडीह गांव में कभी पानी के अभाव में जिस जमीन पर खेती करना मुश्किल था, आज वही जमीन किसानों के लिए कमाई का जरिया बन गई है. गांव में करीब 45 से 50 एकड़ जमीन ऐसी थी, जहां सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण किसान अपनी जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते थे. बारिश के भरोसे खेती होने की वजह से फसल का भविष्य भी मौसम पर ही निर्भर रहता था. पानी की कमी के कारण कई खेतों में फसल लगाना तो दूर, किसान सब्जी की खेती भी नहीं कर पाते थे. जमीन मौजूद थी, किसान मेहनत करने को तैयार थे, लेकिन खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं थी. इसी वजह से कई एकड़ जमीन का इस्तेमाल सीमित रह गया था.
कहते हैं देवघर के किसान
गोपीडीह गांव के किसान अम्बिका ने लोकल 18 ने बताया कि उनके पास करीब 4 से 5 एकड़ खेती की जमीन है. कुछ साल पहले तक इस जमीन पर सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण खेती करना काफी मुश्किल था.खेत में पानी पहुंचाने का कोई पक्का साधन नहीं था, इसलिए बारिश होने पर ही खेती संभव हो पाती थी. ऐसे में किसान चाहकर भी ऐसी फसल नहीं लगा पाते थे, जिसमें समय-समय पर पानी की जरूरत पड़ती है. अम्बिका बताते हैं कि खेती करने के लिए जमीन होने के बावजूद पटवन की व्यवस्था नहीं होने से उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था.
सरकारी योजना ने बदली किसान की किस्मत
इसी बीच सरकारी योजनाओं से उन्हें बड़ी मदद मिली. सिंचाई योजना और मनरेगा के तहत उन्हें तीन कुओं का लाभ मिला. कुएं तैयार होने के बाद खेतों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई और खेती के लिए जरूरी सिंचाई उपलब्ध होने लगी. इसका सीधा फायदा किसान को मिला.अब खेत में फसल लगाने से पहले सिर्फ बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ता. जरूरत के अनुसार खेत में पानी दिया जा सकता है.इससे किसान ने अपनी जमीन पर अलग-अलग फसलों की खेती शुरू कर दी.पहले जिस जमीन का इस्तेमाल करना मुश्किल था, अब उसी खेत में मौसम के हिसाब से फसल का चुनाव किया जा रहा है.
एक ही खेत मे अब कई तरह के फसल उगाये जाते है
अम्बिका बताते हैं कि अब उनके खेत में एक ही तरह की खेती नहीं होती.मौसम और जरूरत के हिसाब से कभी गन्ने की फसल लगाई जाती है तो कभी पपीते की खेती की जाती है.इसके अलावा हल्दी की फसल भी खेत में तैयार की जा रही है.अलग-अलग फसलों की वजह से किसान को खेती से आमदनी के कई रास्ते मिल रहे हैं. सिंचाई की सुविधा ने खेती का तरीका ही बदल दिया है.अब किसान सिर्फ बारिश के भरोसे फसल लगाने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार खेत में खेती कर पा रहे हैं.
कभी पटवन की वजह से नही होता था फसल
किसान का कहना है कि सरकारी योजना का लाभ मिलने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि खेत को बेकार छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती. पानी की व्यवस्था होने से खेती में मेहनत करने का भरोसा बढ़ा है और किसान अपनी जमीन से बेहतर उत्पादन लेने की कोशिश कर रहे हैं. गोपीडीह में 45 से 50 एकड़ के दायरे में मौजूद जमीन पर भी अब खेती का काम आगे बढ़ रहा है. अम्बिका जैसे किसानों के लिए कुएं और सिंचाई की सुविधा सिर्फ पानी का इंतजाम नहीं, बल्कि अपनी जमीन को दोबारा खेती से जोड़ने का साधन बनी है.जिस जमीन पर कभी पटवन की कमी के कारण फसल उगाना मुश्किल था, आज उसी खेत में गन्ना, पपीता और हल्दी जैसी फसलें तैयार हो रही हैं और किसान खेती से अच्छी कमाई की उम्मीद कर रहे हैं.