हर साल चली जाती हैं साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां.. गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर उषा ठाकुर का बयान

हर साल चली जाती हैं साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां.. गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर उषा ठाकुर का बयान


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पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने इंदौर में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और इसके व्यावसायिक स्वरूप को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हर साल गरबा पंडालों से साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां विधर्मियों के साथ चली जाती हैं. उन्होंने आगे कहा कि ये शस्त्र और शास्त्र का पर्व है लेकिन फैशन, गहनों और टैटू के प्रदर्शन का माध्यम बनता जा रहा है.

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गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर का बयान

इंदौर. इंदौर में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री और व्यावसायिक गरबा आयोजनों को लेकर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने बड़ा बयान दिया है. उषा ठाकुर ने दावा किया कि हर वर्ष गरबा पंडालों से साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां विधर्मियों के साथ चली जाती हैं और अगले वर्ष करीब 9 लाख बच्चों को जन्म देती हैं. इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई स्रोत या आंकड़ों का आधार नहीं बताया है.

उषा ठाकुर ने कहा कि गरबा पंडालों में मूर्ति पूजा नहीं करने वालों का प्रवेश निषेध होना चाहिए. उनका आरोप है कि कुछ लोग षड्यंत्र के तहत तिलक लगाकर और कलावा बांधकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं और बेटियों को भ्रमित कर उनका जीवन खराब करते हैं.

शस्त्र और शास्त्र का पर्व बन रहा फैशन
व्यावसायिक गरबा आयोजनों को लेकर भी उषा ठाकुर ने सवाल उठाए. उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि गरबा शक्ति की साधना, शस्त्र और शास्त्र का पर्व है. उनके मुताबिक व्यावसायिक स्वरूप के कारण गरबा साधना के बजाय आधुनिक कपड़ों, गहनों और टैटू के प्रदर्शन का माध्यम बनता जा रहा है.

गरबा पंडालों में पहचान के आधार पर प्रवेश की मांग को लेकर उषा ठाकुर पहले भी बयान दे चुकी हैं. 2022 में उन्होंने गरबा आयोजकों से पहचान पत्र देखकर प्रवेश देने की अपील की थी और कहा था कि किसी को पहचान छिपाकर प्रवेश नहीं करना चाहिए.

मुस्लिमों को गरबा में आना है तो हिंदू धर्म स्वीकार करें
मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने भी कहा है कि गरबा कोई मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देवी की स्तुति है. उन्होंने कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते और वंदे मातरम नहीं गाते, उनका गरबा में क्या काम. सारंग ने शर्त रखी कि अगर मुस्लिमों को गरबा में आना है, तो पहले वे हिंदू धर्म स्वीकार करें.



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