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छत्तीसगढ़ में शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावों की पोल खुलती दिख रही है. यहां सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से शिक्षा का स्तर गिर रहा है. मैथ्स के टीचर नहीं है कृषि वाले आईटी पढ़ा रहे हैं. कई कोर्स बंद हो गए हैं यहां छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी है. न्यूज 18 ने ग्राउंड में जाकर स्कूलों के बच्चों से वहां की जमीनी हकीकत जानी.
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से अंधेरे में छात्रों का भविष्य
रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से न सिर्फ शिक्षा का स्तर गिर रहा है. बल्कि बच्चों के सपने भी चकनाचूर हो रहे हैं. राज्य में शिक्षकों के 50, 472 पद खाली पड़े हैं. सरकारी स्कूलों का बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कूली बच्चों के सपने और उनका भविष्य निगलता जा रहा है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकामी से पूरा सिस्टम कटघरे में आ गया है.
अगर आप अपने देश, राज्य को आगे बढ़ाकर तरक्की करना चाहते हैं तो उसमें सबसे अहम रोल शिक्षा का होता है. अगर आप अपने राज्य के युवाओं को अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देते हैं तो प्रदेश खुद ब खुद आगे बढ़ेंगा. लेकिन छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदहाली युवाओं को उनके सपनों से दूर ले जा रही है. जहां भविष्य देखने वाली नन्ही आंखों के सामने अंधेरा है. News18 की पड़ताल में बेहतर शिक्षा के लिए दावों की पोल खुलकर सामने आई है..
मैथ्स लेकर इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले छात्रों को अगर स्कूल में शिक्षक ही न मिले तो उनके भविष्य पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है. छत्तीसगढ़ के कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को अपनी पसंद के विषय छोड़ने पड़ रहे हैं. कहीं गणित जैसे विषयों के कोर्स बंद हो गए हैं तो कहीं मजबूरी में छात्रों को दूसरे विषय चुनने पड़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में तीन साल से ज्यादा समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है.
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के आंकड़े
राज्य में 38,256 से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं. जहां 36 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ाई करते हैं. इन स्कूलों में 50,472 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं. 30,172 सहायक शिक्षक भी नहीं है.
कृषि का टीचर पढ़ा रहा आईटी
कुछ जगहों पर कृषि विषय के शिक्षक से आईटी जैसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जबकि स्कूल में कंप्यूटर की तक नहीं है. 10वीं के छात्रों को सेल्फ स्टडी के भरोसे रहना पड़ता है. ऐसे में किसी छात्र ने खुद पढ़कर आगे बढ़ने की कोशिश की तो किसी ने विषय बदल लिया और कुछ छात्रों ने स्कूल ही छोड़ दिया. इन स्कूलों में बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं. बारिश में स्कूल की छत से पानी टपकता है. कक्षाओं में कोई सुविधा नहीं है.
क्या कहते हैं अधिकारी और शिक्षा मंत्री
इधर रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने भी माना कि शिक्षकों की कमी का असर स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि फिलहाल स्कूलों में एडजस्टमेंट के जरिए पढ़ाई की व्यवस्था संचालित की जा रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए और शिक्षकों की कमी को दूर किया जाना जरूरी है. शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने News18 कहा कि जहां-जहां शिक्षकों की कमी आ रही है. जानकारी मंगाई गई है. 5 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में है.