लालकिले के लाहौरी गेट में क्यों हुआ बदलाव? क्या है इसका इतिहास

लालकिले के लाहौरी गेट में क्यों हुआ बदलाव? क्या है इसका इतिहास


आगरा में जब भीड़ बढ़ी और सड़कें तंग हुईं तो शाहजहां ने दिल्ली का रुख किया. तय किया गया कि एक ऐसा शहर बसाया जाएगा जो मुगलकाल के वैभव को और भव्यता दे. शाहजहां को पहले से ही इमारतों के निर्माण का शौक था. उस समय आगरा में ताजमहल बनाने का काम चल रहा था. मगर शाहजहां तो दिल्ली में शाहजहांनाबाद बनाने की ठान चुके थे. 1639 में लाल किले की नींव रखी गई जो 1648 में बनकर पूरा हुआ. शाहजहां ने जो शहर बसाया था वह तकरीबन 1500 एकड़ में फैला था, जिसमें से 94 एकड़ में मुख्य किले का निर्माण कराया गया था. इसी किले के मुख्य द्वार का नाम रखा गया लाहौरी गेट.

यह वही लाहौरी गेट है, जिसकी प्राचीर पर हर साल स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाता है. यहीं से प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं. हाल ही में ये एक बार फिर चर्चा में है. वह इसलिए क्योंकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कई साल बाद इस गेट में बड़ा बदलाव किया है. इस गेट को एक बार फिर उसी तरह का कर दिया गया है, जैसा कि उस समय था जब शाहजहां ने बनवाया था. अभी तक लाल किले का यह मुख्य गेट लाल रंग में नजर आता था जो अब हल्के कत्थई रंग में दिखेगा. बताया जा रहा है कि एएसआई अब लाल किला और उसके आसपास के अन्य गेटों के भी रंग भी वैसे ही कर सकती है जैसे कि मुगलकाल में थे.

क्या है लाहौरी गेट का इतिहास?

शाहजहां ने जब मुगलिया राजधानी को दिल्ली में शिफ्ट करने का विचार किया तो यमुना किनारे उसे जगह को सबसे मुफीद माना गया जहां लाल किला है. ऐसा इसलिए क्योंकि शाहजहां अपनी राजधानी को एक बड़े व्यापारिक केंद्र के तौर पर स्थापित करना चाहते थे. दिल्ली सरकार के शाहजहांनाबाद पुर्नविकास निगम की वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली मुगलिया सल्तनत के केंद्र में थी और यमुना से नाव के सहारे कहीं भी जल्द से जल्द पहुंचा जा सकता था. नदी की वजह से आगरा से सीधे कनेक्टिविटी भी थी. लिहाजा शाहजहानाबाद को 1500 एकड़ क्षेत्र में बसाया गया. शहर के चारों ओर एक दीवार बनाई गई.

क्यों बदला गया लाहौरी गेट?

लाहौरी गेट वर्तमान में वैसा ही नजर आ रहा है, जैसा मुगलकाल में था. हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने काफी रिसर्च के बाद ये बदलाव किया है. दरअसल लाहौरी गेट पर लाल रंग की कई परतें हो गईं थीं. एएसआई के मुताबिक इससे दीवारों के अंदर नमी जा रही थी. इसके अलावा मुगलकालीन चिनाई भी पेंट के नीचे छिप गई थी. एएसआई ने सैंड ब्लास्टिंग तकनीक से लाल रंग हो हटा दिया है. यह ऐसी तकनीक है जिसमें बालू की मदद से रंग को घिसा जाता है.

कैसा है लाहौरी गेट?

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक 1500 एकड़ में बने शाहजहांनाबाद में 94 एकड़ में अष्टकोणीय किले का निर्माण कराया गया. किले में चारों तरफ द्वार बनाए गए. इनमें मुख्य द्वार का नाम लाहौरी गेट रखा गया. इसके अलावा एक दिल्ली गेट, एक यमुना गेट और एक दरवाजे का नाम सलीमगढ़ द्वार रखा गया. किले के चारों ओर एक खाई बनाई गई, जिसे यमुना नदी से जोड़ा गया था. यह खाई तकरीबन 2.41 किमी लंबी है जो किले के चारों तरफ है.

इनमें लाहौरी गेट सबसे ज्यादा खास इसलिए है, क्योंकि एक किले के आगे एक भव्य तीन मंजिला इमारत है. निर्माण के समय ये बेहद खास थी, जहां से शाहजहां को पूरा शहर नजर आता था. हालांकि बाद में औरंगजेट ने इस गेट को बुर्ज से ढक दिया. यह दरवाजा इसलिए भी खास था क्योंकि यहां बने बुर्ज की छत से किले के पूर्व साइड में स्थित महलों तक पहुंचा जा सकता था. गेट के दोनों ओर दो मंजिला मेहराबदार हॉल हैं, इन्हें छत्ता चौक कहा जाता है. अब इनका प्रयोग दुकानों के रूप में होता है?

लाल किले के अंदर छत्ता बाजार (फोटो-सोशल मीडिया)

लाहौरी गेट क्यों रखा गया नाम?

लाल किले का मुख्य गेट जिस तरफ है वह सड़क असल में लाहौर की ओर जाती थी. यह शहर की प्रमुख सड़कों में से एक थी. इसीलिए इस गेट का नाम लाहौरी गेट रखा गया था. लाहौर नाम इसलिए भी रखा गया क्योंकि मुगलकाल में लाहौर को एक बड़ा कल्चरल और व्यापारिक केंद्र माना जाता था. किले के सामने से गुजरने वाला यह मार्ग शाहजहांनाबाद को लाहौर से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग था जिसे शाही मार्ग के तौर पर भी जाना जाता था. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक उस समय ये एक भौगोलिक चिह्रन के तौर पर भी काम करता था, जो बताता था कि लाहौर जाने वाला रास्ता यही है.

अंग्रेजों ने तुड़वा दिए थे मुगलकालीन निर्माण

एएसआई के मुताबिक अंग्रेजों ने जब 1857 में इस किले पर कब्जा किया था तो लाहौरी गेट के अंदर व लाल किले के अन्य हिस्सों के कई निर्माण तुड़वा दिए थे. खासतौर से लाहौरी गेट के ऊपर तोपें लगाईं गईं थीं, इन्हें ले जाने के लिए यहां सीढ़ियों का निर्माण कराया गया था. जो आज तक मौजूद हैं. हालांकि किले के निर्माण के वक्त ये सीढ़ियां नहीं थीं. गेट के अंदर कई इमारतों को गिरा दिया गया था और उनकी जगह सैन्य बैरकों व अन्य निर्माण किए गए थे.



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