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देशभर में 15 अक्टूबर से यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर नया एमडीआर नियम लागू होगा. लेकिन भोपाल और इंदौर के व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं. वे 23 सितंबर को NO UPI DAY मना रहे हैं. इसके लिए पूरे मध्य प्रदेश के व्यापारी एकजुट हो रहे हैं. भोपाल के अहिल्या चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ ने दूसरे शहरों के व्यापारियों व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए जुड़ रहे हैं. कैंपेन चला रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि नए MDR के विरोध 10 लाख व्यापारी शामिल होंगे.
मध्य प्रदेश में 23 सितंबर को यूपीआई से पेमेंट नहीं होगी.
भोपाल. यूपीआई ट्रांजेक्शन को लेकर 15 अक्टूबर से नया एमडीआर रूल पूरे देश में लागू हो रहा है. इसके विरोध में भोपाल के व्यापारियों ने 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है. यानी इस दिन वह यूपीआई से कोई पैसा न लेंगे और न ही देंगे. यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढककर रखेंगे. भोपाल के व्यापरी संगठन इस मुहीम को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाने के लिए WhatsApp ग्रुप और बिज़नेस-एसोसिएशन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं.
टाइम्स ऑफि इंडिया के मुताबिक, उनका मकसद है कि UPI ट्रांज़ैक्शन पर लगने वाले नए मर्चेंट चार्ज के ख़िलाफ़ राज्य-स्तरीय विरोध में कम से कम 10 लाख व्यापारी शामिल हों. अहिल्या चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ ने दूसरे शहरों के व्यापारिक संगठनों से संपर्क करना शुरू कर दिया है, जबकि व्यापारियों को एकजुट करने और ग्राहकों को जानकारी देने के लिए दुकानों और बाज़ारों में पोस्टर बांटे जा रहे हैं. अकेले इंदौर में, लगभग दो लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 125 से ज़्यादा संगठनों ने इस अभियान का समर्थन किया है.
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप पर कैंपेन
चैंबर के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने कहा कि व्यापारी पूरे राज्य में संगठनों और अलग-अलग व्यापारियों तक पहुंचने के लिए WhatsApp ग्रुप और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. हिस्सा लेने वाले व्यापारियों से कहा गया है कि वे उस दिन UPI ट्रांज़ैक्शन न करें और पेमेंट के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें. इंदौर के व्यापारियों ने QR स्कैनर और पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढकने का भी प्रस्ताव दिया है.
डिजिटल पेमेंट का विरोध नहीं, ज्यादा कीमत वाले ट्रांजैक्शन पर आपत्ति
चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और महासचिव गोपाल दास अग्रवाल ने MP के बड़े व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों से इसमें शामिल होने की अपील की है. व्यापारियों का कहना है कि वे डिजिटल पेमेंट का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि ज़्यादा कीमत वाले UPI ट्रांज़ैक्शन स्वीकार करने पर लगने वाली अतिरिक्त लागत का विरोध कर रहे हैं. कम मार्जिन वाले बिज़नेस को या तो यह लागत खुद उठानी पड़ सकती है, या कैश पेमेंट की ओर बढ़ना पड़ सकता है, या फिर कीमतों में इसे जोड़ना पड़ सकता है.