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Upendra Kushwaha on Nitish Kumar Legacy: आरएलएम सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कुर्सी विरासत में नहीं मिलती, विचारधारा मिलती है और जेडीयू की सबसे बड़ी कुर्सी के उत्तराधिकारी निशांत कुमार होंगे. उन्होंने निशांत को अपना बड़ा बेटा और दीपक प्रकाश को छोटा बेटा तक बोल डाला. जानें इस बायन के सियासी मायने?
पटना: बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री पद से आगे अब नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और विचारधारा को लेकर बहस तेज होती दिख रही है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पुराने ‘विरासत’ वाले बयान पर सफाई देते हुए लव-कुश सामाजिक समीकरण से लेकर निशांत कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तक पर अपनी बात रखी. कुशवाहा ने कहा कि सत्ता चलाने वालों के सामने कई चुनौतियां होती हैं. अगर आप चाहते हैं कि सत्ता चले तो सत्ता चलाने वाले लोगों के पीछे खड़ा रहना होगा. उन्होंने कहा कि 1994 में लव-कुश को एक साथ लाने की कवायद शुरू हुई थी. इसी सामाजिक समीकरण ने आगे चलकर नीतीश कुमार के लिए राजनीतिक जमीन तैयार की.
‘लव-कुश सिर्फ दो जातियों का समीकरण नहीं’
उपेंद्र कुशवाहा ने लव-कुश की राजनीति को केवल दो जातियों तक सीमित मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि लव-कुश एक ऐसी छतरी है. जिसके नीचे दबे-कुचले, पिछड़े और शोषित तबके के लोग आते हैं. उनके मुताबिक नीतीश कुमार ने अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने का काम किया. इसी वजह से यह राजनीतिक समीकरण मजबूत हुआ. कुशवाहा ने कहा कि अब जरूरत इस छतरी को और मजबूत करने की है. उनका तर्क था कि छतरी मजबूत रहेगी तो उसके नीचे आने वाले सभी लोग सुरक्षित रहेंगे.
‘एक हैं तो सेफ हैं… बांटेंगे तो कटेंगे’
अपने बयान में कुशवाहा ने ‘एक हैं तो सेफ हैं’ और ‘बांटेंगे तो कटेंगे’ जैसे राजनीतिक नारों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कोशिश करते हैं कि आपस में लोग भिड़ जाएं, लेकिन ऐसा नहीं होगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार एनडीए के भीतर नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और उनके विचारों को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा जारी है. जेडीयू की ओर से भी हाल में ‘नीतीश संवाद’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए नीतीश की राजनीतिक विरासत को प्रमुखता दी जा रही है.
‘कुर्सी और विचारधारा अलग-अलग होती है’
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने ‘विरासत’ वाले बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि कुर्सी और विचारधारा दोनों अलग-अलग चीजें हैं. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को विचारधारा विरासत में मिली. जबकि कुर्सी विरासत में नहीं मिली. आज उस कुर्सी पर सम्राट चौधरी बैठे हैं. कुशवाहा ने कहा कि जब तक पार्टी और जनता का आशीर्वाद रहेगा. तब तक कोई ताकत उन्हें हटा नहीं सकती. साथ ही उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की विचारधारा को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाना है.
निशांत कुमार को लेकर भी साफ की बात
सबसे अहम बयान जेडीयू की सबसे बड़ी कुर्सी के उत्तराधिकारी को लेकर आया. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जेडीयू में जो सबसे बड़ी कुर्सी है उसके उत्तराधिकारी निशांत कुमार ही होंगे. इसमें कोई शक नहीं है. उन्होंने अपने बयान को व्यक्तिगत रिश्ते से जोड़ते हुए कहा कि दीपक प्रकाश उनके छोटे बेटे हैं. निशांत कुमार उनके बड़े बेटे हैं. उन्होंने कहा हम लोग एक हैं. यह स्पष्टीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त से ही उपेंद्र कुशवाहा के बयानों को नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है. कुशवाहा पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके लिए ‘विरासत’ का मतलब किसी सरकारी पद या राजनीतिक कुर्सी का उत्तराधिकार नहीं, बल्कि विचारों और मूल्यों को आगे बढ़ाना है.
बयान के समझिए राजनीतिक मायने
कुशवाहा के ताजा बयान में तीन संदेश साफ तौर पर दिखाई देते हैं. लव-कुश सामाजिक समीकरण को मजबूत करना, नीतीश कुमार की विचारधारा को आगे बढ़ाने की बात करना और निशांत कुमार को जेडीयू की भविष्य की सबसे बड़ी कुर्सी का उत्तराधिकारी मानना. खास बात यह है कि निशांत कुमार हाल ही में जेडीयू के विधायकों के एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम में पहली बार पार्टी विधायकों को संबोधित कर चुके हैं. उन्होंने अपने पिता नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही थी. यानी कुशवाहा ने अपने बयान से एक तरफ सम्राट चौधरी के मौजूदा सत्ता नेतृत्व को स्वीकार किया है, तो दूसरी तरफ नीतीश की विचारधारा और जेडीयू की भविष्य की राजनीतिक विरासत को निशांत कुमार से जोड़कर अपनी स्थिति भी स्पष्ट कर दी है.