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UPI MDR Fee : सरकार ने यूपीआई पर एमडीआर लगाया तो तमाम दिग्गजों ने इसकी आलोचना करनी शुरू कर दी. कुछ ने इसका विरोध भी किया, जिसमें भारतपे के को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर का नाम सबसे आगे है. इस पर फोनपे के सीईओ ने पलटवार करते हुए कहा कि एमडीआर सही और वे अश्नीर की बातों को ज्यादा सीरियसली नहीं लेते हैं.
यूपीआई से भुगतान पर एमडीआर लगाने से इन्फ्रा को बढ़ावा मिलेगा.
नई दिल्ली. सरकार ने जबसे 2 हजार रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का ऐलान किया है, उसके बाद से ही इसे लेकर विरोध और समर्थन दिख रहा है. भारतपे के को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर ने तो इसकी जमकर आलोचना की थी, लेकिन अब सबसे बड़े यूपीआई प्लेटफॉर्म फोनपे के सीईओ ने उनकी बात का जवाब दिया है. उन्होंने यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि वे अश्नीर की बातों को ज्यादा सीरियसली नहीं लेते हैं.
PhonePe के CEO समीर निगम ने चुनिंदा UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का समर्थन किया है. उनका तर्क है कि नया सिस्टम कार्ड पेमेंट नेटवर्क की तुलना में काफी सस्ता है और इसमें कई कैटेगरी के लिए लिमिट तय की गई है. इससे पहले अश्नीर ग्रोवर ने यूपीआई चार्ज की आलोचना करते हुए इस पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि जो पेमेंट सिस्टम इतने बड़े पैमाने पर काम कर रहा है, उसे क्यों बदला जाना चाहिए.
क्या था अश्नीर ग्रोवर का तर्क
ग्रोवर ने तर्क दिया था कि अगर UPI ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाया जाता है, तो इससे मर्चेंट और यूजर्स इस प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से दूरी बना सकते हैं. उन्होंने 2 हजार रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लगाने को भी गलत ठहराया और कहा कि यह देश में डिजिटल भुगतान की तरफ बढ़ते कदम को रोक सकता है. ग्रोवर के इस बयान पर समीर निगम ने कहा कि मर्चेंट को कानूनी रूप से UPI MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने से रोका गया है. उन्होंने कैटेगरी के हिसाब से तय लिमिट का भी जिक्र किया, जिसमें इंश्योरेंस, फ्यूल और बिल पेमेंट जैसे कुछ सेक्टर के लिए 5 रुपये की लिमिट तय की गई है. कैपिटल-मार्केट ट्रांजेक्शन के लिए 0.02% MDR है, जिसकी अधिकतम लिमिट 300 रुपये है.
सब्सिडी पर निर्भर नहीं रह सकती इंडस्ट्री
निगम ने यह भी कहा कि पेमेंट इंडस्ट्री हमेशा सरकारी सब्सिडी पर निर्भर नहीं रह सकती. साथ ही तर्क दिया कि जैसे-जैसे ट्रांजेक्शन की संख्या बढ़ रही है, UPI को एक टिकाऊ कॉमर्शियल मॉडल की जरूरत है. उन्होंने ग्रोवर के बारे में भी कहा कि मैं उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेता. भारतपे (BharatPe) ने भी स्पष्ट कर दिया है कि साल 2024 से ग्रोवर का इस कंपनी से कोई संबंध नहीं है. उनके विचारों के साथ कंपनी किसी भी तरह से तालमेल नहीं रखती है.
क्या है एमडीआर और क्यों लगाया
सरकार ने डिजिटल भु्गतान के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर लगाने का फैसला किया है. 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 0.04 फीसदी चार्ज लगाया जाएगा. इसका असर बड़े ट्रांजेक्शन पर दिखेगा. हालांकि, पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन के लिए भुगतान करने पर एमडीआर चार्ज को फिक्स कर दिया गया है. इसके लिए कितना भी भुगतान यूपीआई से किया जाए, उस पर एकमुश्त 5 रुपये का ही चार्ज लगाया जाएगा.