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जापान के सेंट्रल बैंक BoJ ने ब्याज दर 0.25% बढ़ाकर 1.25% कर दी है, जिसका असर भारत को मिलने वाले जापानी कर्ज पर भी पड़ सकता है. हालांकि, पुराने फिक्स्ड-रेट JICA लोन की ब्याज दर तुरंत नहीं बढ़ेगी. नए और फ्लोटिंग-रेट वाले कर्ज पर असर ज्यादा हो सकता है, क्योंकि कुछ लोन TORF से जुड़े हैं. इसके अलावा येन-रुपये की विनिमय दर भी कर्ज की लागत को प्रभावित कर सकती है. भारत में मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर इसका असर नजर आ सकता है.
जापान में 31 साल के हाई पर पहुंची ब्याज दर.
जापान के सेंट्रल बैंक Bank of Japan (BoJ) ने शुक्रवार को अपनी ब्याज दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 1.25% कर दी. यह 1995 के बाद जापान में ब्याज दर का सबसे हाई लेवल है. फैसला बैंक की पॉलिसी बोर्ड बैठक में 7-2 के वोट से लिया गया. महंगाई के दबाव और कमजोर येन को देखते हुए बैंक ने यह कदम उठाया है.
जापान का यह फैसला भारत के लिए भी मायने रखता है, क्योंकि जापान लंबे समय से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सस्ते और लंबी अवधि वाले कर्ज के जरिए मदद करता रहा है. मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और दूसरे प्रोजेक्ट्स में JICA (Japan International Cooperation Agency) के जरिए येन में लोन दिए जाते हैं. सवाल यह है कि जापान में ब्याज बढ़ने से इन कर्जों की लागत कितनी बढ़ेगी और भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
जापान ने क्यों बढ़ाई ब्याज दर?
जापान कई साल तक बेहद कम ब्याज दरों की नीति पर चला आ रहा है. लेकिन अब वहां कीमतों में बढ़ोतरी और कमजोर येन से आयात महंगा हुआ है. अगस्त में जापान की कोर महंगाई 1.7% रही, जबकि महंगाई का दबाव अभी भी बैंक के लिए टेंशन की वजह बनी हुई है. BoJ ने जून में भी ब्याज दर बढ़ाकर 1% की थी और अब इसे 1.25% कर दिया है. हालांकि, शुक्रवार के फैसले में बैंक की तरफ से अक्टूबर में फिर से दर बढ़ाने का कोई साफ संकेत नहीं दिया गया. फैसले के बाद येन डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 156.9 प्रति डॉलर तक पहुंच गया.
भारत को मिलने वाले जापानी कर्ज पर कितना असर?
भारत और जापान के बीच JICA के जरिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज समझौते हुए हैं. इनमें मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल और कई मेट्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसलिए BoJ की आज की दर बढ़ोतरी से पुराने सभी JICA लोन तुरंत महंगे नहीं हो जाएंगे. जिन कर्जों की ब्याज दर पहले से फिक्स है, उनकी दर सामान्य तौर पर समझौते की शर्तों के मुताबिक ही रहेगी. JICA के रिकॉर्ड में भारत के कई पुराने प्रोजेक्ट्स के लिए फिक्स्ड ब्याज दर दर्ज है.
नए और फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर नजर
असर की संभावना नए या फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर ज्यादा हो सकती है. JICA के कुछ नए भारत प्रोजेक्ट्स में ब्याज दर 6 महीने के TORF यानी Tokyo Term Risk Free Rate से जुड़ी हुई है. मार्च 2026 में मंजूर बेंगलुरु मेट्रो फेज-3 और मुंबई मेट्रो लाइन-11 के कर्ज में प्रोजेक्ट ब्याज दर TORF+80 बेसिस पॉइंट रखी गई है. ऐसे कर्ज में जापान की बाजार दरों में बदलाव का असर समय के साथ पड़ सकता है. इसके अलावा अगर येन मजबूत होता है, तो रुपये में हिसाब करने पर येन में लिए गए कर्ज की देनदारी बढ़ सकती है. हालांकि, इसका पूरा असर हर प्रोजेक्ट के लोन एग्रीमेंट, ब्याज दर और करेंसी एक्सपोजर पर निर्भर करेगा.
भारतीय बाजार और कंपनियों के लिए क्या मतलब?
जापान की ऊंची ब्याज दरों का असर सिर्फ भारत-जापान कर्ज तक सीमित नहीं है. लंबे समय से निवेशकों के बीच कम ब्याज वाले येन में पैसा उधार लेकर दूसरे देशों की संपत्तियों में निवेश करने की रणनीति चर्चा में रही है. जापान में ब्याज दर बढ़ने से ऐसी स्ट्रैटजी की लागत बढ़ सकती है और ग्लोबल फंड के फ्लो पर असर पड़ सकता है.
भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि पुराने फिक्स्ड-रेट JICA कर्ज पर तुरंत बड़ा असर नहीं दिखता, लेकिन नए कर्ज और फ्लोटिंग-रेट वाले समझौतों में लागत बढ़ने की संभावना पर नजर रखनी होगी. जापान की दर बढ़ोतरी का असर भारत पर सीधे किसी एक झटके के रूप में नहीं, बल्कि नए कर्ज की शर्तों, फ्लोटिंग ब्याज दर और येन-रुपये की चाल के जरिए धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है.