DUSU First Election, DUSU Election History: DU स्‍टूडेंट यूनियन का पहला चुनाव कब हुआ, कैसे वोटिंग हुई और कौन बना था पहला अध्यक्ष?

DUSU First Election, DUSU Election History: DU स्‍टूडेंट यूनियन का पहला चुनाव कब हुआ, कैसे वोटिंग हुई और कौन बना था पहला अध्यक्ष?


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Delhi University, DUSU Elections 2026: आज दिल्ली यूनिवर्सिटी का डूसू चुनाव हजारों छात्रों, बड़े-बड़े कैंपेन और हाई-वोल्टेज छात्र राजनीति के लिए जाना जाता है लेकिन इसकी शुरुआत कैसी थी? दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का पहला चुनाव कब हुआ उस समय चुनाव कैसे कराया जाता था और सबसे पहली बार अध्यक्ष की कुर्सी किसने संभाली? डूसू का इतिहास करीब सात दशक पुराना है और इसके शुरुआती चुनाव की कहानी आज की चुनावी तस्वीर से बिल्कुल अलग थी. 1949 में छात्र संघ के गठन से लेकर 1954 में पहले चुनाव और 1973 में सीधे मतदान की शुरुआत तक डूसू ने लंबा सफर तय किया है. जानिए डीयू छात्र राजनीति के पहले चुनाव की पूरी कहानी…

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DUSU Election History, DU Elections 2026: दिल्‍ली यूनिवर्सिटी का पहला चुनाव कब हुआ था?

Delhi University, DUSU Elections 2026: आज दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र संघ यानी डूसू चुनाव देश के सबसे चर्चित छात्र चुनावों में गिना जाता है.चुनाव के दौरान कैंपस में पोस्टर, बहस, प्रचार और वोटिंग को लेकर खूब चर्चा होती है लेकिन क्या आपको पता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ की कहानी आज से करीब सात दशक पहले शुरू हुई थी? डूसू का गठन 1949 में हुआ लेकिन इसका पहला चुनाव 1954 में हुआ था और उस पहले चुनाव में गजराज बहादुर नागर दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने.

इस इतिहास की सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1954 का चुनाव आज के डूसू चुनाव जैसा नहीं था. उस समय हर छात्र सीधे अध्यक्ष को वोट नहीं देता था.शुरुआती वर्षों में डूसू का चुनाव अप्रत्यक्ष व्यवस्था से होता था यानी कॉलेजों के स्तर पर चुने गए प्रतिनिधियों के जरिए केंद्रीय छात्र संघ के पदाधिकारी चुने जाते थे. बाद में छात्रों ने सीधे चुनाव की मांग उठाई और 1973 से डूसू में प्रत्यक्ष मतदान की व्यवस्था शुरू हुई.

आज के डूसू से पहले 1947 में रखी गई थी नींव

डूसू की कहानी वास्तव में 1954 से भी कुछ साल पहले शुरू हो गई थी. दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 6 अगस्त 1947 को विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी की बैठक में छात्रों के लिए एक विश्वविद्यालय स्तर के प्रतिनिधि संगठन का प्रस्ताव सामने आया था. उस समय वाइस चांसलर ने बताया था कि छात्रों का एक प्रतिनिधि समूह विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए यूनियन बनाना चाहता है. इसके लिए संविधान और कामकाज की प्रक्रिया तैयार करने के लिए एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया यानी देश की आजादी से ठीक पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए एक साझा प्रतिनिधि संस्था बनाने की सोच सामने आ चुकी थी. यही विचार आगे चलकर दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी डूसू के गठन की वजह बना.

9 अप्रैल 1949 को डूसू का हुआ उद्घाटन

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन का औपचारिक उद्घाटन 9 अप्रैल 1949 को हुआ.दिल्ली यूनिवर्सिटी के शताब्दी टाइमलाइन में भी 1949 में डूसू के उद्घाटन का उल्लेख है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधिकारिक स्रोत बताते हैं कि इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था.यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए.1949 में डूसू का गठन और उद्घाटन हुआ था, जबकि पहला चुनाव 1954 में हुआ इसलिए डूसू की स्थापना का साल 1949 और पहले चुनाव का साल 1954 है.

1954 में पहली बार हुआ डूसू चुनाव

डूसू का पहला चुनाव 1954 में हुआ. दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से एक पुराने पोस्‍ट में कहा गया है कि 1954 में छात्रों ने डूसू के पहले चुनाव में वोट डाले और गजराज बहादुर नागर पहले अध्यक्ष चुने गए.विश्वविद्यालय के पुराने रिकॉर्ड से भी यह बात सामने आती है कि 14 मार्च 1954 की कार्यकारिणी की बैठक में यह दर्ज किया गया था कि डूसू को संविधान मिल चुका था और पहली बार चुनाव हो चुके थे यानी 1954 सिर्फ डूसू के इतिहास में एक सामान्य साल नहीं था बल्कि इसी साल पहली चुनावी प्रक्रिया ने छात्र संगठन को निर्वाचित नेतृत्व दिया.

पहले अध्यक्ष कौन बने थे?

1954 के पहले डूसू चुनाव में गजराज बहादुर नागर अध्यक्ष चुने गए. उनका कार्यकाल 1954-55 बताया गया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के हालिया आधिकारिक पोस्ट में उन्हें डूसू का पहला अध्यक्ष बताया गया है. 2026 की डूसू चुनाव से जुड़ी रिपोर्ट में भी उन्हें पहला निर्वाचित अध्यक्ष बताया गया है.गजराज बहादुर नागर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की थी. छात्र राजनीति के बाद उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में भी कदम रखा. हरियाणा विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक वह मेवला महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र से 1977 में विधायक चुने गए थे. बाद में वह हरियाणा सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे. हरियाणा विधानसभा के रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 1 अक्टूबर 1929 दर्ज है.

1954 में कितने कॉलेज थे?

आज दिल्ली यूनिवर्सिटी में दर्जनों कॉलेज हैं और डूसू चुनाव में बड़ी संख्या में कॉलेज और विभाग शामिल होते हैं लेकिन 1954 के पहले डूसू चुनाव में कितने कॉलेजों ने चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लिया था इसकी पूरी जानकारी कही उपलब्ध नही है लेकिन यह बात जरूर है कि उस समय विश्वविद्यालय आज की तुलना में बहुत छोटा था. विश्वविद्यालय की शुरुआत 1922 में सिर्फ 3 कॉलेज और करीब 750 छात्रों के साथ हुई थी. इसके बाद धीरे-धीरे नए कॉलेज जुड़ते गए. 1948 में हंसराज कॉलेज और मिरांडा हाउस की स्थापना हुई और 1951 में श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज स्थापित हुआ. 1954 में किरोड़ीमल कॉलेज भी विश्वविद्यालय के कैंपस में आया.

1954 में हर छात्र सीधे वोटर नहीं था

1954 के चुनाव को समझने के लिए यह बात सबसे जरूरी है. आज डूसू में छात्र सीधे केंद्रीय पदों के लिए मतदान करते हैं लेकिन शुरुआती व्यवस्था ऐसी नहीं थी.हिंदुस्तान टाइम्स की डूसू चुनावों के इतिहास पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक 1972 तक कॉलेज पहले अपने प्रतिनिधि यानी काउंसलर चुनते थे और ये काउंसलर आगे डूसू के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करते थे.1972-73 में छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद चुनाव व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया और 1973 से सीधे मतदान की शुरुआत हुई.उस समय चुनावी व्यवस्था ही अलग थी.



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