Iran US New York Secret Deal : 6 महीने बाद होने वाली है ईरान-अमेरिका की सीक्रेट डील? 2 वीजा ने खोली ट्रंप की प्लानिंग, न्यूयॉर्क में रचा जाएगा इतिहास

Iran US New York Secret Deal : 6 महीने बाद होने वाली है ईरान-अमेरिका की सीक्रेट डील? 2 वीजा ने खोली ट्रंप की प्लानिंग, न्यूयॉर्क में रचा जाएगा इतिहास


अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 6 महीने से जारी भीषण जंग ने पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई ठप कर रखी है, जिससे कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं. ऐसे भारी तनाव के बीच वाशिंगटन से आई एक खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 2 ऐसे खास वीजा को मंजूरी दी है, जिसके बाद ये उम्मीद जगने लगी है कि पश्चिम एशिया से जल्द ही कोई राहत भरी खबर आ सकती है. चर्चा यहां तक है कि खाड़ी देशों के दबाव और चीन-पाकिस्तान की मध्यस्थता के चलते न्यूयॉर्क में पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ी सीक्रेट डील फाइनल होने जा रही है.

ट्रंप ने ईरान के किन 2 लोगों को दिया अमेरिकी वीजा?

असल में, अमेरिका ने युद्ध के इस माहौल के बीच अचानक ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को न्यूयॉर्क आने का वीजा दे दिया है. इस फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि वो ईरान से सीधे बात कर रहे हैं और ये जंग अब अपने खात्मे की ओर है. ऐसे में हर किसी के मन में बस यही सवाल उठ रहा है कि क्या न्यूयॉर्क से जल्द ही कोई ऐतिहासिक ऐलान किया जा सकता हैय़

ईरानी नेताओं को वीजा मिलना क्यों बड़ी बात?

जब दो देश आपस में जंग लड़ रहे हों, तो उनके सबसे बड़े नेताओं को एक-दूसरे के देश में कदम रखने की इजाजत मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता. यही वजह है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा ईरानी राष्ट्रपति और उनके विदेश मंत्री को वीजा देने के फैसले ने सबको हैरान कर दिया है. हालांकि, अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर कई कड़े नियम भी थोपे हैं.

  1. सीमित दायरा: ईरानी नेता न्यूयॉर्क में अपने यूएन मिशन के आसपास के बेहद छोटे इलाके से बाहर नहीं जा सकेंगे.
  2. शॉपिंग पर बैन: उन्हें कॉस्टको या सैम क्लब जैसी बड़ी दुकानों से लग्जरी और थोक सामान खरीदने की इजाजत नहीं होगी.
  3. छोटा डेलिगेशन: इस बार ईरान से आने वाले अफसरों की संख्या पिछली बार के मुकाबले काफी कम रखी गई है.

लेकिन इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिका ने एक तरफ तो ईरान के नेताओं को वीजा दे दिया, लेकिन दूसरी तरफ फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल का वीजा रद्द कर दिया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक्टिव वॉर जोन के बीच ईरान जैसे कट्टर दुश्मन देश के राष्ट्र प्रमुख को अपने घर बुलाना सिर्फ कोई कानूनी मजबूरी नहीं है, बल्कि इसके पीछे बैकचैनल का बहुत बड़ा खेल चल रहा है.

ट्रंप का बड़ा दावा vs तेहरान का सीधा इनकार

वीजा की खबर बाहर आते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने आकर एक बड़ा बयान दे दिया. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब बहुत जल्द खत्म होने वाली है. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उनकी ईरान से कोई बात हुई है, तो ट्रंप ने साफ कहा, ‘हां, मेरी उनसे सीधे बात हुई है. वो बहुत जल्द डील करना चाहते हैं और अब मैं फैसला करूंगा कि आगे क्या करना है’. हालांकि, तेहरान की तरफ से ट्रंप के इस दावो हवा में उड़ा दिया गया.

  • ईरान का करारा जवाब: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि ट्रंप सिर्फ दोहरे बयान दे रहे हैं. जब तक अमेरिका ईरान की सभी शर्तें नहीं मान लेता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी.
  • पुरानी डील की मांग: पूर्व ईरानी राजनयिक अब्बास खामेयार ने भी ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि कोई नई बात नहीं हो रही है. ईरान सिर्फ पुराने समझौते को लागू कराना चाहता है, जिसके तहत अमेरिका को अपनी पाबंदियां हटानी होंगी.

ओमान में हूतियों के साथ अमेरिका की सीक्रेट मीटिंग

ईरान-अमेरिका के इस पूरे सस्पेंस के बीच ओमान की राजधानी मस्कट से एक और बड़ी खबर सामने आई है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मस्कट में स्थित अमेरिकी दूतावास के अंदर अमेरिकी अधिकारियों और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच एक बहुत ही गुप्त बैठक हुई है. इस सीक्रेट मीटिंग में कई बातें तय हुआ हैं.

  • अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं: हूती विद्रोहियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वो उनके जहाजों पर हमला नहीं करेंगे और 2025 के युद्धविराम का पालन करेंगे.
  • लाल सागर में राहत: हूतियों ने वादा किया है कि वो सऊदी अरब के जहाजों को छोड़कर किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय या इजरायली व्यापारिक जहाज को निशाना नहीं बनाएंगे.

हूतियों का लाल सागर और बाब अल-मंदेब जैसे मुख्य समुद्री रास्तों पर कब्जा है, इसलिए अमेरिका का उनके साथ मेज पर बैठना इस बात का साफ इशारा है कि वाशिंगटन अब समंदर में जारी इस पूरे बवाल को शांत करना चाहता है.

चीन का बैकचैनल खेल

इस पूरी सीक्रेट डील को पकाने में चीन की भूमिका सबसे ज्यादा अहम मानी जा रही है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर लगातार वाशिंगटन और तेहरान के बीच बिचौलिए का काम कर रहे हैं. हाल ही में जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बीजिंग में थे, तब उन्होंने सीधे असीम मुनीर से फोन पर लंबी बात की थी. दूसरी तरफ, चीन भी खुलकर मैदान में आ गया है.

  • चीन की अपील: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका और ईरान दोनों से कहा है कि वो संयम बरतें और होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलें.
  • शी जिनपिंग का शांति प्रस्ताव: हाल ही में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति कायम करने के लिए मदद की पेशकश की थी.

जानकारों का कहना है कि दोनों जंग लड़ रहे देशों के पास कोई हल नहीं बचा है, इसलिए चीन और पाकिस्तान जैसी बड़ी ताकतें पर्दे के पीछे से दोनों को उस पुराने समझौते पर वापस लाने में जुटी हैं जो पिछले महीने टूट गया था.

क्या न्यूयॉर्क में रचा जाएगा नया इतिहास?

अगर इन सभी कड़ियों को एक साथ जोड़कर देखें, तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाती है. एक तरफ ओमान में हूतियों से गुप्त बातचीत, दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान की बिचौलियागीरी, खाड़ी देशों का आर्थिक दबाव और सबसे बढ़कर ईरानी राष्ट्रपति को अमेरिका का वीजा मिलना, ये सब महज इत्तेफाक नहीं हो सकते.

भले ही ईरान और अमेरिका सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दे रहे हों, लेकिन अंदर ही अंदर दोनों को समझ आ चुका है कि इस जंग को ज्यादा खींचना किसी के हित में नहीं है. अब सबकी नजरें अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा पर टिकी हैं. क्या वहां ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच बंद कमरे में कोई ऐतिहासिक मुलाकात होगी? क्या होर्मुज का रास्ता खोलने के लिए कोई नई सीक्रेट डील सामने आएगी? ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि न्यूयॉर्क की धरती पर मिडिल ईस्ट की शांति की एक नई डील लिखी जाने वाली है.



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