DUSU Election Vote Counting Process: डूसू चुनाव के नतीजे कब आएंगे, वोटों की काउंटिंग कैसे होती है, कितने घंटे लगते हैं? जानिए सबकुछ

DUSU Election Vote Counting Process: डूसू चुनाव के नतीजे कब आएंगे, वोटों की काउंटिंग कैसे होती है, कितने घंटे लगते हैं? जानिए सबकुछ


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DUSU Election Vote Counting Process: डूसू चुनाव 2026 अपने चरम पर हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस चुनावी रंग में रंगे हुए हैं. डूसू चुनाव के वोटों की गिनती कल नॉर्थ कैंपस के स्पोर्ट्स स्टेडियम में सुबह 8 बजे से शुरू होगी. जानिए ईवीएम की सीलिंग से लेकर राउंड-वाइज काउंटिंग और 4 से 6 घंटे के अंदर आने वाले फाइनल नतीजों की पूरी प्रक्रिया.

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DUSU Election Vote Counting Process: डूसू चुनाव के नतीजे कल जारी किए जाएंगे

नई दिल्ली (DUSU Election Vote Counting Process). डूसू चुनाव के दौरान मैदान में सिर्फ शोर-शराबा और प्रचार ही नहीं होता, बल्कि इसके पीछे बेहद सख्त और अनुशासित प्रशासनिक ताना-बाना काम करता है. डूसू चुनाव का हर वोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में सुरक्षित होता जाता है. फिर ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम में सील करते हैं और अगले दिन जीत-हार का फैसला होता है. स्टूडेंट्स अक्सर उत्सुक रहते हैं कि डूसू चुनाव के वोटों की गिनती कैसे होती है और इसमें कितना वक्त लगता है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन और चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, वोटों की गिनती पारदर्शी और सख्त सुरक्षा घेरे के बीच होती है. दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 में वोटिंग आज यानी 18 सितंबर 2026 को हो रही है. कल, 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को डूसू चुनाव 2026 के नतीजे जारी किए जाएंगे. उसके बाद ही डीयू के नए अध्यक्ष का नाम सामने आएगा. जानिए डूसू चुनाव की मतपेटी यानी ईवीएम खुलने से लेकर नए छात्रसंघ अध्यक्ष के नाम की घोषणा तक का गणित और सफर कैसा होता है.

डीयू चुनाव के नतीजे कैसे तैयार होते हैं?

जैसे ही शाम को वोटिंग का समय खत्म होता है, वैसे ही कॉलेजों के अंदर चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होता है. पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में सभी ईवीएम को सील कर दिया जाता है. इसके बाद दिल्ली पुलिस के सख्त सुरक्षा पहरे और ऑब्जर्वर की देखरेख में इन मशीनों को संबंधित कॉलेजों से निकालकर नॉर्थ कैंपस स्थित मुख्य काउंटिंग सेंटर यानी यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पस हॉल तक पहुंचाया जाता है. रातभर ये मशीनें भारी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में लॉक रहती हैं.

फिर शुरू होती है वोट्स की गिनती

अगले दिन सुबह ठीक 8 बजे काउंटिंग सेंटर के दरवाजे खुलते हैं. सबसे पहले चुनाव अधिकारियों और दोनों पक्षों के उम्मीदवारों या उनके एजेंट की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम का ताला खोला जाता है. डीयू चुनाव में मुख्य तौर पर केंद्रीय पैनल के 4 पदों- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के लिए गिनती होती है. वोटों की गिनती राउंड-वाइज चलती है, जिसमें अलग-अलग कॉलेजों के बूथों की मशीनों के आंकड़े एक-एक करके जोड़े जाते हैं. हर राउंड के बाद रुझान बाहर आने लगते हैं. इससे दिल्ली यूनिवर्सिटी का माहौल काफी तनावपूर्ण और रोमांचक हो जाता है.

काउंटिंग में कितने घंटे लगते हैं और नतीजे कब आते हैं?

डूसू चुनाव की गिनती में आमतौर पर 4 से 6 घंटे या इससे ज्यादा का समय लग सकता है. यह इस पर निर्भर करता है कि कुल कितने प्रतिशत मतदान हुआ है और तकनीकी रूप से आंकड़े मिलाने में कितना वक्त लग रहा है. दोपहर तक स्थिति काफी हद तक साफ हो जाती है कि कौन बाजी मार रहा है. सभी राउंड्स के मुहरबंद आंकड़े फाइनल होने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी आधिकारिक रूप से विजेता उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करते हैं. इस तरह डीयू को अपनी नई छात्र सरकार मिल जाती है.



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