Last Updated:
Mexican Poppy Case : सत्यानाशी पौधे को सभी लोग एक बहुत ही गुणी पौधा मानते हैं. इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. कितना भी पुराना घाव, खुजली, कुष्ठ रोग आदि हो, आप सत्यानाशी का प्रयोग कर रोग से छुटकारा पा सकते हैं ऐसा लोग कहते है. मगर, अब एक परिवार के तीन लोगों की इसी पौधे के बीज के तेल की वजह से जान चली गई है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
तीन लोगों की मौत. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बलिया : उत्तर प्रदेश के बलिया से एक बड़ी अजीबोगरीब खबर सामने आ रही है. जिस पौधे के बीज को आप शायद सामान्य समझ रहे हैं वो आपकी जान भी ले सकता है. हम बात कर रहे हैं सत्यानाशी के बीज (Mexican poppy) की. बलिया के पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की एक रहस्मयी बीमारी से जान चली गई थी. अब एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों की टीम ने इस राज को सुलझा लिया है. जांच में सामने आया कि मौत की असली वजह ड्रॉप्सी बीमारी है. यह बीमारी सत्यानाशी (आर्जीमोन मैक्सिकना) के बीजों से बने जहरीले तेल के इस्तेमाल से हुई थी.
लगातार हुईं मौत
मामला बलिया के बेल्थरा रोड तहसील क्षेत्र का है. यहां के पशुहारी गांव के रहने वाले शिवचंद राजभर के परिवार में 29 अगस्त से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ. सबसे पहले 45 साल की पत्नी आशा देवी की मौत 29 अगस्त को हुई. इसके बाद एक सितंबर को 80 वर्षीय मां जोनिया की जान चली गई. मां का दाह संस्कार कराकर लौटे ही थे कि उसी दिन वाराणसी के ट्रामा सेंटर में 24 वर्षीय बेटी प्रीति ने दम तोड़ दिया. इन मौतों ने पूरे गांव के लोगों को दहशत में ला दिया.
इसके बाद पिता और बेटे को भी बीमारी के कारण इलाज के लिए भर्ती करवाया गया. इसी के बाद डॉक्टरों ने बीमारी की जांच शुरू की. हालांकि, शुक्र रहा कि बाप-बेटे बीमारी से बच गए. इधर, एम्स की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय भारती को टीम गठित करने का निर्देश दिया.
फिर हुई जांच शुरू
जांच के दौरान न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. आशुतोष तिवारी ने मरीजों के लक्षणों के आधार पर ड्रॉप्सी की आशंका जताई. इसके बाद मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार मिश्रा और डॉ. कनिष्क कुमार सहित अन्य विशेषज्ञों ने जांच की. ड्रॉप्सी की पुष्टि होने के बाद पिता और बेटे का इलाज उसी के अनुसार किया गया. दोनों की जान बचा ली गई. दोनों की हालत में सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया.
एम्स की निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि एम्स की टीम ने बीमारी के कारण की पहचान कर समय से इलाज किया, जिससे परिवार के शेष सदस्यों की जान बचाई जा सकी. ड्रॉप्सी के कारणों, लक्षणों और समय पर इलाज के प्रति जनजागरूकता भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम में अहम भूमिका निभाएगी.