बहराइच के कतर्नियाघाट में तेंदुए का खौफनाक हमला: 86 वर्षीय वृद्धा को खींचकर उतारा मौत के घाट, ग्रामीणों में दहशत

बहराइच के कतर्नियाघाट में तेंदुए का खौफनाक हमला: 86 वर्षीय वृद्धा को खींचकर उतारा मौत के घाट, ग्रामीणों में दहशत


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Bahraich News: कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे रिहाइशी इलाकों में आदमखोर वन्यजीवों की दस्तक ने एक बार फिर मौत का तांडव मचाया है. सीताराम पुरवा गांव में तड़के उस वक्त कोहराम मच गया, जब एक खूंखार तेंदुए ने घर के बाहर सो रही 86 वर्षीय बेबस वृद्धा पर जानलेवा हमला कर दिया और उन्हें घसीटकर नाले की ओर ले गया. इस दिल दहला देने वाले हमले में बुजुर्ग महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल है.

बहराइच जिले स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के सीताराम पुरवा गांव में सुबह-सुबह तेंदुए के भीषण हमले से हड़कंप मच गया. घर के आंगन में मौजूद 86 वर्षीय वृद्धा फूलमती पर एक तेंदुए ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया. हमला इतना भयंकर था कि वृद्धा की दर्दनाक मौत हो गई. घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और ग्रामीणों का भारी जमावड़ा लग गया.

मौके पर मिले पगमार्क, वन विभाग व पुलिस ने की पुष्टि
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम सुबह लगभग 6:30 बजे मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की. घटनास्थल का बारीक निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि वहां तेंदुए के स्पष्ट पद-चिह्न (पगमार्क) पाए गए हैं. इससे इस बात की आधिकारिक पुष्टि हो गई कि वृद्धा की मौत तेंदुए के हमले से ही हुई है. मृतका की बेटी केसना ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी मां घर के पास खटिया पर सो रही थीं. तड़के करीब 3 से 4 बजे के बीच बाघ उन्हें वहां से खींचकर नाले की तरफ ले गया, जहां उनकी मौत हो गई.

नहर किनारे फूस की मड़ई में अकेली रहती थीं वृद्धा
परिजनों के अनुसार, मृतका नहर के किनारे बनी मड़ई में रहती थीं. उनका बेटा कमाने के लिए बाहर गया हुआ है, जिसके चलते वह घर पर अकेले ही थीं. सुबह जब परिजनों को घटना की जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. घटना के बाद से ग्रामीणों में भय और शोक का माहौल है.

घनी झाड़ियों की आड़ लेकर रिहाइशी इलाके में पहुंचा तेंदुआ
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सीताराम पुरवा गांव का यह इलाका बिल्कुल नहर के किनारे स्थित है. मानसून के मौसम में नहर के आसपास काफी घनी झाड़ियां और लंबी घासें उग आई हैं, जिसका फायदा उठाकर जंगली जानवर आसानी से छिप जाते हैं. इसी का लाभ उठाकर तेंदुआ बिना किसी की नजर में आए गांव के रिहाइशी इलाके तक पहुंच गया. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नहर के समीप स्थित कच्चे और फूस के मकानों के पास सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशीलता बहुत अधिक रहती है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की कवायद तेज
स्थानीय ग्रामीणों में व्याप्त आक्रोश और भय को देखते हुए वन अधिकारी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में पिंजरा लगाने की अनुमति हेतु उच्च अधिकारियों को पत्राचार कर दिया गया है. विभाग का पूरा प्रयास है कि आज ही अनुमति प्राप्त कर पिंजरा लगा दिया जाए, ताकि हमलावर तेंदुए को जल्द से जल्द सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके.

दो महीने में 16 तेंदुओं का रेस्क्यू, ग्रामीणों को सतर्क रहने की चेतावनी
उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग की मुस्तैदी के कारण पिछले दो महीनों के भीतर इस क्षेत्र से 16 तेंदुओं को रेस्क्यू कर उनके प्राकृतिक आवास जंगलों में सुरक्षित छोड़ा जा चुका है. प्रशासन ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने, रात व भोर के समय अकेले बाहर न निकलने और बच्चों को घरों के भीतर सुरक्षित रखने की सख्त अपील की है.



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