पितृ पक्ष में जरूर करें ये 4 काम, पितरों की शांति के साथ मिलेगा आशीर्वाद!
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Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में पूर्वजों के स्मरण और उनकी शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, दान और अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं. अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार इन दिनों सूर्यदेव को अर्घ्य देने, पितरों का स्मरण करने और गाय या कुत्ते के लिए पहली रोटी निकालने की परंपरा है.
अयोध्या: सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है. हर साल आने वाले करीब 15 दिनों की इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए श्राद्ध, तर्पण, दान और विभिन्न धार्मिक उपाय करते हैं.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है. अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने बताया कि इन दिनों कुछ विशेष उपाय करने से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है.
पंडित कल्कि राम के मुताबिक वर्ष के 365 दिनों में ये 15 दिन प्रत्येक व्यक्ति के लिए विशेष महत्व रखते हैं हमारे पूर्वजों ने परिवार को जन्म दिया, उसका पालन-पोषण किया और जीवन को आगे बढ़ाने में योगदान दिया. ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान उनका स्मरण करते हुए श्रद्धा से धार्मिक कर्म करना चाहिए.
सूर्यदेव को अर्घ्य देने की विधि
पितृ पक्ष के प्रथम दिन से सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ और सफेद वस्त्र धारण करें. इसके बाद तांबे के लोटे में जल लें और उसमें साबुत अक्षत यानी चावल के दाने डालें.पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्योदय के समय गायत्री मंत्र या भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर महामंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दें. इसके बाद वहीं खड़े होकर करीब एक मिनट तक अपने पितरों का स्मरण करें और उनकी शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना करें.
तर्पण को लेकर क्या है नियम?
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि जल तर्पण की परंपरा उन लोगों के लिए मानी जाती है जिनके पिता का देहांत हो चुका है. यदि पिता जीवित हैं तो उनके लिए तर्पण करने की आवश्यकता नहीं मानी जाती. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में विधि में अंतर हो सकता है.
गाय और कुत्ते के लिए निकालें पहली रोटी
पितृ पक्ष के दौरान रोजाना घर में बने भोजन की पहली रोटी गाय या कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा है. वहीं जिस तिथि को किसी पितर का देहांत हुआ हो, उस दिन ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना चाहिए. सामर्थ्य के अनुसार दान भी किया जा सकता है.यदि ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति उपलब्ध न हो तो गाय को भोजन कराने की परंपरा बताई गई है.
पंडित कल्कि राम के अनुसार पितृ पक्ष में किए जाने वाले इन उपायों का मूल भाव पूर्वजों का स्मरण, उनके प्रति श्रद्धा और सेवा है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा से किए गए इन कर्मों से पितरों की शांति और सद्गति की कामना की जाती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहने की प्रार्थना की जाती है.