किसानों के लिए वरदान है धान की ये वैरायटी, बाढ़ जाते ही लहलहा उठती है फसल
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दरभंगा में युवा किसान सौरभ कुमार ने बाढ़ग्रस्त खेतों में ‘स्वर्णा सब-1’ धान की किस्म लगाकर मिसाल पेश की है. यह किस्म 14-15 दिन पानी में डूबे रहने के बाद भी सुरक्षित रहती है और 140-150 दिन में तैयार हो
दरभंगा: बिहार में दरभंगा जिले का अधिकांश इलाका बाढ़ ग्रसित क्षेत्र में आता है, यानी कि लो-लैंड होने की वजह से यहां किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है. हर साल जलजमाव से धान की फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में कुछ नए किसान या यूं कहें कि युवा किसान हाईटेक खेती अपना रहे हैं. यहां के स्थानीय किसानों से लोकल 18 की टीम ने खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि अब यहां इस इलाके में भी धान की अच्छी पैदावार हो रही है. ऐसे ही एक प्रगतिशील किसान सौरभ कुमार ने बाढ़ ग्रस्त खेत में अच्छी पैदावार कर मिसाल पेश की है. आइये जानते हैं इस धान की वैरायटी के बारे में.
किसान सौरभ कुमार बताते हैं कि पहले यह लो-लैंड होने की वजह से काफी परेशानी होती थी. पहले कतरनी भी किए हुए हैं, मंसूरी भी करके देखा है, लेकिन जलजमाव होने के कारण फसल बर्बाद हो जाती थी. हर साल मेहनत बेकार चली जाती थी. यहां खेती करने वालों के किसानों को भारी नुकसान होना पड़ता है. इसकी वजह से किसान यहां धान की खेती करने से डरते हैं.
इस धान की वैरायटी से होती है बंपर पैदावार
किसान सौरभ कुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने स्वर्णा सब-1 धान की किस्म लगाई है. इसकी खासियत है कि यह 14 से 15 दिन तक पानी में पूरी तरीके से डूबने के बावजूद भी सुरक्षित रहता है. पानी उतरने के बाद फिर से यह बढ़ने लगता है. इसकी जानकारी उन्हें सोशल मीडिया से मिली थी. इसके बाद से उन्होंने इस धान की वैरायटी की खेती करना शुरू कर दिया है.
जानें कितने दिनों में हो जाता है तैयार
किसान ने बताया कि यह किस्म 140 से 150 दिन में पककर पूरी तरह से तैयार हो जाती है. इसके अलावा अन्य किस्मों के मुकाबले इसमें कीड़े लगने की समस्या काफी कम होती है. इसके तने काफी मजबूत होते हैं और बालियां वजनदार होने के कारण किसानों को अच्छा मुनाफा होता है.साथ ही बिना नुकसान के फायदा उठा सकते हैं.
किसान सौरभ की सफलता को देखकर अब आसपास के किसान भी स्वर्णा सब-1 की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए यह किस्म वरदान साबित हो रही है. यदि सही समय पर रोपनी की जाए तो बाढ़ में भी किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं. इसकी खेती से किसानों को नुकसान भी नहीं उठाना पड़ता है.