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Saudi Arabia Nuclear Weapon: क्या सऊदी अरब परमाणु बम बनाने वाला है? यह सवाल इसलिए क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस को एक खुफिया आकलन मिला है. इसमें कहा गया है कि सऊगी अरब ने न्यूक्लियर बन को बनाने वाले प्रोग्राम को खारिज नहीं किया है. इस खबर के आने के बाद चर्चा बढ़ गई है कि क्या पाकिस्तान के बाद एक और इस्लामिक देश के पास परमाणु बम होगा?
सऊदी को लेकर एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है.
अभी तक मुस्लिम देशों में पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास परमाणु बम है. ईरान लंबे समय से यूरेनियम एनरिचमेंट कर रहा है, लेकिन अमेरिका-इजरायल हर बार उसे तबाह कर देते हैं. अब इसी बीच सऊदी अरब को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या वह भी परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस को खुफिया जानकारी का एक गोपनीय आकलन मिला है. इसमें चेतावनी दी गई है कि सऊदी अरब ने परमाणु हथियार विकसित करने से जुड़े प्रोग्राम को खारिज नहीं किया है. द वाशिंगटन पोस्ट में इससे जुड़ी खबर आई है. ये खबर ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और सऊदी अरब ने जुलाई में एक परमाणु सहयोग समझौता किया है. इस समझौते के तहत सऊदी अरब के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम को आगे बढ़ाने में अमेरिकी कंपनियों की बड़ी भूमिका होगी. समझौता सऊदी अरब को अपने यहां यूरेनियम एनरिचमेंट की क्षमता विकसित करने का रास्ता भी दे सकता है. इसी बात ने अमेरिकी कांग्रेस और परमाणु नॉन-प्रोलिफरेश एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है.
सऊदी के सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम पर सवाल
सऊदी अरब का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम बिजली और दूसरी नागरिक जरूरतों के लिए है. लेकिन अमेरिका में कुछ सांसद सवाल उठा रहे हैं कि अगर मकसद सिर्फ परमाणु ऊर्जा पैदा करना है तो सऊदी अरब को अपने यहां यूरेनियम एनरिचमेंट की जरूरत क्यों है? डेमोक्रेट सांसद एड मार्की और जेफ मर्कले ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इस समझौते पर चिंता जताई है. मर्कले ने सवाल उठाया कि अगर सऊदी परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं रखता तो वह घरेलू स्तर पर यूरेनियम एनरिचमेंट और रीप्रोसेसिंग की क्षमता क्यों चाहता है. इसके अलावा वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की ज्यादा कड़ी निगरानी क्यों नहीं स्वीकार करता. यही इस पूरे विवाद की जड़ है. परमाणु बिजली के लिए यूरेनियम एनरिचमेंट और परमाणु हथियार के लिए जरूरी सामग्री बनाने की तकनीक की प्रक्रिया लगभग समान है. हालांकि एनरिचमेंट की क्षमता होना अपने आप में परमाणु बम बना लेना नहीं है.
MBS पहले ही दे चुके हैं बड़ा बयान
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है तो सऊदी अरब भी उसी रास्ते पर जा सकता है. हालांकि उनका यह बयान पुराना है, लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने सांसदों की चिंता बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ ईरान एनरिचमेंट कार्यक्रम को लेकर पहले से पश्चिमी देशों के दबाव में है, जबकि सऊदी अरब अब अमेरिकी सहयोग से अपना नागरिक परमाणु ढांचा खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
पाकिस्तान कनेक्शन भी समझिए
पाकिस्तान पहले से परमाणु हथियार रखने वाला मुस्लिम देश है. हाल में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता भी हुआ है. इस समझौते के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम सऊदी अरब के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण के संदर्भ में देखा गया था. ऐसे में तस्वीर दिलचस्प हो जाती है.