विपक्ष जिन राज्यों में जीत हासिल करता है, वहां उसे चुनाव आयोग की वोट चोरी नजर नहीं आती. चुनाव आयोग अगर वास्तव में वोट चोरी करता या भाजपा के लिए काम करता, जैसा कि विपक्ष आरोप लगाता रहा है, तो हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल और झारखंड में गैर भाजपा सरकारें कैसे बनतीं. लोकसभा में भाजपा को 2019 की 303 सीटों के मुकाबले 2024 में बहुमत से 32 कम 240 सीटें ही क्यों आतीं.
लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों में अपनी दुर्गति का ठीकरा भाजपा विरोधी पार्टियां अब चुनाव आयोग पर फोड़ रही हैं. इसके लिए विरोधी दल पहले इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (EVM) को कसूरवार ठहराते थे. अब चुनाव आयोग उनके निशाने पर है. खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त. चुनाव आयोग ने जब से गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) का काम शुरू किया है, तब से ही मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस अधिक हमलावर हुई है. कांग्रेस के साथ भाजपा विरोधी इंडिया ब्लॉक की सभी पार्टियां इस मुद्दे पर एकजुट दिखती हैं. अब तो उनके साथ आभासी अंदाज में बनी काक्रोच जनता पार्टी (CJP) भी शामिल हो गई है. सीजेपी को अपनी ताकत का इसलिए गुमान है कि वह अपने को जेन Z का प्रतिनिधि मानती है.
पहली दस्तक में ही उसकी उपलब्धि यह रही कि दबाव डाल कर पीएम नरेंद्र मोदी को अपने वरिष्ठ मंत्रिमंडलीय सहयोगी धर्मेंद्र प्रधान का उसने इस्तीफा करा दिया. अब मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के लिए कांग्रेस ने देशव्यापी अभियान छेड़ा है तो सीजेपी उससे एक कद आगे बढ़ कर सीईसी के इस्तीफे के लिए लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है. संयोग यह कि एक ही दिन (24 सितंबर 2026) कांग्रेस और सीजेपी ने सीईसी को इस्तीफा देने की चेतावनी दी.
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी SIR को वोट चोरी का जरिया मानते हैं. बिहार में जब इसकी शुरुआत हुई तो राहुल गांधी ने इसके खिलाफ वोटर जागरूकता यात्रा शुरू की. विपक्षी दलों के नेताओं संग उन्होंने करीब 15 दिनों तक बिहार के जिलों का दौरा किया. हालांकि उनके इस अभियान का कोई असर चुनाव परिणामों पर नहीं दिखा. विपक्ष की करारी हार हुई. उसके बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने SIR के जरिए वोट चोरी का आरोप लगा कर विरोध किया. वहां भी नतीजे उनके खिलाफ गए. ताजा मामला तब सामने आया, जब एक अखबार ने खुलासा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त बाकी आयुक्तों के ऐतराज की अनदेखी कर एकतरफा निर्णय लेते हैं. इसे लेकर 24 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने प्रेस कान्फ्रेंस किया. उन्होंने भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) और मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर बेहद तीखे हमले किए.
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर वोट चोरी का सीधा और गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि देश में लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनावों में ‘वोट चोरी’ की है. 2023 के बाद से हुए सभी चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है. अखबार की खबर और राहुल गांधी के आरोपों के बाद टीएमसी नेता और बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने दोनों राज्यों में हुए चुनावों को रद करने की मांग की है.
इस हलचल के बीच कांग्रेस के साथ अब काक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर दी है. सीजेपी ने भी 24 सितंबर 2026 को ही ज्ञानेश कुमार को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया. सीजेपी ने यह भी कहा कि अगर निर्धारित अवधि में इस्तीफा नहीं होता है तो जंतर-मंतर की तरह देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी. दूसरी विपक्षी पार्टियां भी अपने-अपने स्तर पर आंदोलन की तैयारी में जुट गई हैं. कांग्रेस के साथ बिहार में राजद समर्थकों ने भी जिलों में 25 सितंबर को प्रदर्शन किया. इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेन Z से अपने संवाद के कार्यक्रम कैंसल करने पड़े हैं. कांग्रेस भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय के घेराव की तैयारी में है. दूसरे विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर एकजुट हो गए हैं.
वर्ष 2014 में भाजपा के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद से विपक्ष के निशाने पर ईवीएम हुआ करती थी. इसे लेकर विपक्ष का आरोप था कि ईवीएम से भाजपा वोट चोरी करती है. हालांकि इसे अब तक स्थापित नहीं किया जा सका है कि ईवीएम से वोट चोरी संभव है. इसे ऐसे भी समझ सकते कि कांग्रेस के कार्यकाल में ही ईवीएम से चुनाव कराने की शुरुआत हुई थी. 2014 के चुनाव के वक्त केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की ही सरकार थी. अगर ईवीएम में गड़बड़ी की गुंजाइश रहती तो भाजपा को कैसे बंपर जनादेश मिला. हालांकि अब विपक्षी दलों ने ईवीएम का रोना बंद कर दिया है. अब उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की पहल पर शुरू हुई SIR की प्रकिया में खोट नजर आने लगी है. SIR का मकसद मृत, स्तनांतरित या फर्जी वोटरों को मतदाता सूची स बाहर करना था. बिहार में इसके खिलाफ राहुल के जागरूरकता अभियान के बावजूद गड़बड़ी की कोई शिकायत सामने नहीं आई थी.
आश्चर्य इस बात पर है कि विपक्ष जिन राज्यों में जीत हासिल करता है, वहां उसे चुनाव आयोग की वोट चोरी नजर नहीं आती. चुनाव आयोग अगर वास्तव में वोट चोरी करता या भाजपा के लिए काम करता, जैसा कि विपक्ष आरोप लगाता रहा है, तो हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल और झारखंड में गैर भाजपा सरकारें कैसे बनतीं. मसलन वोट चोरी का आरोप विपक्ष अपनी सुविधा के अनुसार लगाता है. समझने की बात यह भी है कि अगर वोट चोरी होती तो लोकसभा में भाजपा को 2019 की 303 सीटों के मुकाबले 2024 में बहुमत से कम 240 सीटें ही क्यों आतीं. भाजपा को सरकार बनाने के लिए एनडीए के दूसरे दलों पर निर्भर होना पड़ा. उसे सहयोगी दलों के दबाव में काम करने का शौक क्यों चर्राया.