राम मंदिर का पुजारी अयोध्या के राम मंदिर में पुजारी बनने के लिए क्या होना चाहिए योग्यता? कितनी होनी चाहिए उम्र? जानें सब कुछ

राम मंदिर का पुजारी अयोध्या के राम मंदिर में पुजारी बनने के लिए क्या होना चाहिए योग्यता? कितनी होनी चाहिए उम्र? जानें सब कुछ


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Priest eligibility Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में पुजारी बनने के लिए धार्मिक ज्ञान, संस्कृत, वैदिक परंपराओं की समझ और रामानंदी परंपरा के अनुरूप प्रशिक्षण आवश्यक है. शास्त्रीय शिक्षा और सेवा भाव भी महत्वपूर्ण हैं. राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य रामानंद दास के मुताबिक पुजारी के चयन में अभ्यर्थी की शास्त्रीय शिक्षा और संस्कृत की पारंपरिक शिक्षा को देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के लिए आने वाले लोगों की उपाधियां और उनकी धार्मिक शिक्षा की जानकारी देखना जरूरी है. उनके अनुसार, अभ्यर्थी का वैदिक और सनातन परंपरा में विश्वास होना भी महत्वपूर्ण है.उन्होंने बताया कि परंपरागत व्यवस्था के अनुसार पुजारी पद के लिए यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मणों के चयन की बात कही गई है.

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अयोध्या: अयोध्या स्थित राम मंदिर में पुजारी बनना सिर्फ पूजा-पाठ का ज्ञान रखने तक सीमित नहीं है. इसके लिए धार्मिक ज्ञान, संस्कृत और शास्त्रीय शिक्षा के साथ वैदिक परंपराओं की समझ और मंदिर की निर्धारित पूजा-पद्धति के अनुरूप प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माना जाता है. राम मंदिर में पूजा व्यवस्था रामानंदी परंपरा के अनुरूप संचालित होती है. ऐसे में पुजारियों के लिए मंदिर की मर्यादा, आचार-संहिता और निर्धारित परिधान का पालन भी जरूरी होता है. ऐसी स्थिति में चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं आखिर राम मंदिर में पुजारी की नियुक्ति कैसे होती है क्या योग्यता होती है.

धार्मिक और शास्त्रीय शिक्षा पर जोर

राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य रामानंद दास के मुताबिक पुजारी के चयन में अभ्यर्थी की शास्त्रीय शिक्षा और संस्कृत की पारंपरिक शिक्षा को देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के लिए आने वाले लोगों की उपाधियां और उनकी धार्मिक शिक्षा की जानकारी देखना जरूरी है. उनके अनुसार, अभ्यर्थी का वैदिक और सनातन परंपरा में विश्वास होना भी महत्वपूर्ण है.उन्होंने बताया कि परंपरागत व्यवस्था के अनुसार पुजारी पद के लिए यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मणों के चयन की बात कही गई है. अभ्यर्थी के पास कम से कम शास्त्री और बेहतर स्थिति में आचार्य जैसी शास्त्रीय उपाधि होना अपेक्षित बताया गया. इसके साथ वेदों, मंत्रोच्चार, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

पहले 18 से 27 वर्ष थी आयु सीमा

रामानंद दास ने बताया कि पहले पुजारी चयन के लिए 18 से 27 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की गई थी. अभ्यर्थी का उत्तर प्रदेश का निवासी होना भी शर्तों में शामिल था और अयोध्या जनपद के लोगों को विशेष वरीयता देने की बात थी. बाद में इन शर्तों में कुछ शिथिलता बरती गई और योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया गया. राम मंदिर में पुजारियों को चयन के बाद विशेष धार्मिक प्रशिक्षण दिया गया.प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पूजा-पद्धति, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी देने के साथ व्रत कराया गया. उन्हें संध्या और गायत्री मंत्र का उपदेश भी दिया गया.इसके अलावा भगवान श्रीराम की उपासना से जुड़े मंत्र और पूजा की विधि का प्रशिक्षण दिया गया.रामानंद दास के अनुसार पुजारी के लिए सिर्फ धार्मिक उपाधि होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव भी जरूरी है. उनका कहना है कि प्रशिक्षण के जरिए अभ्यर्थियों को मंदिर की पूजा और सेवा के लिए आवश्यक योग्यता के अनुरूप तैयार किया जाता है.

रामानंदी परंपरा के अनुसार पूजा

राम मंदिर में पूजा व्यवस्था रामानंदी परंपरा के अनुरूप होने के कारण पुजारियों को इसी परंपरा की पूजा-पद्धति और मर्यादाओं का पालन करना होता है.पूजा के दौरान निर्धारित परिधान और आचार-संहिता का पालन भी जरूरी है. मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में मंत्रोच्चार, आराधना और अनुष्ठानों को निर्धारित विधि से संपन्न कराने पर विशेष ध्यान दिया जाता है.इस तरह राम मंदिर में पुजारी बनने के लिए धार्मिक और शास्त्रीय शिक्षा, वैदिक परंपरा का ज्ञान, पूजा-पद्धति की समझ, प्रशिक्षण और मंदिर की मर्यादा का पालन महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं.



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