2.75 लाख की तिरुपति बालाजी की पेंटिंग जिस पर चढ़ी है सोने की परत, बनाने में लगे 6 महीने, खरीदनी है तो यहां आएं

2.75 लाख की तिरुपति बालाजी की पेंटिंग जिस पर चढ़ी है सोने की परत, बनाने में लगे 6 महीने, खरीदनी है तो यहां आएं


पटना. ₹2 लाख 75 हजार! यह दाम किसी गाड़ी या किसी दूसरी महंगी चीज की नहीं बल्कि एक पेंटिंग का है. जी हां, पटना के ज्ञान भवन में इन दिनों सरस मेला लगा हुआ है. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर और स्वयं सहायता समूह अपने हाथों से तैयार किए गए खास उत्पाद लेकर पहुंचे हैं. इन्हीं में एक ऐसी पेंटिंग सबका ध्यान खींच रही है, जिसकी कीमत सुनकर ही लोग ठिठक जा रहे हैं. दरअसल, यहां तंजौर कला से तैयार भगवान तिरुपति बालाजी की एक पेंटिंग रखी है. इसकी कीमत करीब 2.75 लाख रुपये है. खास बात यह है कि पेंटिंग पर सोने की परत चढ़ाई गई है और इसे तैयार करने में करीब 6 महीने का समय लगा है.

प्लाई से शुरू होता है पेंटिंग बनाने का काम
शेखपुरा जिले की रहने वाली कृष्णा देवी तंजौर पेंटिंग बनाती हैं. लोकल 18 से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस कला में सबसे पहले प्लाई पर कपड़ा लगाया जाता है. इसके बाद इमली के बीज के पाउडर, अरबी और फेविकोल को मिलाकर उसकी कोटिंग की जाती है. कोटिंग सूखने के बाद इसे समतल किया जाता है. इसके बाद जिस देवी-देवता की आकृति बनानी होती है, उसका स्केच तैयार किया जाता है. डिजाइन को उभार देने के लिए इमली के बीज के पाउडर और अरबी के गोंद से खास तरह की नक्काशी की जाती है. इसके बाद इसमें स्टोन लगाए जाते हैं.

22 कैरेट गोल्ड फॉयल से मिलती है खास चमक
पेंटिंग को खास बनाने वाला अगला काम इसमें सोने की परत चढ़ाना है. कृष्णा देवी बताती हैं कि इसमें 22 कैरेट गोल्ड फॉयल का इस्तेमाल किया जाता है. सोने की फॉयल को छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर पेंटिंग पर चिपकाया जाता है. इसके बाद भगवान की आकृति में रंग भरे जाते हैं. पेंटिंग में इस्तेमाल होने वाले कई रंग प्राकृतिक चीजों से तैयार किए जाते हैं. सब्जियों से मिलने वाले प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है. पूरी पेंटिंग तैयार होने के बाद उस पर शीशा लगाया जाता है और सागवान की लकड़ी का फ्रेम लगाया जाता है.

2.75 लाख रुपये है बालाजी पेंटिंग की कीमत
सरस मेले में रखी भगवान तिरुपति बालाजी की इस खास तंजौर पेंटिंग की कीमत 2 लाख 75 हजार रुपये है. कृष्णा देवी बताती हैं कि इसमें इस्तेमाल होने वाला सोना अलग से वजन के हिसाब से नहीं बेचा जाता, बल्कि पूरी कलाकृति की कीमत उसकी डिजाइन, मेहनत और काम के हिसाब से तय होती है. ये भी बता दें कि इस स्टॉल पर 3500 रुपये से पेंटिंग की शुरुआत होती है.

लॉकडाउन में शुरू किया काम, आज 20 लोगों को दे रहीं रोजगार
कृष्णा देवी ने बताया कि 2016 में जीविका से जुड़ी थीं. उस समय वह अपने पति के साथ चेन्नई में रहती थीं. 2020 में लॉकडाउन के दौरान घर लौटने के बाद उन्होंने तंजौर पेंटिंग बनाने का काम शुरू किया. शुरुआत में घर पर ही पेंटिंग तैयार करती थीं. इसके बाद जीविका कार्यालय से उन्हें सरस मेले में अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला. 2022 से वह सरस मेले में आकर अपने उत्पाद बेच रही हैं. अब वह अपने पति के साथ मिलकर करीब 20 लोगों को इस काम से जोड़कर उन्हें ट्रेनिंग और रोजगार दे रही हैं.

लाख रुपये से शुरू किया था कारोबार
कृष्णा देवी ने बताया कि करीब एक से डेढ़ लाख रुपये की पूंजी से यह काम शुरू किया था. बाद में लोन लेकर कारोबार को आगे बढ़ाया. मेले में पेंटिंग की बिक्री से होने वाली कमाई से वह लोन चुकाती रहीं और कारोबार में दोबारा पैसा लगाती रहीं. आज उनके पास करीब 12-13 लाख रुपये की पूंजी है, जो इस काम से कमाई है.

मेले के अलावा अब उन्हें घर से भी पेंटिंग के ऑर्डर मिलने लगे हैं. तैयार पेंटिंग को कूरियर से भेजा जाता है, जबकि बड़े आकार की पेंटिंग होने पर वह खुद ग्राहक तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं.

पिछले मेले में 6 लाख की बिक्री, इस बार भी उम्मीद
कृष्णा देवी ने बताया कि पिछली बार गांधी मैदान में लगे सरस मेले में करीब 6 लाख रुपये की बिक्री हुई थी. इस बार भी उन्हें अच्छी बिक्री की उम्मीद है. उनका लक्ष्य 6-7 लाख रुपये से ज्यादा की बिक्री का है. अगर आप भी सोने की परत से सजी इस तंजौर पेंटिंग को देखना चाहते हैं, तो पटना के ज्ञान भवन में लगे सरस मेले में पहुंच सकते हैं.



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