Dharm Aastha : पैसे नहीं हैं तो ऐसे करें अपने पितरों का श्राद्ध, दामाद को खाना खिलाकर भी पा सकते हैं मुक्ति, जानें दोनों तरीके

Dharm Aastha : पैसे नहीं हैं तो ऐसे करें अपने पितरों का श्राद्ध, दामाद को खाना खिलाकर भी पा सकते हैं मुक्ति, जानें दोनों तरीके


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पैसे नहीं हैं तो ऐसे करें पितरों का श्राद्ध, हरिद्वार के पंडित से जानिए तरीका

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Pitru Paksha Shraddha : साल 2026 का पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है. 16 दिनों की इस अवधि में पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है. लोग हर साल इस समय का बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन सभी की आर्थिक स्थिति अच्छी हो, ऐसा जरूरी नहीं. ऐसे में पितृ पक्ष का श्राद्ध वे लोग कैसे करें, जिनके सामने दो टाइम के खाने का संकट है. लोकल 18 ने इस बारे में हरिद्वार स्थित प्राचीन नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी से बात की. वे बताते हैं कि ऐसे लोग श्राद्ध की तिथि पर शुद्ध जल से पितरों का स्मरण कर तर्पण कर सकते हैं. बस कुछ बातों का ध्यान रखना होगा.

हरिद्वार. हिंदू धर्म में पितरों के प्रति आस्था और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है. भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाले कुल 16 दिनों की इस अवधि में पितरों का तर्पण, पिंडदान आदि किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार विधि-विधान से किए गए तर्पण से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुल जाता है. हर साल लोग इस समय का बेसब्री से इंतजार करते हैं और अपने पितरों का श्राद्ध कर्म शास्त्रों की विधि अनुसार करते हैं. श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए धन न हो तो पितरों का कल्याण कैसे होगा, इसके लिए भी शास्त्रों में सरल उपाय बताया गया है.

हरिद्वार स्थित प्राचीन नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी लोकल 18 से बताते हैं कि श्राद्ध का संबंध श्रद्धा से है. श्रद्धा भाव से किए गए धार्मिक कार्य सीधे पूर्वजों तक पहुंचाते हैं और पितृ तृप्त होकर अपने लोक चले जाते हैं. पंडित मनोज त्रिपाठी कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति गंभीर आर्थिक तंगी से परेशान है और उसके पास अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करने के लिए धन नहीं हैं तो वह केवल पितरों के श्राद्ध की तिथि पर शुद्ध जल से पितरों का स्मरण कर तर्पण कर सकता है.

हाथ उठाकर करें ये काम

मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर जातक पितृ पक्ष के लिए किसी पवित्र नदी में स्नान करते हुए जल में खड़े होकर सूर्य नारायण के सामने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर सच्चे मन, श्रद्धा से प्रार्थना करें. कहे कि हे सूर्य नारायण भगवान, हे मेरे पितरों इस बार मेरे पास आपके श्राद्ध के लिए धन नहीं है. मेरे पास केवल मेरी सच्ची श्रद्धा और भाव हैं. इन्हें स्वीकार कर मुझे क्षमा करें. अगली बार सामर्थ्य होने पर मैं पूरे विधि-विधान से आपका श्राद्ध करूंगा. मान्यता है कि इस प्रार्थना से पितृ प्रसन्न हो जाएंगे और अपने वंशजों को इतना सामर्थ्य प्रदान करने कि वह अगली बार पूरे उत्साह से श्राद्ध कर सकें. मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि जो लोग नारायणी शिला नहीं आ सकते, वे घर पर ही पितरों का श्राद्ध करें. शास्त्रों में वर्णित आठ पवित्र घटकों में दौहित्र यानी बेटी का बेटा और दामाद प्रमुख हैं. श्राद्ध के दिन अपने दौहित्र को आमंत्रित कर भोजन कराने और दर्शन मात्र से पितृ तृप्त होकर पूर्ण आशीर्वाद देते हैं.



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