वैज्ञानिकों ने चीन में एक अजीबोगरीब जीव के कंकाल की खोज की है. इसकी खोज ने दुनियाभर के पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स को हैरान कर दिया है. यह जीव दो पैरों पर चलता था और देखने में पंखों वाले किसी विशाल भालू जैसा प्रतीत होता था. इसके हाथ में बेहद डरावने और विशालकाय पंजे लगे हुए थे. रिसर्चर्स ने इसे कायरासॉरस चांगलियेंसिस नाम दिया है. यह अर्ली क्रिटेशियस काल का एक थेरिज़िनोसॉर जीव है, जिसका लगभग पूरा कंकाल पश्चिमी लियाओनिंग के यिक्सियन फॉर्मेशन से निकाला गया है. इसकी लंबाई करीब 11.8 फीट दर्ज की गई है, जो इस प्रजाति का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. यह डायनासोर पेड़-पौधे खाता था, लेकिन इसकी शारीरिक बनावट किसी खूंखार शिकारी से कम नहीं दिखती है.
इस डायनासोर का बाहरी हुलिया वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा कौतूहल बना हुआ है. अध्ययन के मुताबिक यह जीव दो पैरों पर सीधा खड़ा होकर चलता था. इसके शरीर पर पंखों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं, जिसकी वजह से यह किसी भारी-भरकम भालू जैसा दिखाई देता था. इसके पेट का हिस्सा मटके की तरह बाहर निकला हुआ था. इसकी लंबी गर्दन और आगे के विशाल पंजे इसे बाकी तमाम जीवों से बिल्कुल अलग बनाते थे.
जेहोल थेरिजिनोसॉरियन का लाइफ-रीकंस्ट्रक्शन, जो अलग-अलग प्रजातियों के बीच शरीर के आकार, कंकाल के अनुपात और अनुमानित पारिस्थितिक रणनीतियों में अंतर को दर्शाता है. (Illustration by Kōhei Futaka. Credit: Journal of Systematic Palaeontology (2026). DOI: 10.1080/14772019.2026.2710287)
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव मांसाहारी नहीं था, बल्कि यह अपने खतरनाक पंजों का इस्तेमाल पेड़ों की ऊंची डालियों को खींचने और पत्तियां तोड़ने के लिए करता था.
77 से ज्यादा दांतों वाला जबड़ा देखकर वैज्ञानिक क्यों चौंक गए?
अपने इलाके का सबसे बड़ा दैत्य कैसे बन गया कायरासॉरस?
यह नया डायनासोर करीब 3.6 मीटर यानी 11.8 फीट से ज्यादा लंबा था. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका वजन 117 किलोग्राम से लेकर 274 किलोग्राम के बीच रहा होगा. चूंकि यह कंकाल पूरी तरह वयस्क नहीं था, इसलिए माना जा रहा है कि पूरी उम्र में इसका वजन और भी ज्यादा रहा होगा. यह जेहोल बायोटा इकोसिस्टम में पाया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा थेरिज़िनोसॉर बन चुका है. इसने पिछले रिकॉर्ड होल्डर बेइपियाओसॉरस को काफी पीछे छोड़ दिया है. यह आकार में अपने पुराने रिश्तेदार से कम से कम 1.6 गुना ज्यादा बड़ा था.
कायरासॉरस चैंगलिएन्सिस (IVPP V 18957) का साइड से दिखने वाला कंकाल का डायग्राम. (Image Credit: Journal of Systematic Palaeontology (2026). DOI: 10.1080/14772019.2026.2710287)
दौड़ने में कमजोर लेकिन चबाने में माहिर था यह जीव
रिसर्च टीम ने बताया कि जेहोल बायोटा के इलाके में रहने वाले थेरिज़िनोसॉर दो अलग-अलग तरीकों से जिंदगी जीते थे. जियानचांगोसॉरस जैसे जीव पतले शरीर वाले थे और वे तेज दौड़ने में माहिर माने जाते थे. वहीं कायरासॉरस और बेइपियाओसॉरस काफी भारी शरीर वाले थे, जिसके कारण वे तेजी से दौड़ नहीं पाते थे. उनके जबड़े की बनावट दिखाती है कि उनकी काटने और चबाने की ताकत बाकी प्रजातियों से कहीं ज्यादा मजबूत थी. वे अपने मजबूत जबड़ों से कठोर से कठोर वनस्पति को आसानी से पीस डालते थे.
पंजे के अजीब उभार ने किस नए रहस्य को जन्म दे दिया?
कायरासॉरस की गर्दन की हड्डियां उसकी पीठ की हड्डियों से काफी ज्यादा लंबी थीं. इसके अलावा इसके हाथ के पंजों पर ऊपर की तरफ उठा हुआ एक अनोखा उभार देखा गया है. पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स का कहना है कि ऐसा उभार आज तक किसी भी थेरिज़िनोसॉर के पंजे पर दर्ज नहीं हुआ था. जीवाश्म में पीछे के पैरों की हड्डियां गायब थीं, जिसके चलते इसके सही वजन और चलने के अंदाज पर अभी कुछ सीमाएं बनी हुई हैं. साथ ही इसकी खोपड़ी काफी दबी हुई अवस्था में मिली है. वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले दिनों में नए जीवाश्म मिलने के बाद ही इस रहस्यमयी शैतान के कई और राज सामने आ सकेंगे.