Canada EU Vs Trump : ‘तुम अपना चरित्र देखो, दुश्मनी नहीं लेकिन हम अपनी रखवाली करेंगे’, कार्नी का ट्रंप पर जोरदार प्रहार

Canada EU Vs Trump : ‘तुम अपना चरित्र देखो, दुश्मनी नहीं लेकिन हम अपनी रखवाली करेंगे’, कार्नी का ट्रंप पर जोरदार प्रहार


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार मिल रही टैरिफ धमकियों से तंग आकर अब उनके पुराने साथी ही उनके खिलाफ एकजुट हो रहे हैं. जिस कनाडा का ट्रंप कभी मजाक उड़ाया करते थे, अब उसी के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उन पर तगड़ा तंज कसा है. कार्नी ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ हाथ मिलाकर ऐसा दांव चला है जिसने ट्रंप की नींद उड़ा दी है. ट्रंप की घबराहट और धमकियों पर चुटकी लेते हुए कार्नी ने साफ कह दिया कि ‘आप दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपना चरित्र देखें, हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है लेकिन हम अपनी रखवाली करना अच्छी तरह जानते हैं’. कार्नी का ये बयान इस बात का सबूत है कि कनाडा अब अमेरिका की प्रेशर वाली नीतियां ट्रंप के चरित्र पर सवाल खड़े कर रही हैं.

मार्क कार्नी ने डोनाल्ड ट्रंप पर कसा तंज

कार्नी ने हाल ही में ट्रंप के बुलींग नीति वाले चरित्र पर सवाल उठाते हुए उन्हें एक तरह से ‘असभ्य’ कह दिया है. उन्होंने कहा है कि कनाडा का मकसद अमेरिका को नीचा दिखाना या उसके खिलाफ ‘सभ्य तौर-तरीकों वाला’ कोई नया ताकतवर प्रतिद्वंद्वी ग्रुप बनाना बिल्कुल नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप को लग रहा है कि कनाडा और यूरोप मिलकर उनके खिलाफ नया मोर्चा बना रहे हैं. लेकिन फ्रांस में यूरोपीय संघ की संसद को संबोधित करते हुए कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने सब कुछ साफ कर दिया. कार्नी ने चुटकी लेते हुए कहा कि कनाडा का मकसद अमेरिका को नीचा दिखाना या ‘बेहतर तौर-तरीकों वाला’ कोई नया विरोधी ग्रुप बनाना नहीं है. बिना नाम लिए ट्रंप की दादागिरी पर कसा गया, कार्नी का ये तंज इतना मजेदार था कि हॉल में मौजूद सभी लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े.

‘किसी देश से बदला लेने की कोशिश नहीं’ : मार्क कार्नी

कनाडा के पीएम ने कहा कि आज की दुनिया में व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और लोकतांत्रिक देशों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है. ऐसे माहौल में हर देश अपनी आजादी, अपने बाजारों और अपने अधिकारों को सुरक्षित रखना चाहता है. कार्नी ने जोर देकर कहा कि जब यूरोप और कनाडा एक साथ आते हैं, तो वो ज्यादा मजबूत और सुरक्षित महसूस करते हैं. ये किसी से बदला लेने की कोशिश नहीं है, बल्कि अपनी संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा करने की एक ठोस तैयारी है.

ट्रंप का भारी-भरकम टैरिफ वाला तगड़ा अल्टीमेटम

डोनाल्ड ट्रंप को जैसे कोई बात कंट्रोल से बाहर जाती दिखती है वो अपना टैरिफ हथियार चला देते हैं. उनकी इन्हीं नीतियों से दोस्त देश तंग आ चुके हैं. जैसे ही यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने का नया प्रस्ताव रखा, ट्रंप बुरी तरह भड़क गए.

उन्होंने तुरंत मीडिया के सामने आकर बयान दिया कि अगर कनाडा और यूरोप का ये समझौता अमेरिका के खिलाफ कोई कदम उठाता है या उसके व्यापारिक हितों को चोट पहुंचाता है तो यूरोप को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी. ट्रंप का मानना है कि इस तरह का कोई भी गठजोड़ अमेरिकी कारोबार और उसकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने सीधा अल्टीमेटम दिया कि अगर नीयत साफ है तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर जरा सा भी बुरा इरादा दिखा तो अमेरिका यूरोप पर ऐसा भारी टैरिफ लगाएगा जैसा पहले कभी नहीं लगा.

क्या सच में संभव है ‘एसोसिएट मेंबरशिप’? ईयू के भीतर ही उठे सवाल

यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कूटनीतिक नजदीकी दिखाने के लिए कनाडा को ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने की बात तो कह दी, लेकिन असलियत ये है कि यूरोपीय संघ के मौजूदा कानूनों में ऐसा कोई पद या औपचारिक सदस्यता है ही नहीं.

यूक्रेन, मोल्दोवा और जॉर्जिया जैसे देशों का ईयू के साथ ‘एसोसिएशन एग्रीमेंट’ जरूर है, लेकिन इसके चक्कर में उन्हें ईयू के कई कड़े कानून अपने यहां लागू करने पड़ते हैं. अब कनाडा जैसा आजाद देश भला ये क्यों चाहेगा कि उस पर किसी दूसरे महाद्वीप के नियम-कानून थोपे जाएं? यही वजह है कि ईयू के अपने ही देशों के बीच इस बात को लेकर हिचकिचाहट दिख रही है. जर्मनी के सरकारी प्रवक्ता ने तो साफ कह दिया कि वे कनाडा से बेहद मजबूत रिश्ते चाहते हैं, लेकिन ‘एसोसिएट मेंबर’ जैसे नए शब्दों पर दोबारा विचार करने की सख्त जरूरत है.

क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर AI तक: किन मोर्चों पर हाथ मिला रहे हैं कनाडा और यूरोप

अमेरिका की ढुलमुल ट्रेड पॉलिसियों और जारी ट्रेड वॉर की वजह से कनाडा और यूरोप अब एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं. लंबे समय से अमेरिका ही कनाडा का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर रहा है, लेकिन ट्रंप के कड़े तेवरों को देखते हुए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अब उस पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं.

इसके लिए कनाडा और ईयू कई अहम क्षेत्रों में एक साथ काम करने जा रहे हैं. कनाडा के पास लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और हाइड्रोजन का बड़ा खजाना है, जिससे वो यूरोप की ऊर्जा जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकता है. इसके अलावा, दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस प्रोडक्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए दौर के मोर्चों पर साझेदारी बढ़ाएंगे. साथ ही, वे AI सुरक्षा के नए ग्लोबल नियम बनाने और युवाओं को पढ़ाई और नौकरी के लिए आसान वीजा सुविधाएं देने पर भी सहमत हुए हैं.

130 अरब यूरो का कारोबार और बीच में खड़ी ‘CETA’ की दीवार

कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत और दोस्ती भले ही तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन इस राह में पुरानी प्रशासनिक और राजनीतिक अड़चनें भी कम नहीं हैं. साल 2017 में दोनों के बीच ‘CETA’ नाम का एक बड़ा फ्री ट्रेड समझौता हुआ था, लेकिन ईयू के 10 सदस्य देशों ने अब तक इसे पूरी तरह हरी झंडी नहीं दी है.

फ्रांस, इटली और पोलैंड जैसे बड़े देशों की संसदों में ये डील आज तक अटकी पड़ी है, जो इस नई साझेदारी के रास्ते में एक बड़ा रोड़ा बन सकती है. इसके बावजूद, दोनों के बीच व्यापार का आंकड़ा काफी मजबूत रहा है. यूरोपीय आयोग के मुताबिक, पिछले साल कनाडा और ईयू के बीच कुल कारोबार करीब 130.8 अरब यूरो तक पहुंच गया. बीते दस सालों में इसमें 80 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया है. यूरोप जहां कनाडा को गाड़ियां, दवाइयां और मशीनरी बेचता है, वहीं कनाडा यूरोप को कच्चा तेल, खाद और धातुएं सप्लाई करता है.

बदलाव की ओर बढ़ती वैश्विक राजनीति

कनाडा और यूरोपीय संघ का ये नया तालमेल दुनिया के बदलते कूटनीतिक और आर्थिक समीकरणों का एक बड़ा उदाहरण है. जहां स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज जैसे नेताओं ने इस नई शुरुआत का स्वागत किया है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे तेवर और ईयू के अपने अंदरूनी नियम इस रास्ते में बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं.

दुनिया ये देख रही है कि कैसे एक वक्त में अमेरिका के सबसे वफादार देश भी अब उसकी धमकियों के आगे झुकने के बजाय अपने विकल्प तलाश रहे हैं. अब ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अटलांटिक महासागर के दोनों पार बसे ये देश अमेरिकी दबाव का मुकाबला कर पाते हैं या ट्रंप का टैरिफ कार्ड इस नई साझेदारी की रफ्तार को धीमा कर देता है.



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