राजधानी दिल्ली में मेट्रो यात्रियों की राह आसान करने और सड़कों पर जाम का दबाव घटाने के लिए एक साथ कई बड़े फैसले लिए गए हैं. दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में बुधवार को हुई UTTIPEC की 70वीं गवर्निंग बॉडी बैठक में छह मेट्रो स्टेशनों के मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन यानी MMI प्लान को मंजूरी दी गई. इसके साथ ही PWD के दो अहम सड़क प्रोजेक्ट्स को भी हरी झंडी मिली है.
इन फैसलों का सीधा असर दिल्ली के उन इलाकों में दिखाई देने की उम्मीद है, जहां मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने, स्टेशन से बाहर निकलने के बाद आगे जाने और सड़क पर बढ़ते ट्रैफिक के कारण लोगों को रोजाना परेशानी होती है. MMI प्लान में मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल के साथ पैदल यात्रियों, साइकिल और अन्य गैर-मोटर चालित परिवहन के लिए सुविधाओं पर जोर दिया जाता है.
इन 6 मेट्रो स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर
UTTIPEC ने जिन छह मेट्रो स्टेशनों के MMI प्लान को मंजूरी दी है, उनमें GTB नगर, सरिता विहार, अक्षरधाम, रोहिणी वेस्ट/डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर और शास्त्री पार्क शामिल हैं.
MMI यानी मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन का मकसद सिर्फ मेट्रो स्टेशन के आसपास सड़क बनाना या ट्रैफिक को व्यवस्थित करना नहीं है. इसके तहत स्टेशन तक आने-जाने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग परिवहन साधनों को एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना बनाई जाती है. इसमें पैदल रास्ते, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, ऑटो-ई-रिक्शा जैसी सेवाओं के लिए जगह, सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था और नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने जैसे पहलू शामिल होते हैं.
यानी आने वाले समय में इन स्टेशनों के आसपास यात्रियों को स्टेशन से सड़क तक पहुंचने में कम परेशानी हो और अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो, इसी दिशा में काम किया जाएगा.
31 में से सभी MMI प्लान को मिली मंजूरी
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी DMRC ने फेज-1 और फेज-2 मेट्रो कॉरिडोर के कुल 31 मेट्रो स्टेशनों के लिए MMI प्लान तैयार किए थे. इन छह योजनाओं की मंजूरी के साथ अब इन सभी 31 MMI प्लान को UTTIPEC की मंजूरी मिल चुकी है.
इसका मतलब है कि अब इन योजनाओं को आगे लागू करने की दिशा में संबंधित एजेंसियां काम कर सकेंगी. UTTIPEC की योजनाओं में पहले भी मेट्रो स्टेशनों के आसपास यातायात, पैदल आवाजाही और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को एक साथ देखने पर जोर दिया जाता रहा है.
5.5 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर, 12 चौराहों से मिलेगी राहत
बैठक में PWD के मां आनंदमयी मार्ग पर करीब 5.5 किलोमीटर लंबे छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई. यह कॉरिडोर आउटर रिंग रोड को मेहरौली-बदरपुर रोड से जोड़ने की योजना का हिस्सा है.
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसके बनने के बाद मां आनंदमयी मार्ग के करीब 12 चौराहों को बायपास किया जा सकेगा. इससे लगातार सिग्नल और चौराहों पर रुकने वाले ट्रैफिक को ऊपर से निकालने में मदद मिलने की उम्मीद है.
इसका सबसे ज्यादा फायदा उन वाहनों को हो सकता है जो ओखला फेज-1 और फेज-2 के औद्योगिक इलाकों की ओर से आते-जाते हैं. इन इलाकों से निकलने वाला भारी ट्रैफिक कई बार आसपास की सड़कों पर दबाव बढ़ाता है. एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्देश्य इसी ट्रैफिक को ज्यादा सुचारू तरीके से निकालना है.
ओखला एस्टेट रोड पर अंडरपास और राउंडअबाउट
ओखला इलाके के लिए भी बैठक में अहम फैसला लिया गया. ओखला एस्टेट रोड पर क्राउन प्लाजा चौराहे के पास अंडरपास और राउंडअबाउट बनाने की योजना को मंजूरी दी गई है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्राउंड लेवल पर ट्रैफिक के दबाव को कम करना है. इसके साथ ही सड़क की सतह पर पैदल यात्रियों और नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की गुंजाइश बढ़ेगी.
यानी एक तरफ वाहनों को ज्यादा सुचारू रास्ता देने की कोशिश होगी, तो दूसरी तरफ सड़क पर पैदल चलने वालों और साइकिल जैसे गैर-मोटर चालित साधनों के लिए भी जगह बेहतर करने का लक्ष्य है.
मुकरबा चौक का जाम भी होगा कम?
दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल मुकरबा चौक को डी-कंजेस्ट करने के लिए भी एक बड़ी योजना को मंजूरी मिली है. प्रस्ताव के तहत आउटर रिंग रोड पर मौजूद रोड ओवर ब्रिज यानी ROB को छह लेन से बढ़ाकर 10 लेन किया जाएगा. इसके अलावा जहांगीरपुरी इंडस्ट्रियल एरिया को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने के लिए दिल्ली-सोनीपत रेलवे लाइन के ऊपर चार लेन का नया ROB बनाने की योजना है.
PWD के मुताबिक, नया कनेक्शन तैयार होने के बाद मुकरबा चौक से गुजरने वाले करीब 20 फीसदी वाहन ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्ते पर डायवर्ट करने में मदद मिल सकती है. इससे मुकरबा चौक के साथ-साथ NH-44 पर भी ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है.
इन परियोजनाओं की सफलता के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल अहम होगा. बैठक में DDA, दिल्ली सरकार, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, DMRC, PWD, MCD, NDMC, भारतीय रेलवे और NCRTC समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.