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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच दरारें गहरी होती दिख रही हैं. सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों के बीच खाई गहरी होती जा रही है. पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पश्चिमी यूपी में सियासी माहौल गरमा गया है. जानिए इमरान मसूद और इकरा हसन के तीखे बयानों से लेकर मुस्लिम वोटबैंक पर छिड़ी जंग की पूरी कहानी.
दिल्ली. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय बाकी है, लेकिन इंडिया गठबंधन के दो बड़े घटक दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच अंदरखाने शह-मात का खेल शुरू हो चुका है. बुधवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मुजफ्फरनगर के कद्दावर नेता व पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने समर्थकों संग कांग्रेस का हाथ थाम लिया. आजाद समाज पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए इस कद्दावर मुस्लिम परिवार के कदम को पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के ‘मुस्लिम री-कनेक्ट’ अभियान की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. हालांकि, इस घटनाक्रम ने सपा के कोर मुस्लिम वोटबैंक में सेंधमारी और सीटों के बंटवारे को लेकर गठबंधन के अंदर सुगबुगाहट तेज कर दी है.
2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के PDA पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले को मुस्लिम समाज का एकतरफा समर्थन मिला था. लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अब यूपी में केवल छोटे भाई की भूमिका में रहने को तैयार नहीं दिखती. लोकसभा में 6 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना चाहती है. वह खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रोहिलखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने पुराने दबदबे को पुनर्जीवित कर रही है और अब बड़ा भाई बनना चाहती है.
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