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Dhirendra Shastris Statements Lord Krishna: मथुरा में कथावाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के विवादित बयान पर आक्रोश बढ़ गया है. कृष्ण के वंशजों और यादव महासभा ने उनकी वृंदावन कथा का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है. कथा प्रवक्ता धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा में आक्रोश व्याप्त है. इसी को लेकर संगठन की ओर से स्थानीय होटल में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने कथित टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए इसे यादव समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय बताया.
मथुरा: कथा वाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के विवादित ब्यान से कृष्ण की नगरी के लोगों में आक्रोश पनप रहा है. कान्हा की नगरी के लोगों के बाद अब कृष्ण के वंशज भी अब मैदान में उतर आये हैं. कृष्ण के वंशज होने के नाते धीरेन्द्र शास्त्री को चेतावनी भी दी है. उन्होंने कहा है कि धीरेन्द्र शास्त्री को बृज के 84 कोस में घुसने नहीं दिया जायेगा. वहीं वृन्दावन में होने वाली कथा नहीं होने दी जाएगी.
वृन्दावन में होनी वाली धीरेन्द्र शास्त्री की कथा का करेंगे बहिष्कार
कथा प्रवक्ता धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा में आक्रोश व्याप्त है. इसी को लेकर संगठन की ओर से स्थानीय होटल में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने कथित टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए इसे यादव समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय बताया. बैठक में संगठन के जिला अध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्नी समय-समय पर विवादित बयान देते रहते हैं. उन्होंने कहा कि वृंदावन में भी कुछ लोग उनके बयानों का बचाव कर रहे हैं, जबकि उनके तथा उनके ओर से पूर्व में भी भगवान श्रीकृष्ण और यादव समाज को लेकर विभिन्न प्रकार की बातें की जाती रही हैं.
हिंदुओं के बीच आपसी वैमनस्य पैदा करते हैं ऐसे कथावाचक, लगनी चाहिए लगाम
लोकल 18 से बात करते हुए संजय यादव, नीतू यादव और सोनू यादव ने कहा कि एक ओर कुछ लोग हिंदू समाज को एकजुट करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयान जातिवाद को बढ़ावा देने और हिंदुओं के बीच आपसी वैमनस्य पैदा करने का काम करते हैं. यादव समाज इस प्रकार की टिप्पणियों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनाने वाले कुछ लोग उन्हीं के चरित्र पर सवाल उठाने वालों का समर्थन करते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे लोगों को आत्ममंथन करना चाहिए और धार्मिक मंचों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. जिला अध्यक्ष ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि धार्मिक ट्रस्टों को प्राप्त होने वाली धनराशि की जांच होनी चाहिए. यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ट्रस्टों की आय का उपयोग किन सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों में किया जा रहा है.