कभी चांदनीचौक के टाउनहॉल से चलती थी दिल्ली की ‘सरकार’, अब दरकने लगी 160 साल पुरानी ये इमारत

कभी चांदनीचौक के टाउनहॉल से चलती थी दिल्ली की ‘सरकार’, अब दरकने लगी 160 साल पुरानी ये इमारत


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कभी चांदनीचौक के टाउनहॉल से चलती थी दिल्ली की ‘सरकार’, अब दरकने लगी इमारत

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चांदनीचौक में टाउनहॉल दरकने लगा है. कभी 160 साल पुरानी इसी इमारत में एमसीडी का मुख्यालय हुआ करता था. उससे पहले मुगलों के दौर में यहां एक सराय हुआ करती थी, जहां दूर दराज से आने वाले व्यापारी आकर ठहरा करते थे.

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चांदनी चौक का टाउनहॉल जो अब दरक रहा है. (फाइल फोटो-PTI)

दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल की जिस इमारत का एक हिस्सा गिरा है, कभी वहीं से दिल्ली की शहरी सरकार चलती थी. 160 साल पुरानी ये ब्रिटिश कालीन इमारत में ही लंबे समय में दिल्ली नगर निगम यानी MCD का मुख्यालय रहा है. 2009 में इसे ट्रांसफर होने के बाद से इमारत को सिर्फ निगम चुनाव की ईवीएम रखने के काम लाया जा रहा था. खास बात ये है कि अंग्रेजों के हाथ आने से पहले टाउन हॉल की जगह एक मुगलकालीन सराय थी, यहां दूर दराज से दिल्ली आने वाले व्यापारी रुका करते थे.

टाउनहॉल की ये इमारत दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों में से एक है. सितंबर में ही इसे ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए एक समझौते पर साइन किए गए थे. दिल्ली सचिवालय में पर्यटन विभाग की नोडल एजेंसी दिल्ली पर्यटन एवं पिरवहन विकास निगम DTTDC और एमसीडी के बीच हुए इस समझौते के दौरान सीएम रेखा गुप्ता, पर्यटन मंत्री मपिल मिश्रा भी मौजूद रहे थे. इस दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने टाउन हॉल को दिल्ली के इतिहास और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था.

जहां पर टाउन हॉल बना है वहां कभी मुगल बादशाह शाहजहां की बड़ी बेटी जहांआरा बेगम की सराय और बाग हुआ करता था. उस समय मुगलिया राजधानी में जो भी व्यापारी आते थे वे इसी सराय में आराम करते थे. 1857 में जब स्वतंत्रता संग्राम का आगाज हुआ और मुगलिया शासन का औपचारिक तौर पर अंत हो गया तो सराय पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था. इसके बाद यहां से सराय को गिराकर एक नई इमारत बनाई गई थी, जहां लॉरेंस इंस्टीट्यूट चलता था. इतिहासकार स्वप्ना लिडल की किताब चांदनी चौक: द मुगल सिटी ऑफ ओल्ड दिल्ली के मुताबिक लॉरेंस इंस्टीट्यूट में एक संग्रहालय, रीडिंग रूम और लाइब्रेरी भी थी. निर्माण विक्टोरियन शैली में कराया गया था.

इमारत पर 1866 में नगर निकाय का कब्जा हुआ. इसके बाद से यहां एमसीडी का मुख्यालय चल रहा था. यहीं पर कभी एमसीडी की पहली बैठक हुई थी. नई शहरी नीतियों और विकास परियोजनाओं पर इसी टाउनहॉल की ऐतिहासिक इमारत पर मुहर लगी थी. साल 2010 में मुख्यालय को डॉ. एसपी मुखर्जी सिविक सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद से परिसर का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा था.

हाल ही में जो एमओयू साइन हुआ था उसमें इसे ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के तौर पर विकसित करने पर सहमति बनी थी, ताकि दिल्ली आने वाले पर्यटकों को पुरानी दिल्ली के इतिहास, संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र होगा. इस समझौते के मुताबिक 12,180 वर्ग मीटर में फैले इस परिसर का मालिकाना हक एमसीडी के पास ही रहना था.

टाउनहॉल के ठीक सामने एक घंटाघर हुआ करता था. इसकी ऊंचाई तकरीबन 130 फीट ऊंची बताई जाती है. हालांकि देखभाल के अभाव में 1950 में यह घंटाघर गिर गया था. इतिहासकारों के मुताबिक आजादी के समय लाल किले के अलावा दिल्ली में घंटाघर ही ऐसी दूसरी ऊंची इमारत थी जहां तिरंगा फहराया गया था.

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