1624 KM एक्सप्रेसवे, 27 औद्योगिक क्लस्टर और 6 डिफेंस नोड्स, UP की इकोनॉमी को रफ्तार

1624 KM एक्सप्रेसवे, 27 औद्योगिक क्लस्टर और 6 डिफेंस नोड्स, UP की इकोनॉमी को रफ्तार


UP Industrial and Defence Corridor: आम तौर पर किसी भी एक्सप्रेसवे की सफलता को इस बात से मापा जाता है कि उसने कितने किलोमीटर की दूरी तय की और सफर के दौरान यात्रियों के कितने मिनट बचाए. लेकिन किसी भी आधुनिक बुनियादी ढांचे का वास्तविक मूल्य इस बात में निहित होता है कि वह जमीन पर किन नए और बड़े अवसरों को जन्म देता है. ऐसे कारखाने जो बाजारों तक अधिक कुशलता से पहुंच सकें, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जो निश्चितता के साथ सामानों की आवाजाही सुनिश्चित कर सकें, स्थापित शहरी केंद्रों से परे नए निवेश और लोगों के घरों के पास रोजगार के अवसर यही असली तरक्की है. उत्तर प्रदेश के लिए बुनियादी ढांचे के नेतृत्व वाले विकास का अगला चरण कनेक्टिविटी को सीधी आर्थिक प्रतिस्पर्धा में बदलने का है.

विशाल एक्सप्रेसवे नेटवर्क और बदलती आर्थिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में देश का सबसे बड़ा और मजबूत एक्सप्रेसवे प्लेटफॉर्म तैयार किया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्तमान में पांच प्रमुख परिचालन (operational) एक्सप्रेसवे हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 1,624 किलोमीटर है. इनमें 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे, 302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, 341 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और 91 किलोमीटर लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं. इन महामार्गों ने राज्य के एक बड़े हिस्से को सुगम यातायात से जोड़ा है.

यूपी का डिफेंस कॉरिडेर

इसके अलावा, लगभग 983 किलोमीटर की कुल लंबाई वाले नौ अतिरिक्त एक्सप्रेसवे प्रस्तावित किए गए हैं, जिन पर तेजी से काम चल रहा है. इन प्रस्तावित परियोजनाओं में चित्रकूट लिंक, फर्रुखाबाद लिंक, आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक, झांसी लिंक, जेवर लिंक, मेरठ-हरिद्वार लिंक, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक और नोएडा-जेवर लिंक शामिल हैं. चालू नेटवर्क और प्रस्तावित पाइपलाइन दोनों मिलकर उच्च गति वाली कनेक्टिविटी के एक बड़े विस्तार को दर्शाते हैं, जिसका स्पष्ट उद्देश्य राज्य के 42 जिलों यानी लगभग 56 प्रतिशत जिलों तक इस आधुनिक पहुंच को पहुंचाना है.

27 इंटीग्रेटेड क्लस्टर्स से गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचेगा उद्योग

शहरी महानगरों से बाहर निकलकर संगठित उद्योगों को छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों तक ले जाने की सोच के साथ ही UPEIDA के 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLCs) के कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. 26 जिलों में फैले इन क्लस्टर्स के लिए लगभग 12,700 एकड़ भूमि का बैंक नियोजित किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स उद्यमों को आकर्षित करना, बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा करना और राज्य में अधिक संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है.

कानपुर, झांसी और लखनऊ बन रहा है देश का डिफेंस हब.

आईएमएलसी (IMLC) मॉडल इस बात को अच्छी तरह समझता है कि एक औद्योगिक स्थल पर निवेशकों को सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम चाहिए. निवेशकों को भरोसेमंद बिजली और पानी, चौड़ी आंतरिक सड़कें, आधुनिक जल निकासी, अग्निशमन और सुरक्षा सेवाएं, रेल व हवाई अड्डों तक पहुंच तथा आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के साथ कुशल लिंकेज की आवश्यकता होती है. इन क्लस्टर्स में 24 से 30 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें, समर्पित बिजली सब-स्टेशन, ओवरहेड टैंक के माध्यम से जल आपूर्ति, समर्पित फायर स्टेशन, स्टॉर्म-वाटर ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और हरित क्षेत्र जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

डिफेंस कॉरिडोर से मजबूत होगी देश की ताकत

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक विकास में एक नया और सामरिक आयाम जोड़ रहा है. वर्ष 2018 में घोषित इस महत्वाकांक्षी गलियारे को छह प्रमुख नोड्स अलीगढ़, आगरा, झांसी, चित्रकूट, कानपुर और लखनऊ में विकसित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में एक एकीकृत रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है.

इस डिफेंस कॉरिडोर के तहत अब तक 67 कंपनियों को 2,854 एकड़ भूमि का आवंटन किया जा चुका है, जिनमें से 10 इकाइयां पूरी तरह से परिचालन में आ चुकी हैं. इनसे लगभग 13,906 करोड़ रुपये के भारी निवेश और 16,129 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है. इस क्षेत्र में अब तक 196 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. निवेश पाइपलाइन में मिसाइल और गोला-बारूद, एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग, मानवरहित हवाई वाहन (UAV) और ड्रोन, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत सामग्री और विशेष मिश्र धातु, बैलिस्टिक सुरक्षा प्रणाली, तकनीकी वस्त्र और रक्षा सुरक्षा उपकरण शामिल हैं.

कोई भी औद्योगिक गलियारा तब और अधिक प्रतिस्पर्धी बनता है जब वह ऐसी क्षमताओं को विकसित करता है जिनकी नकल करना आसान न हो. इसलिए अनुसंधान, परीक्षण, वैरिफिकेशन और सर्टिफिकेशन उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी कि भूमि और बुनियादी ढांचा. इस दिशा में आईआईटी कानपुर की रक्षा और ड्रोन पहल, आईआईटी बीएचयू का उन्नत सामग्री और सटीक इंजीनियरिंग में अनुसंधान सहयोग, तथा आईआईटी कानपुर टेक्नोपार्क का अंतरिक्ष और संचार तकनीक में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. इसके अलावा कानपुर में यूएवी टेस्टिंग फैसिलिटी और कम्यूनिकेशन डिफेंस टेस्टिंग फैसिलिटी तथा लखनऊ में एडवांस्ड मैटेरियल्स डिफेंस टेस्टिंग फैसिलिटी विकसित की गई हैं.

पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग में भारी उछाल देखने को मिलेगा. (AI Image)

एक्सप्रेसवे की पहुंच बढ़ेगी

किसी भी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वास्तविक प्रतिस्पर्धा इस बात पर निर्भर करती है कि सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की कुल लागत और विश्वसनीयता कितनी बेहतर है. इसलिए एक्सप्रेसवे की पहुंच को रेलवे नेटवर्क, हवाई अड्डों, फ्रेट कॉरिडोर, वेयरहाउस और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स के साथ जोड़ना अनिवार्य है. इसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों को उनके कच्चे माल और तैयार उत्पादों को कम लागत में सही समय पर गंतव्य तक पहुंचाने में मदद करना है.

भविष्य के औद्योगिक निवेश में इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य तकनीकी रूप से उन्नत गतिविधियां शामिल होंगी. इन सभी की जरूरतें एक जैसी नहीं होती हैं. उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत आपूर्तिकर्ता नेटवर्क और कुशल टेक्नीशियनों की आवश्यकता होती है, जबकि डेटा सेंटर्स को निरंतर बिजली, मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी और जल प्रबंधन की जरूरत होती है. एआई उद्यमों के लिए उच्च कंप्यूटिंग क्षमता और अनुसंधान लिंकेज जरूरी हैं. इसलिए इंडस्ट्रियल प्लानिंग में हर सेक्टर के अनुकूल बुनियादी ढांचा मुहैया कराया जा रहा है.

पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग में भी भारी उछाल

तकनीक का लाभ केवल नए जमाने के क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. डिजिटल उपकरणों की मदद से पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग में भी इन्वेंट्री प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और ऊर्जा दक्षता को सुधारा जा सकता है. जब इन आधुनिक क्षमताओं को छोटे उद्योगों और एमएसएमई (MSMEs) तक पहुंचाया जाता है, तो पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम की उत्पादकता में जबरदस्त सुधार होता है.



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