Vande Bharat sleeper : बिना इंजन के दौड़ती है वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, फिर भी 52 सेकंड में 100 की रफ्तार

Vande Bharat sleeper : बिना इंजन के दौड़ती है वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, फिर भी 52 सेकंड में 100 की रफ्तार


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Vande Bharat sleeper Train : भारतीय रेल का स्वरूप जितना पिछले 10-12 साल में बदला है, उतना तो एक सदी में भी नहीं बदलाव नहीं आया था. खासकर वंदे भारत ट्रेन ने तो भारतीय यात्रियों के लिए रेल सफर के मायने ही बदल दिए हैं. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जब से ट्रैक पर आई है, यात्री इसके फीचर और सुविधाओं के कायल हो गए हैं. यह ट्रेन कई मायनों में काफी खास है और उसमें भी सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कोई इंजन नहीं इंजन नहीं लगाया गया है.

अभी तक आपने जितनी भी ट्रेनें देखी होंगी, सभी में आगे और पीछे भारी-भरकम इंजन लगा होता है. कुछ में डीजल इंजन होता है तो ज्यादातर ट्रेनों में अब बिजली वाले इंजन लगे हुए हैं. लेकिन, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कोई भी इंजन नहीं लगा हुआ है. ड्राइवर यानी लोको पायलट के लिए बस एक केबिन बना हुआ है, जहां से वह ट्रेन को कंट्रोल करता है लेकिन इसमें कोई इंजन नहीं लगाया गया है. फिर भी यह ट्रेन महज 52 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में इंजन की जगह मोटर लगाए गए हैं. यह मोटर ट्रेन की बोगियों में फिट होते हैं और सभी मोटर से एकसाथ पॉवर जेनरेट होकर ट्रेन को आगे खींचती है. 392 टन की इस ट्रेन के हर दूसरे डिब्बे में नीचे की ओर इंजन फिट किया गया है. मसलन, ट्रेन में 16 डिब्बे लगे हैं तो इसमें से 8 में मोटर फिट है. हर बोगी में 4 मोटर लगाई गई है, जिसका मतलब है कि ट्रेन में कुल 32 मोटर लगाई गई हैं. इसका मतलब है कि यह ट्रेन एक भारी इंजन के बजाय 32 छोटी-छोटी मोटर पर चलता है. यह मोटर मिलकर 12,870 हार्स पॉवर की ताकत जेनरेट करती हैं.

ट्रेन को पॉवर देने के लिए सबसे आगे ड्राइवर वाली केबिन के ऊपर पैंट्रोग्राफ लगा है जो बिजली के तार से जुड़कर 25 हजार वोल्ट का करंट लेकर डिब्बे के नीचे लगे ट्रांसफॉर्मर में भेजता है. यहां लगे कंवर्टर इसे डीसी बिजली में बदलकर कोच में लगे मोटर तक कम वोल्टेज का पॉवर सप्लाई करते हैं. 2 पहियों के बीच लगी कपलिंग और गीयर बॉक्स के जरिये ट्रेन के कई पहियों मोटर से एकसाथ पॉवर मिलती है और महज 52 सेकंड में यह ट्रेन 100 की रफ्तार पकड़ लेती है.

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वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सबसे खास बात ये भी है कि 180 किलोमीटर की फुल स्पीड में भी गिलास में भरा पानी बिलकुल नहीं छलकता है. इन झटकों को सोखने के लिए ट्रेन के नीचे लगे स्टील स्प्रिंग और डैम्पर लगे हुए हैं. इसके अलावा सभी डिब्बों को हवा से भरे एयर स्पिंग पर रखा गया है, जो नीचे लगे प्लेटफॉर्म पर स्थिर रहता है. इस तरह, झटकों को सोखने के लिए दोहरी व्यवस्था बनी हुई है. यही वजह है कि इस ट्रेन में रफ्तार होने के बावजूद अंदर झटकों का आभास बिलकुल भी नहीं होता है.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बिजली खाती ही नहीं, बनाती भी है. ट्रेन को रोकने के लिए जब ब्रेक लगाई जाती है तो बोगियों में लगी मोटरें ट्रांसफॉर्मर का काम करने लगती हैं और इस बिजली को वापस तारों के जरिये भेज देती है. घने कोहरे में भी यह ट्रेन पूरी सुरक्षा के साथ चलती है, क्योंकि इसमें लगा कवच सिस्टम आसपास की पटिरयों और रेलवे की अन्य चीजों को पहचानकर ट्रेन की स्थिति को बनाए रखता है. अगर कोई खतरा आने पर चालक ब्रेक नहीं लगाता तो कवच सिस्टम खुद ही ब्रेक लगा देता है. कवच सिस्टम जीपीएस से कनेक्ट होता है जो रूट और मैप को भी आसानी से पहचान लेता है.

अब बात करते हैं इसके कोच की. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच के दरवाजों में ऐसे ग्लास लगे हैं, जिसे पैसेंजर जब चाहें एक बटन दबाकर उसके ट्रांसपैरेंट प्रॉपर्टी को बंद कर सकते हैं. मतलब कि अब बोगी के बाहर से अंदर कोई नहीं देख सकता है और प्राइवेसी पूरी तरह मेंटेन रहेगी. इस बोगी में हर यात्री के लिए रीडिंग लाइट, चार्जिंग प्वाइंट, टेबल होल्डर, वॉटर बॉटल होल्डर, मिरर और विंडो ब्लाइंडर्स लगे हैं. बर्थ का रंग भी ज्यादा सुंदर बनाया गया है और इसका कुशन भी किसी सोफे जैसा है.

ट्रेन में फर्स्ट एसी के कुल 24 बर्थ हैं, तो सेकंड एसी वाले 188 बर्थ बनाए गए हैं. थर्ड एसी के लिए 611 बर्थ बनी हैं. सभी कोच में सीसीटीवी कैमरा, ऑटोमेटिक डोर, फायर डिटेक्शन, सस्पेंशन सिस्टम, इमरजेंसी में ड्राइवर से बात करने का सिस्टम, मॉर्डन टॉयलेट और शोर को खत्म करने का सिस्टम लगा हुआ है. इसके थर्ड एसी वाले डिब्बे में गेट और बर्थ के बीच में ठीकठाक गैप रखा गया है, ताकि बार-बार दरवाजे खोलने पर यात्रियों को सोने में दिक्क्त न हो. अभी तक सामान्य ट्रेनों की थर्ड एसी कोच में यह बड़ी समस्या रहती थी.

आईआरसीटीसी ने वंदे भारत स्लीपर कोच में काम करने वाले कर्मचारियों का ड्रेस कोड भी बदल दिया है. इसके कैटरिंग और किचन स्टाफ के लिए हल्के खाकी रंग की शर्ट, पैंट, वेस्टकोट यानी जैकेट, एप्रेन और कैप का सेट रखा गया है. सफाई करने वालों की ड्रेस हल्की खाकी कलर की रखी गई है. कुछ डिविजन में काले रंग की पोलो टी-शर्ट, काला ट्राससर और काले रंग का ही हाफ एप्रेन रखा गया है. नई ड्रेस से वंदे भारत स्लीर ट्रेन का लुक और उसमें काम करने वाले लोगों का लुक दोनों ही एकदम बदले नजर आते हैं.



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