एक खेत से 4 फसलों की कमाई! बहराइच के किसान त्रिलोकी का अनोखा मॉडल

एक खेत से 4 फसलों की कमाई! बहराइच के किसान त्रिलोकी का अनोखा मॉडल


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केले की खेती के साथ तिल, शिमला मिर्च और धनिया, ऐसे बढ़ा रहे मुनाफा

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खेती में मुनाफा बढ़ाने के लिए किसान अब एक ही खेत से कई फसलें लेने के तरीके अपना रहे हैं. बहराइच के मिर्जापुर गांव के युवा किसान त्रिलोकी ने केले की खेती के साथ सह-फसली खेती का मॉडल तैयार किया है. वे केले के पौधों के बीच खाली पड़ी जमीन पर तिल, शिमला मिर्च और धनिया उगाते हैं. किसान का दावा है कि इन तीन फसलों से केले की खेती की लागत निकल जाती है और केले की बिक्री से होने वाली रकम बचत के रूप में मिलती है.

बहराइच के मिर्जापुर गांव के युवा किसान त्रिलोकी ने केले के बागान की खाली जमीन का इस्तेमाल करके अतिरिक्त कमाई का तरीका निकाला है. आमतौर पर केले के पौधों के बड़े होने तक उनके बीच की जमीन खाली रहती है. त्रिलोकी इसी जगह पर दूसरी फसलें उगाते हैं, ताकि एक ही खेत से अलग-अलग समय पर आमदनी हो सके.

किसान त्रिलोकी के मुताबिक, खेत की उर्वरता बढ़ाने के लिए किसान आमतौर पर ढैंचा बोते हैं, लेकिन इसे सड़कर मिट्टी में मिलने में ज्यादा समय लगता है. उन्हें एक सप्ताह के भीतर शिमला मिर्च की रोपाई करनी थी, इसलिए उन्होंने तिल की बुवाई की. तिल की हरी फसल को खेत में जोतकर मिलाने से मिट्टी को प्राकृतिक पोषण मिलता है. वहीं, फसल को पकने देने पर इसके बीज और तेल को बाजार में बेचा जा सकता है.

किसान ने केले के बागान में तीन अतिरिक्त फसलें लेने का चक्र तैयार किया है. सबसे पहले तिल की बुवाई की जाती है. इसके बाद खेत की जुताई करके शिमला मिर्च की रोपाई की जाएगी. शिमला मिर्च की पैदावार और बिक्री मार्च-अप्रैल तक चलेगी. इसके बाद खाली जगह में पत्तीदार हरी धनिया की बुवाई की जाएगी.

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त्रिलोकी के पास पांच बीघे में सब्जी वाले केले का बागान है. किसान के मुताबिक, एक बीघे से लगभग 30 से 35 क्विंटल केले का उत्पादन होता है. इस हिसाब से पांच बीघे में करीब 150 क्विंटल केले की पैदावार मिलती है.

किसान ने बताया कि बाजार में सब्जी वाले केले का औसत भाव करीब 15 रुपये प्रति किलोग्राम मिल जाता है. उनके अनुसार, केले की खेती के बीच में उगाई जाने वाली तिल, शिमला मिर्च और धनिया की फसल से खाद, पानी और जुताई का खर्च निकल जाता है. इसके बाद केले की बिक्री से मिलने वाली रकम बचत के रूप में रहती है.

त्रिलोकी का कहना है कि केले के बागान में खाली जगह का इस्तेमाल करके दूसरी मौसमी फसलें उगाई जा सकती हैं. किसान तिल, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलों को अपनी जरूरत और मौसम के हिसाब से चुन सकते हैं. इससे एक ही खेत से अलग-अलग फसलों के जरिए आमदनी का अवसर मिल सकता है.



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