राहुल की रैली से गायब रहे MP के 60 नेता, शादी से लेकर बीमारी तक बताई वजह
Agency:एजेंसियां
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राहुल गांधी की दिल्ली रैली में नहीं पहुंचने पर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. लेकिन इन नेताओं की गैरमौजूदगी के पीछे कई पारिवारिक और निजी वजहें थीं. किसी की बहन की शादी थी तो किसी के घर 12 साल बाद भतीजे का जन्म हुआ था. एक नेता के चाचा का निधन हो गया था. कुछ पदाधिकारी बीमारी के कारण दिल्ली नहीं जा सके. अब निलंबित नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई कर दी. वहीं युवा कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि गैरहाजिरी की जानकारी नहीं देने वालों पर ही कार्रवाई हुई है.
राहुल गांधी की दिल्ली रैली में नहीं पहुंचने पर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी सस्पेंड. (फोटो PTI)
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इन दिनों ‘वोट चोरी’, SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान चला रखा है. 1 नवंबर को इसी को लेकर विपक्ष की रैली रामलीला मैदान में आयोजित की गई थी. देश के कोने-कोने से विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कांग्रेस के कार्यकर्ता भी पहुंचे थे. वहीं मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी रैली में नदारद थे. इनमें जिला अध्यक्ष से लेकर महासचिव और सचिव तक शामिल थे. इसके बाद क्या था. कांग्रेस ने इनके ना आने कारण पूछने से पहले इन सबको सस्पेंड कर दिया. लेकिन इन नेताओं का कहना है कि वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम से बचने के लिए नहीं बैठे थे. किसी के घर में बहन की शादी थी तो किसी के परिवार में 12 साल बाद भतीजे का जन्म हुआ था. एक नेता के चाचा का निधन हो गया तो कुछ पदाधिकारी बुखार और खराब तबीयत के कारण दिल्ली नहीं पहुंच सके. अब इन नेताओं का सवाल है कि क्या पार्टी में पारिवारिक जिम्मेदारियों और बीमारी की कोई जगह नहीं है? क्या कार्रवाई करने से पहले उनकी बात नहीं सुनी जानी चाहिए थी? इसी को लेकर युवा कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आने लगी है.
यह पूरा मामला 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की रैली से जुड़ा है. इस रैली को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संबोधित किया था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी दलों के इस शक्ति प्रदर्शन में मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की थी. युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश के पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी को संगठनात्मक अनुशासनहीनता माना. इसके बाद 3 नवंबर को 60 नेताओं के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया. आदेश के मुताबिक कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू है और अगले आदेश तक जारी रहेगी. हालांकि निलंबित नेताओं का दावा है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया.
निलंबन का आदेश.
60 पदाधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
युवा कांग्रेस ने जिन 60 पदाधिकारियों को निलंबित किया है उनमें 9 जिला अध्यक्ष शामिल हैं. इनके अलावा 5 उपाध्यक्ष और 14 महासचिव भी कार्रवाई की जद में आए हैं. संगठन ने 32 सचिवों को भी सस्पेंड किया है. यह कार्रवाई मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के उन पदाधिकारियों पर हुई है जो दिल्ली में हुई रैली में शामिल नहीं हुए थे. संगठन की ओर से इसे अनुशासन का मामला बताया गया है. वहीं निलंबित नेताओं का कहना है कि बिना उनका पक्ष सुने इतनी बड़ी कार्रवाई करना ठीक नहीं है. कुछ नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही प्रदेश नेतृत्व को अपनी मजबूरी बता दी थी. अब वे फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रहे हैं.
12 साल बाद घर में आया बेटा तो नहीं पहुंचे दिल्ली
- मैहर जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने बताया कि उनके बड़े भाई के घर बेटे का जन्म हुआ था. परिवार में 12 साल बाद बच्चे का जन्म हुआ था. ऐसे में उनके लिए उस मौके पर घर पर रहना जरूरी था. शर्मा के मुताबिक उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों को इसकी जानकारी भी दी थी.
- उन्होंने कहा, ‘मेरे बड़े भाई के घर बेटा हुआ था. इसको लेकर घर में कार्यक्रम था. मैंने प्रदेश अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी. निमंत्रण भी दिया था. बाद में मुझे इस रैली के बारे में बताया गया. 12 साल बाद मेरे भाई के घर बेटा हुआ था. मैं उस मौके को छोड़कर नहीं जा सकता था.’
- सौरभ शर्मा ने यह भी कहा कि वह संगठन के कार्यक्रमों में लगातार शामिल होते रहे हैं. उन्होंने अपने निलंबन के फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही. उनका कहना है कि जिन लोगों के पास गैरहाजिरी की कोई ठोस वजह नहीं थी उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन जिनकी वास्तविक मजबूरी थी उन्हें भी सस्पेंड करना सही नहीं है. शर्मा ने कहा कि कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब मांगा जाना चाहिए था.
किसी के चाचा का निधन तो किसी की बहन की शादी
- युवा कांग्रेस महासचिव रोहित राजौरिया ने बताया कि उनके चाचा का निधन हो गया था. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के एक अन्य पदाधिकारी रामाशंकर को इसकी जानकारी दी थी. राजौरिया के मुताबिक उन्होंने कार्यक्रम में शामिल न हो पाने के लिए अनुमति भी मांगी थी.
- वहीं युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने बताया कि उनकी छोटी बहन की शादी थी. वह परिवार में अकेले भाई हैं. शादी की जिम्मेदारियों के चलते उनके लिए दिल्ली जाना संभव नहीं था. उन्होंने कहा, ‘मेरी छोटी बहन की शादी थी. मैं घर में अकेला भाई हूं. शादी में बहुत सारे काम थे. इसलिए मैं रैली में नहीं जा सका. मैंने अपने वरिष्ठ नेताओं को इसकी वजह बता दी थी. अब उनके फैसले का इंतजार कर रहा हूं.’
बीमारी की वजह से भी कई नेता नहीं जा सके
अनूपपुर जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष मानवेंद्र मिश्रा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी तबीयत खराब थी. इसलिए वह दिल्ली नहीं जा सके. हालांकि उन्होंने माना कि प्रदेश नेतृत्व को अपनी गैरमौजूदगी की जानकारी नहीं दे पाए थे. मिश्रा ने कहा, ‘मैं बीमार था और अपनी सेहत की वजह से नहीं जा सका. मैंने प्रदेश नेतृत्व को इसकी जानकारी नहीं दी थी. यह संवाद की कमी थी. लेकिन मेरी पूरी टीम रैली में गई थी. हमने सभी के टिकट भी कराए थे. मैं नेतृत्व को अपना जवाब दूंगा.’
युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष राजवीर सिंह कुड़िया और महासचिव सुमन मौर्य ने भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को रैली में नहीं पहुंच पाने की वजह बताया. कुड़िया ने कहा कि उनकी तबीयत बहुत खराब थी. पार्टी के कार्यक्रमों में वह हमेशा सक्रिय रहते हैं. सुमन मौर्य ने बताया कि मौसम बदलने के कारण उन्हें बुखार और सर्दी-खांसी हो गई थी. उन्होंने कहा, ‘मैं बीमार थी. किसी को जानकारी नहीं दे पाई. मैंने किसी का फोन भी नहीं उठाया. मेरे वरिष्ठ नेता लगातार फोन कर रहे थे लेकिन मेरी तबीयत इतनी खराब थी कि मैं उन्हें बता भी नहीं सकी कि रैली में नहीं आ पाऊंगी.’
युवा कांग्रेस नेतृत्व ने क्या सफाई दी?
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस की प्रभारी शिवी सिंह चौहान ने निलंबन की कार्रवाई का बचाव किया है. उनका कहना है कि यह फैसला पदाधिकारियों की उपस्थिति और नेतृत्व के साथ उनके पहले हुए संवाद के आधार पर लिया गया है. चौहान ने कहा, ‘संगठन ने उनके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए कार्रवाई की है. जिन लोगों ने अपनी गैरमौजूदगी की जानकारी दी थी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई. कार्रवाई केवल उन लोगों पर हुई है जो नहीं आए और जिन्होंने इसकी जानकारी भी नहीं दी.’
यानी संगठन का कहना है कि उसने बिना वजह गैरहाजिर रहने वाले नेताओं पर ही कार्रवाई की है. दूसरी तरफ निलंबित पदाधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनकी मजबूरियों को समझने की कोशिश नहीं की गई. अब देखना होगा कि युवा कांग्रेस नेतृत्व इन नेताओं की अपील पर क्या फैसला लेता है.