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Priyanka Gandhi to take Charge of UP Elections: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में राहुल गांधी किसी किस्म की गड़बड़ी से बचने के लिए बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को उतार दिया है. राहुल हर हाल में अखिलेश यादव के साथ रिश्ते अच्छे रखना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस की सरकार बनाने का लक्ष्य तय किया है. ऐसे में कहा जा रहा है कि बात सपा के साथ चाहे सीट शेयरिंग का हो या हर सीट पर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं की एकजुटता बनाए रखने की, राहुल गांधी कहीं पर भी कमी नहीं रखना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने बहन प्रियंका गांधी को मोर्चे पर लगाया है. यहां तक कि अखिलेश यादव के साथ सीट शेयरिंग को लेकर होनी वाली बातचीत में खुद प्रियंका गांधी शामिल रहेंगी.
राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी को यूपी चुनाव की जिम्मेदारी सौंप दी है.
एसआईआर में गड़बड़ी और कथित वोट चोरी के आरोपों पर देशभर में बीजेपी और उनकी सरकारों को घेरने के मिशन में जुटे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा सबसे कठिन जिम्मेदारी सौंप दी है. पिछले दो दिनों से कांग्रेस नेताओं के आ रहे बयानों के बाद एक बात साफ हो गया है कि प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव संभालने को कहा गया है. 3 नवंबर को प्रियंका की दिल्ली में यूपी प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ मीटिंग के बाद स्पष्ट हो गया कि राहुल गांधी ने बहन को ही यूपी का जिम्मा सौंपा है. इस मीटिंग के बाद लखनऊ पहुंचीं आराधना मिश्रा ने कहा कि पूरी यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी का मार्गदर्शन और सलाह लगातार जारी रहेगा. साथ ही जरूरत पड़ने पर वह लखनऊ भी आएंगी.
सीट शेयरिंग पर अखिलेश यादव से खुद बात करेंगी प्रियंका
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अब तक ट्रबलशूटर, मास्टर स्ट्रैटजिस्ट और स्टार प्रचारक जैसी भूमिकाएं निभा चुकी हैं. लोकसभा में भी उन्होंने अपनी प्रभावशाली वक्ता की छवि बनाई है. अब रामलीला मैदान की बड़ी रैली के बाद उनका पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है. यूपी के नेताओं के साथ हुई बैठक में सबसे अहम चर्चा समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल को लेकर हुई. कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की स्थिति में सीटों का बंटवारा बड़ा मुद्दा होगा. दोनों दलों के बीच किस सीट पर कौन चुनाव लड़ेगा, इस पर बातचीत जरूरी होगी. बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी इस पूरी प्रक्रिया में खुद शामिल रहेंगी. अखिलेश यादव के साथ बातचीत की जिम्मेदारी भी वह अपने हाथ में रखेंगी. यानी प्रियंका गांधी केवल पर्दे के पीछे रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहेंगी. गठबंधन से जुड़े अहम फैसलों में भी उनकी सीधी भूमिका होगी.
दिवाली के बाद सामने आएगी कांग्रेस की अंदरूनी टीम
बैठक में संगठन और नेताओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि दिवाली के बाद कांग्रेस अपनी आंतरिक टीम की सूची जारी कर सकती है. इसमें यूपी के क्षेत्रीय नेताओं और प्रभावशाली चेहरों को जगह दी जाएगी. पार्टी की कोशिश है कि सभी प्रमुख नेताओं को साथ लेकर चला जाए. प्रियंका गांधी ने यूपी से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना भी की. साथ ही उन्हें एक अहम संदेश दिया. चुनाव तक सभी नेताओं को संयम बरतना होगा. अनावश्यक बयानबाजी से बचना होगा. ऐसा कोई बयान नहीं आना चाहिए, जिससे कांग्रेस की चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंचे.
4 रैलियों से यूपी चुनाव का आगाज करेंगी प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी सिर्फ संगठन और गठबंधन तक सीमित नहीं रहेंगी. वह चुनाव प्रचार का चेहरा भी होंगी. उनकी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में चार बड़ी रैलियां कराने की तैयारी है. इन रैलियों के जरिए पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र को साधने की कोशिश होगी. कांग्रेस चाहती है कि प्रियंका सीधे जनता के बीच जाएं. उनकी लोकप्रियता और जनसंपर्क का फायदा पार्टी को मिले. प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस का सबसे भरोसेमंद चेहरा मानी जाती हैं. उनकी सभाओं में भीड़ जुटाने की क्षमता है. लेकिन कांग्रेस के सामने असली चुनौती इस भीड़ को वोट में बदलने की है. पार्टी को यह समझना होगा कि जनसभाओं में उमड़ने वाली भीड़ मतदान के दिन कांग्रेस के पक्ष में कैसे खड़ी हो.
सपा की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते राहुल गांधी
राहुल गांधी की भूमिका भी इस पूरी रणनीति में अहम होगी. वह पांच राज्यों के चुनावी अभियान में सक्रिय रहेंगे. उत्तर प्रदेश से उनका संसदीय जुड़ाव भी है. लेकिन यूपी में संगठन और गठबंधन की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी के हाथों में रहने के संकेत मिल रहे हैं. कांग्रेस की कोशिश है कि समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल में कोई गड़बड़ी न हो. सीटों के बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक दोनों दलों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे. प्रियंका गांधी इसी रणनीति को जमीन पर उतारने में जुटी हैं.
फिलहाल यह बैठक यूपी चुनाव की तैयारी का शुरुआती कदम है. आने वाले दिनों में प्रियंका की सक्रियता और बढ़ सकती है. अब देखना होगा कि उनकी रणनीति कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में कितनी मजबूती देती है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रियंका गांधी की सक्रियता और अखिलेश यादव के साथ गठबंधन कांग्रेस के लिए चुनावी तस्वीर बदल पाएगा?