2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजे आ चुके हैं और इन नतीजों ने अमेरिका की सियासत में ऐसा भूचाल ला दिया है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए ये चुनाव किसी बड़े सदमे से कम नहीं रहा है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने ज़बरदस्त वापसी करते हुए संसद के दोनों सदनों, सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स पर पूरा कंट्रोल हासिल कर लिया है. वैसे तो चुनाव के दौरान मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल एल-सईद की जीत के खूब चर्चे रहे, लेकिन असली सियासी खेल उन चार-पांच पारंपरिक गढ़ों में हुई जहां रिपब्लिकन पार्टी का दशकों से राज था.
जब उम्मीदों से बहुत आगे निकल गई ‘ब्लू वेव’
चुनाव से पहले ओपिनियन पोल और राजनीतिक पंडितों का अनुमान था कि डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस में थोड़ी बढ़त बना सकती है और सीनेट में भी मुकाबला कड़ा रह सकता है. लेकिन जब नतीजे सामने आए, तो डेमोक्रेट्स ने जो जीत हासिल की, उसने सारे चुनावी समीकरणों को धड़ाम कर दिया.
पार्टी ने सीनेट में सात नई सीटें पलट दीं, हाउस में दो दर्जन से ज्यादा सीटें अपने नाम कीं और गवर्नरों की रेस में भी बड़ा विस्तार किया. मतदान के कुछ ही घंटों के भीतर एसोसिएटेड प्रेस ने डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों का विजेता घोषित कर दिया. ये इस बात का साफ संकेत था कि आम जनता ट्रंप प्रशासन की नीतियों और आसमान छूती महंगाई से बुरी तरह त्रस्त हो चुकी है.
ट्रंप के वो 4 सबसे बड़े गढ़, जहां ढह गया रिपब्लिकन किला
इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी उन राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत है, जिन्हें दशकों से कंजर्वेटिव और रिपब्लिकन पार्टी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता था. इन जगहों पर मिली हार ने ट्रंप और उनकी पार्टी की नींव हिला दी हैं.
- कंसास में 94 साल का सूखा खत्म: कंसास में डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल को धूल चटा दी. कंसास के चुनावी इतिहास में पिछले 94 सालों में ये पहला मौका है जब किसी डेमोक्रेट ने यहां सीनेट सीट पर कब्जा जमाया है.
- साउथ कैरोलिना में ऐतिहासिक उलटफेर: साउथ कैरोलिना में डेमोक्रेट एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लीन ग्राहम को हरा दिया. डार्लीन कोई आम नेता नहीं थीं, बल्कि वो दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन और ट्रंप की बेहद करीबी सहयोगी थीं. लगभग तीन दशकों में ये पहला मौका है जब रिपब्लिकन पार्टी को इस राज्य में सीनेट चुनाव गंवाना पड़ा है.
- टेक्सास में 38 साल का राज खत्म: टेक्सास को रिपब्लिकन पार्टी का अजेय गढ़ माना जाता था. यहां डेमोक्रेट उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने राज्य के अटॉर्नी जनरल और ट्रंप समर्थक केन पैक्सटन को चुनाव हरा दिया. इस एक जीत ने टेक्सास में पिछले 38 सालों से चले आ रहे रिपब्लिकन दबदबे को पूरी तरह समाप्त कर दिया.
- आयोवा और नॉर्थ कैरोलिना की वापसी: इन दोनों राज्यों में 2008 के बाद से किसी भी डेमोक्रेटिक सीनेटर ने जीत दर्ज नहीं की थी. लेकिन 2026 के इन मिडटर्म चुनावों में यहां भी डेमोक्रेटिक पार्टी का हाथ मजबूत होने की इबारत लिख दी गई.
चुनाव हारते ही ट्रंप ने झाड़ा पल्ला, बोले ‘मैं मैदान में नहीं था’
चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. उन्होंने अपने समर्थकों से बार-बार अपील की थी कि वो ऐसे वोट डालें जैसे खुद ट्रंप बैलेट पेपर पर खड़े हों. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में जमकर रैलियां कीं और अपनी पसंद के चेहरों को आगे बढ़ाया.
लेकिन जैसे ही हार के आंकड़े सामने आए, ट्रंप के तेवर पूरी तरह बदल गए. अपनी पार्टी की इस ऐतिहासिक हार से पल्ला झाड़ते हुए उन्होंने अजीबोगरीब बयान दिया. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि चूँकि वो खुद सीधे तौर पर चुनाव मैदान में उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए इस हार को उनके कामकाज पर जनता का फैसला नहीं माना जा सकता. उन्होंने दावा किया कि अगर वो खुद टिकट पर होते, तो पार्टी एकतरफा प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करती.
ट्रंप की पसंद और उनके ‘एंडोर्समेंट’ की हवा निकली
इन चुनावों ने इस बात पर भी मुहर लगा दी है कि अब ट्रंप का समर्थन ऑटोमैटिक जीत की गारंटी नहीं रहा. ट्रंप ने प्राइमरी चुनावों से लेकर मुख्य चुनावों तक जिन-जिन चेहरों पर दांव खेला था, उनमें से कई दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी.
- टेक्सास में केन पैक्सटन को ट्रंप का खुला समर्थन हासिल था, फिर भी वो जेम्स टालारिको से चुनाव हार गए.
- साउथ कैरोलिना में डार्लीन ग्राहम के लिए खुद ट्रंप ने जमीन-आसमान एक कर दिया था, लेकिन वो भी अपनी सीट नहीं बचा पाईं.
- नॉर्थ कैरोलिना में आरएनसी के पूर्व चेयरमैन माइकल वाटले को ट्रंप ने मैदान में उतारा था, लेकिन वो भी डेमोक्रेटिक लहर के आगे टिक नहीं पाए.
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बजी खतरे की घंटी
2026 के इन मिडटर्म चुनावों ने अमेरिकी राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं. संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा होने का सीधा मतलब ये है कि अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपने एजेंडे के कानून पास कराना आसान नहीं होगा. आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस को हर नीति और बजट के लिए विपक्ष के तीखे सवालों और तगड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का बचा हुआ समय अब कड़े राजनीतिक संघर्ष और चुनौतियों से भरा रहने वाला है.