सौरमंडल के किनारे पर घूम रहे बर्फीले दानव, चिली में लगे सुपर कैमरे ने खोज लिया
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Neptune’s Trojan Asteroids: खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नेपच्यून (वरुण ग्रह) की कक्षा में परिक्रमा कर रहे दुर्लभ ट्रोजन एस्टेरॉयड को खोज निकाला है. दशकों से वैज्ञानिक इन बर्फीले पिंडों को तलाशने में जुटे थे. चिली में स्थापित अत्याधुनिक वेरा सी. रुबिन ऑब्जर्वेटरी के डेटा से यह सफलता मिली है. इस टेलीस्कोप ने नेपच्यून के पीछे चलने वाले ट्रोजन बादलों में दो नए एस्टेरॉयड और एक संभावित उम्मीदवार की पहचान की है.
नेपच्यून के ट्रोजन समूहों का एक आर्टिस्टिक इमेज. (Credit: FlyAzure/J.Murtagh/NASA/JAXA)
Space News: एस्ट्रोनॉमर्स को एक बड़ी कामयाबी मिली है. हमारे सौरमंडल के सबसे सुदूर ग्रह नेपच्यून की परिक्रमा पथ में दशकों से गायब चल रहे ट्रोजन एस्टेरॉयड को आखिरकार खोज लिया गया है. क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के नेतृत्व में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम ने इन बर्फीले पिंडों का पता लगाया है. वैज्ञानिकों ने चिली के एंडीज पहाड़ों पर मौजूद वेरा सी. रुबिन ऑब्जर्वेटरी के शुरुआती डेटा का एनालिसिस करके यह सफलता हासिल की है. रिसर्चर्स ने नेपच्यून के पीछे चलने वाले ट्रोजन ग्रुप में दो स्थायी एस्टेरॉयड और एक संभावित कैंडिडेट की पुष्टि की है.
दशकों तक वैज्ञानिकों की नजरों से कैसे बचते रहे नेपच्यून के ट्रोजन?
साल 1906 में पहली बार टेलीस्कोप के जरिए बृहस्पति ग्रह के आगे और पीछे चलने वाले एस्टेरॉयड के झुंड देखे गए थे. इन्हें खगोलशास्त्रियों ने ‘ट्रोजन’ और ‘ग्रीक’ नाम दिया था. इसके बाद के दशकों में शनि और यूरेनस की कक्षाओं में भी ऐसे ही एस्टेरॉयड परिवार खोज लिए गए. लेकिन नेपच्यून के ट्रोजन खगोलविदों को लगातार चकमा दे रहे थे. नेपच्यून सूरज से अत्यधिक दूरी पर स्थित है.
इतनी दूरी पर मौजूद छोटे और धुंधले पिंडों को रात के अंधेरे में ट्रैक करना हमेशा से कठिन रहा है. धरती से देखने पर इन एस्टेरॉयड की चमक इतनी मद्धम होती है कि सामान्य टेलीस्कोप इन्हें पकड़ नहीं पाते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से मान रहे थे कि वहां एस्टेरॉयड होने चाहिए, लेकिन पुख्ता सबूत हाथ नहीं लग पा रहे थे.
वेरा रुबिन ऑब्जर्वेटरी के कैमरे ने चिली की चोटी से क्या कमाल दिखाया?
इस पुरानी पहेली को सुलझाने में चिली स्थित वेरा सी. रुबिन ऑब्जर्वेटरी ने अहम भूमिका निभाई है. इस ऑब्जर्वेटरी में 8.4 मीटर का सिमोनी सर्वे टेलीस्कोप लगा है. इसके साथ दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा एलएसएसटी जोड़ा गया है. इस टेलीस्कोप ने जून 2025 में काम शुरू किया था. यह दुनिया का सबसे तेज गति से आसमान का सर्वे करने वाला ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप है.
क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट की एस्ट्रोनॉमर डॉ. मेग श्वाम्ब और उनकी टीम ने इसी टेलीस्कोप के शुरुआती टेस्ट डेटा की पड़ताल की. डॉ. श्वाम्ब ने कहा, ‘रुबिन ऑब्जर्वेटरी के शुरुआती डेटा ने एस्टेरॉयड और धूमकेतु जैसे छोटे खगोलीय पिंडों के बारे में हमारी जानकारी को काफी बढ़ा दिया है.’ इस टेलीस्कोप के हाई-रेजोल्यूशन लेंस ने नेपच्यून के पीछे चल रहे ट्रोजन बादलों की अब तक की सबसे साफ तस्वीर वैज्ञानिकों के सामने रखी है.
मिल्की वे के घने तारों के पीछे आखिर क्यों छिप गए थे ये बर्फीले पत्थर?
नेपच्यून के ट्रोजन समूहों की कलाकार द्वारा बनाई गई कल्पना, जिसमें ऐसी ही एक वस्तु का क्लोज-अप भी शामिल है. (Image Credit: FlyAzure/J.Murtagh/NASA/JAXA)
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