Kuchipudi Dancer Bhargavi: मंचेरियल की बेटी ने कुचिपुड़ी नृत्यांगना भार्गवी 750 मंचों पर दिखाया हुनर, लंदन की संसद में भी मिला सम्मान

Kuchipudi Dancer Bhargavi: मंचेरियल की बेटी ने कुचिपुड़ी नृत्यांगना भार्गवी 750 मंचों पर दिखाया हुनर, लंदन की संसद में भी मिला सम्मान


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Kuchipudi Dancer Bhargavi Journey: तेलंगाना के मंचेरियल की कुचिपुड़ी नृत्यांगना भार्गवी ने 750 से अधिक अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुतियां देकर देश का नाम रोशन किया है. HCU से मास्टर्स करने वाली भार्गवी ने 2008 में दूरदर्शन के डांस शो से शुरुआत की थी. ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी व लंदन संसद में सम्मानित हो चुकीं भार्गवी ने एक डांस इंस्टीट्यूट की स्थापना की है, जिसमें भारत, अमेरिका व दुबई के 100 से अधिक बच्चे सीख रहे हैं. वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पति प्रेम को देती हैं.

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तेलंगाना: तेलंगाना के छोटे से शहर मंचेरियल से निकलकर शास्त्रीय कला के दम पर दुनिया भर में नाम कमाना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन कुचिपुड़ी नृत्यांगना भार्गवी ने इसे हकीकत में बदल दिखाया है. अपनी लगन, कठिन अभ्यास और अटूट हौसले के दम पर आज वे भारतीय शास्त्रीय नृत्य कुचिपुड़ी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरव दिला रही हैं. भार्गवी ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) से कुचिपुड़ी में मास्टर्स इन परफॉर्मिंग आर्ट्स की उच्च डिग्री प्राप्त की है.

भार्गवी ने बताया कि बचपन से ही नृत्य के प्रति उनका गहरा लगाव था. साल 2008 में जब वे काफी छोटी थीं, तब उन्होंने दूरदर्शन के प्रतिष्ठित नृत्य कार्यक्रम में विजेता बनकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. यह वही दौर था जब उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि शास्त्रीय नृत्य ही उनके जीवन की असली राह है. भार्गवी अब तक 750 से अधिक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं. वे देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और आयरलैंड जैसे देशों में अपने गुरु के साथ कुचिपुड़ी का परचम लहरा चुकी हैं. उनकी उत्कृष्ट कला के लिए उन्हें लंदन की संसद में भी सम्मानित किया जा चुका है.

आलोचनाओं को दरकिनार कर की नृत्य संस्थान की स्थापना
नृत्य को करियर के रूप में चुनने पर उन्हें कई लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. लोगों का मानना था कि पढ़ाई के अलावा नृत्य में समय और धन लगाना व्यर्थ है, मगर भार्गवी ने इन बातों की परवाह किए बिना अपनी कला को प्राथमिकता दी. उनका मानना है कि पढ़ाई अपनी जगह जरूरी है, लेकिन एक कलाकार के तौर पर जो सम्मान और पहचान मिलती है वह अनमोल है. इसी सोच के साथ उन्होंने आने वाली पीढ़ी तक इस प्राचीन कला को पहुँचाने के लिए एक नृत्य संस्थान की स्थापना की. आज उनके संस्थान में 100 से अधिक बच्चे नृत्य की बारीकियां सीख रहे हैं, जिनमें भारत के साथ-साथ अमेरिका और दुबई के विद्यार्थी भी शामिल हैं.

परिवार का मिला सहयोग और महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
भार्गवी अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और अपने पति प्रेम को देती हैं. शादी के बाद और दो साल की एक बेटी की माँ होने के बावजूद, उनके पति ने संस्थान को संचालित करने और उनके सपनों को उड़ान देने में पूरा सहयोग दिया. भार्गवी आज हर महिला के लिए एक मिसाल हैं कि परिवार के सहयोग और आत्मबल से किसी भी कला को जीवनभर जिया जा सकता है.



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