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बागेश्वर में नुमाइशखेत में सरस मेला लग चुका है. ग्रामीण विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित यह मेला पांच नवंबर तक चलेगा. मेले का शुभारंभ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, बागेश्वर विधायक पार्वती दास और कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने किया. मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रही हैं. यहां स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के साथ ही लोक संस्कृति और पारंपरिक गतिविधियों का आनंद लिया जा रहा है.
बागेश्वर: नुमाइशखेत मैदान में 3 नवंबर से सरस मेले का आगाज हो गया है. ग्रामीण विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित यह मेला पांच नवंबर तक चलेगा. मेले का शुभारंभ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, बागेश्वर विधायक पार्वती दास और कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया ने किया. मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रही हैं. यहां स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के साथ ही लोक संस्कृति और पारंपरिक गतिविधियों का आनंद लिया जा रहा है.
35 स्टॉलों पर स्थानीय उत्पादों का प्रर्दशन
स्टॉल संचालक चांदनी कोरंगा ने बताया कि मेले में कुल 35 स्टॉल लगाए गए हैं. इनमें कृषि, उद्यान, उद्योग विभाग और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है. मेले में आने वाले लोग स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं. स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं.
स्टॉल संचालक सोनू धामी ने बताया कि मेले में पहाड़ी खानपान से जुड़े उत्पाद, स्थानीय कृषि और उद्यान उत्पाद, हस्तनिर्मित वस्तुएं और पारंपरिक उत्पाद आकर्षण का केंद्र हैं. मेले का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के मौके देना है.
लोकगीत, लोकनृत्य और प्रतियोगिताएं होंगी आकर्षण
स्वयं सहायता समूह की महिला दीपा नगरकोटी ने बताया कि सरस मेले में खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है. जिससे लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है. इसके अलावा मेहंदी और ऐपण प्रतियोगिताओं के साथ विभिन्न खेल गतिविधियां भी आयोजित की जा रही है. इससे मेले में आने वाले लोगों को मनोरंजन के साथ स्थानीय परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिलेगा.
बायर-सेलर मीट से महिला समूहों को मिलेगा बाजार
स्वयं सहायता समूह की महिला रीता जोशी ने बताया कि मेले में बायर-सेलर मीट का आयोजन भी किया जा रहा है. इसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सीधे खरीदारों और व्यापारियों से जुड़ रही है. इससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है. महिला समूहों को अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने के नये मौके भी मिल रहे हैं. इधर जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने बताया कि मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी. साथ ही लखपति दीदी के लक्ष्य को गति मिलेगी.
समूह की महिला शालिनी ने कहा कि सरस मेले के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों की पहचान बनाने और उन्हें व्यापक बाजार तक पहुंचाने का मौका मिल रहा है. तीन दिवसीय ये मेला स्थानीय उत्पादों की बिक्री, महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है.