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Banana Fiber Products: बुरहानपुर जिले के बसाड गांव में रजनी चौहान की पहल से 15 से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. ये महिलाएं केले के रेशे से आकर्षक उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. उनकी यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकती हैं.
Banana Fiber Products: जिले के बसाड गांव की महिलाओं ने मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. यहां रजनी चौहान की पहल से 15 से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब केले के रेशे से आकर्षक उत्पाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं. उनके इस प्रयास से गांव में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं.
महिला ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को महिला रजनी चौहान ने 15 साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने काम की शुरुआत की. समूह के माध्यम से उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और हैंडलूम पर कपड़ा बुनने की कला सीखी. इसके बाद उन्होंने केले के रेशे से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाने का काम शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी इस काम से जोड़ना शुरू किया. आज 15 से अधिक महिलाएं इस गतिविधि के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं.
जैविक खाद करती हैं तैयार
रजनी चौहान बताती हैं कि परिवार के सहयोग से उन्होंने खाद निर्माण नर्सरी संचालन और केले के रेशे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने का काम शुरू किया. केले की खेती के लिए प्रसिद्ध बुरहानपुर जिले में केले के रेशे का उपयोग कर नए उत्पाद तैयार करना उनके लिए रोजगार का बेहतर माध्यम बना. इस पहल से खेती में उपयोग होने वाले केले के पौधे के रेशे को भी उपयोगी बनाया जा रहा है. महिलाएं केले के रेशे से कपड़े सहित विभिन्न प्रकार की आकर्षक वस्तुएं तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों को बनाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण और आपसी सहयोग के माध्यम से लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है. इससे महिलाओं में हुनर विकसित होने के साथ उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
रजनी चौहान का उद्देश्य इस पहल को और विस्तार देना है, ताकि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं रोजगार से जुड़ सकें और अपनी पहचान बना सकें. उनकी यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और परिवार के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकती हैं.