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Mathura Yamuna River Pollution: जिस पावन यमुना के तट पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं रची गईं और जिसकी गोद में सदियों से करोड़ों भक्त मुक्ति की आस लिए डुबकी लगाते रहे हैं, वही कलिंद नंदिनी आज मथुरा में अपने अस्तित्व और शुद्धता के लिए छटपटा रही है. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया जांच रिपोर्ट ने यह खौफनाक सच सामने ला दिया है कि मथुरा के घाटों पर यमुना का जल आचमन तो दूर, स्पर्श करने योग्य भी नहीं बचा है. पानी में जानलेवा बैक्टीरिया और विषैले तत्वों की भरमार ने इसे ‘डी श्रेणी’ के गंदे नाले में तब्दील कर दिया है.
Mathura Yamuna River Pollution: मथुरा धार्मिक दृष्टि से विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखता है. यहां आने वाले हजारों श्रद्धालु देश-विदेश के कोने-कोने से पहुंचते हैं. कृष्ण की पटरानी यमुना महारानी का आचमन करने के साथ-साथ लोग यहां स्नान के बाद अपने पापों का बोझ यमुना में प्रवाहित कर देते हैं. लेकिन कृष्ण की पटरानी यमुना महारानी आज अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहा रही हैं. सदियों से जो लोगों के पाप धोती आ रही थीं, आज वही अपने आंचल को साफ करने में असमर्थ हैं. यहां लोग आकर स्नान करना तो दूर, अब आचमन करने से कतराते हैं.
प्रदूषण विभाग की चौंकाने वाली रिपोर्ट
यमुना जल में घुले हुए विषैले बैक्टीरिया लोगों की जिंदगी के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं. प्रदूषण विभाग की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. यमुना जल का आचमन लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्या बनता जा रहा है. आचमन तो छोड़िए, कान्हा की नगरी मथुरा में तो यमुना का जल छूने योग्य भी नहीं रह गया है. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में आया है कि मथुरा के सभी घाटों पर नदी का पानी मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवों के लिए घातक हो गया है.
विश्राम घाट पर मानकों की अनदेखी और गंभीर संक्रमण
अध्यात्म की इस नगरी में धर्मलाभ लेने के लिए घाटों पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं, आचमन करते हैं. यमुना का जल बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है. डी श्रेणी में पहुंचे इस प्रदूषित पानी में बीओडी का बढ़ता स्तर जहां जैविक संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहा है, तो वहीं मानक से कई गुना पाया गया कोलीफॉर्म विभिन्न बीमारियों को न्योता दे रहा है. अगस्त माह में यमुना नदी के स्थानीय सभी मुख्य निगरानी केंद्रों के नमूने लेकर रिपोर्ट जारी कर दी गई है. मथुरा के सबसे प्रसिद्ध विश्राम घाट पर जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) मानक से करीब चार गुना अधिक है. बीओडी का बढ़ना बताता है कि पानी में भारी जैविक प्रदूषण फैल रहा है.
घातक कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और जलीय जीवों पर असर
कोलीफॉर्म का स्तर 79,000 से 92,000 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर पाया गया है. इसका मानक 2,500 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर है. कोलीफॉर्म की यह स्थिति बताती है कि यह पानी अत्यधिक पशु या मानव मल से दूषित है. ऐसे पानी को निगलने या उसके संपर्क में आने से दस्त, उल्टी और पेट-आंतों के गंभीर संक्रमण का जोखिम रहता है. उच्च बीओडी स्तर पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर दबाव डालता है. इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. मथुरा के नमूनों में घुलित ऑक्सीजन 8.40 से 13 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज है, जबकि मानक लगभग 3 मिलीग्राम प्रति लीटर का है.
प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों पर फूटा गुस्सा
लोकल 18 की टीम ने जब स्थानीय लोगों से यमुना जल को लेकर बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि यह प्रशासन की उदासीनता का परिणाम है. जो भी प्रशासनिक अधिकारी आता है, वह यमुना जी के प्रदूषण पर ध्यान नहीं देता है. साथ ही स्थानीय नागरिक और तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक महेश पाठक चतुर्वेदी, राकेश तिवारी और संजय चतुर्वेदी ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि यहां जनप्रतिनिधि 10 और 15 साल से लगातार सत्ता में हैं. यमुना के घाट पर आकर यमुना स्वच्छ करने की कसम और दावे तो किए गए, लेकिन आज तक मां यमुना का आंचल साफ नहीं हो पाया है. जब तक दिल्ली के हथिनीकुंड से पानी नहीं छोड़ा जाएगा और स्थानीय सीवर व नालों का मल-मूत्र यमुना में जाना बंद नहीं होगा, तब तक मां यमुना का शुद्धिकरण नहीं हो सकता.